कभी होटल में खाना खाने जाओ तो चिरैया के चुगने जितना खाने का लेते हैं 500 रुपया.और उसमें सर्विस चार्ज जोड़ते हैं 100 रुपये का. कुल मिलकर जरा से खाने के हम देतेहैं 600 रुपये. और घर पहुंचते-पहुंचते भूख से फिर आंतें कल्लाने लगती हैं. ऐसे समयमें खाने का बिल नहीं खलता. खलता है तो कमबख्त सर्विस चार्ज. लेकिन सरकार ने आज एकबहुत सही बात बताई है. यानी मिनिस्ट्री ऑफ़ कंज्यूमर अफेयर्स, फ़ूड एंड पब्लिकडिस्ट्रीब्यूशन ने. कहा है कि अगर आप होटल की सर्विस से खुश नहीं है तो सर्विसचार्ज देने से इनकार कर सकते हैं. और सही भी है. जब सर्विस ही ठीक नहीं तो चार्जकिस बात का भरें. और इतना ही नहीं. हर रेस्टोरेंट को अपने यहां लिखकर चिपकाना होगा.कि सेवा से खुश नहीं हैं तो सर्विस चार्ज न दें. ऐसा मिनिस्ट्री ने इसलिए किया,क्योंकि कस्टमर से शिकायत खूब आती थी. कि सर्विस तो दी नहीं, चार्ज और ले लिया. सहीहै. अब होटल में खाने में आएगा मजा.