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सैनिक भेजकर ईरान का 400 किलो यूरेनियम छीनना चाहते हैं ट्रंप, पता है ये काम कितना मुश्किल है?

कई न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि Iran में अमेरिकी सैनिकों की बड़ी संख्या में तैनाती के बिना ईरान का Enriched Uranium नहीं छीना जा सकता. लेकिन यह Donald Trump के लिए एक खतरनाक और राजनीतिक रूप से मुश्किल ऑपरेशन साबित हो सकता है. क्योंकि इसमें बहुत बड़ी अड़चनें आने वाली हैं.

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30 मार्च 2026 (अपडेटेड: 30 मार्च 2026, 02:11 PM IST)
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डॉनल्ड ट्रंप (बाएं) ईरान के न्यूक्लियर हथियार बनाने के सख्त खिलाफ हैं. (ITG)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरान पर हमले के पीछे अपने मकसद बदलते रहे हैं. कभी कहते हैं कि ईरान की रिजीम बदलने के लिए अटैक किया गया, कभी कि ईरान परमाणु हथियार बनाने वाला था, तो कभी कि ईरान की मिसाइल ताकत को नेस्तनाबूद करना है. अब ट्रंप ने ग्राउंड ऑपरेशन का शिगूफा छेड़ा है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप ईरान में अमेरिकी सैनिक भेजकर ईरान का करीब 400 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम कब्जाना चाहते हैं. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

डॉनल्ड ट्रंप ने अपने राजनीतिक साथियों को एक बात साफ कर दी है कि ईरान अपने पास न्यूक्लियर हथियार बनाने लायक यूरेनियम नहीं रख सकता. अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने अपनी खबर में अमेरिकी राष्ट्रपति के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया कि ट्रंप ने इस बात पर भी बात की कि अगर ईरान बातचीत की टेबल पर एनरिच्ड यूरेनियम नहीं देता है, तो वे उसे 'जबरदस्ती जब्त' कर सकते हैं.

लेकिन ईरान जाकर उसका यूरेनियम छीनना इतना आसान नहीं है. अमेरिका में इस कदम को लेकर एकराय भी नहीं है. खुद ट्रंप ने खुलकर इसका ऐलान नहीं किया है कि अमेरिकी सैनिक ईरान की जमीन पर उतरकर उसका यूरेनियम छीन लाएंगे. ग्राउंड ऑपरेशन का अंदेशा तो है, क्योंकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड बता चुका है कि 3500 नाविक और मरीन वेस्ट एशिया पहुंच चुके हैं.

रिपोर्ट में उन खतरों का भी जिक्र किया गया, जिसका अमेरिका और डॉनल्ड ट्रंप को सामना करना होगा. पहली बात तो ईरानी सैनिकों के साथ सीधी जमीनी जंग में अमेरिका को अपने सैनिकों की जान का नुकसान उठाना पड़ सकता है. दूसरी बात ये कि यूरेनियम को जब्त करना एक रिस्की और कॉम्प्लिकेटेड प्रोजेक्ट है.

माना जाता है कि ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम का ज्यादातर हिस्सा एक पहाड़ी जगह के काफी नीचे दबा हुआ है, जिस पर जून 2025 में अमेरिका ने बमबारी की थी. तब ट्रंप ने दावा किया था कि तेहरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम 'खत्म' कर दिया गया है.

लेकिन, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी के अनुसार, ईरान का न्यूक्लियर मटीरियल ज्यादातर उन तीन में से दो जगहों पर स्टोर किया जाता है, जिन पर बीते साल अमेरिका ने हमला किया था- इस्फहान में न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में एक अंडरग्राउंड टनल और नतांज में एक कैश.

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉनल्ड ट्रंप और उनके कुछ साथियों को लगता है कि एक टारगेटेड ऑपरेशन चलाकर ईरान का यूरेनियम छीना जा सकता है. उनका यह भी मानना है कि इससे जंग आगे नहीं खिसकेगी और ये काम अमेरिका अप्रैल के बीच तक पूरा कर सकता है.

कई न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि ईरान में अमेरिकी सैनिकों की बड़ी संख्या में तैनाती के बिना ईरान का यूरेनियम नहीं छीना जा सकता. यह रिपब्लिकन प्रेसिडेंट के लिए एक खतरनाक और राजनीतिक रूप से मुश्किल ऑपरेशन होगा, जिन्होंने वादा किया था कि वे अमेरिका को मिडिल ईस्ट की किसी भी जंग में नहीं उलझाएंगे.

WSJ ने पूर्व अमेरिकी मिलिट्री अधिकारियों और एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया कि ईरान का यूरेनियम छीनने के ऑपरेशन से ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई शुरू हो सकती है. इससे युद्ध 4-6 हफ्ते से भी लंबा खिंच सकता है.

ईरान के साथ जंग आगे बढ़ी तो अमेरिका में मिडटर्म चुनाव भी हैं. सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी कमांडर-इन-चीफ यानी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने साथियों से कहा है कि वे 'लंबी लड़ाई' नहीं चाहते हैं. ट्रंप के कुछ टॉप साथी चाहते हैं कि ट्रंप आगामी मिडटर्म चुनावों पर ध्यान दें, क्योंकि पोल्स के मुताबिक चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को काफी नुकसान हो सकता है.

अमेरिका को बहुत भारी पड़ सकता है ये ऑपरेशन

एक्सपर्ट्स ने बताया कि ऐसे ऑपरेशन के लिए अमेरिकी सेना की टीमों को ईरानी साइट्स में घुसना होगा. यहां तेहरान की सरफेस-टू-एयर मिसाइल और ड्रोन उनके स्वागत के लिए तैयार रहेंगे. अमेरिकी सैनिकों को सबसे पहले एक सुरक्षित दायरा बनाना होगा, ताकि इंजीनियर खुदाई के इक्विपमेंट के साथ जानलेवा माइंस और बूबी ट्रैप ढूंढ सकें.

न्यूक्लियर मटीरियल मिलने के बाद इसे निकालने के लिए एक एलीट स्पेशल ऑपरेशन टीम की जरूरत होगी. रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत ज्यादा एनरिच्ड यूरेनियम शायद 40 से 50 खास सिलेंडर में है, जो स्कूबा टैंक जैसे दिखते हैं.

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अमेरिका को ऐसे ट्रेंड लोग चाहिए, जो ट्रांसपोर्टेशन कास्क को सिलेंडर पर रख सकें. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सीनियर रिसर्च स्कॉलर और ईरान के साथ पहली न्यूक्लियर नेगोशिएशन में बात करने वाले रिचर्ड नेफ्यू ने कहा कि इस काम को करने के लिए बहुत जगह और कई ट्रक लगेंगे. ईरान से एनरिच्ड यूरेनियम को बाहर ले जाने के लिए एक एयरफील्ड भी चाहिए. अगर वो नहीं मिली, तो अमेरिका को एक कामचलाऊ एयरफील्ड बनानी होगी.

एक्सपर्ट्स ने कहा कि पूरे ऑपरेशन को पूरा होने में कई दिन या एक हफ्ता भी लग सकता है. ट्रंप को अपने सहयोगियों को भी साधाना होगा, क्योंकि ट्रंप ने खुद कहा कि ईरान की न्यूक्लियर क्षमता खत्म करने की कार्रवाई को लेकर उनकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर (DNI) तुलसी गबार्ड का रुख ईरान के लिए 'नरम' है.

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