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डीएम की बदज़ुबानी: गांव वाले से कहा, 'पैसे नहीं हैं तो बीवी को बेच दो'

अगर इंटेंशन अच्छी है, तो शब्द भी तो अच्छे होने चाहिए न!

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24 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 24 जुलाई 2017, 07:02 AM IST)
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ज़ुबान में हड्डी नहीं होती, कबूल, लेकिन उसपर लगाम तो लगाई ही जा सकती है. ख़ास तौर से तब, जब आप स्टेज पर हो और आपके हाथ में माइक हो. लेकिन ये डीएम साहब ये बात भूल गए. ये भी भूल गए कि कैमरे पर हैं. बस चला दी ज़ुबान. और फिर उससे ऐसे फूल झरे कि श्रोता धन्य हो गए. किस्सा बिहार का है. बिहार के औरंगाबाद जिले के डीएम कंवल तनुज ने एक गरीब गांववाले को ऐसी सलाह दे दी कि समझ नहीं आता उनकी बुद्धि पर तरस खाएं या उनकी धृष्टता पर लानत भेजें. कंवल तनुज साहब स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता फैलाने गए थे. उन्हें लोगों को बताना था कि खुले में शौच करना कितना हानिकारक है और क्यों घर में टॉयलेट्स बनाने चाहिए. लेकिन कर बैठे वो कुछ अनोखा ही. लोगों से बात करते हुए उन्होंने टॉयलेट को इज्ज़त से जोड़ने की कोशिश की. बोले, “अपनी औरतों की इज्ज़त बचाओ. कितने गरीब हो आप लोग? क्या आपकी बीवी की इज्ज़त की कीमत 12,000 से कम है?” आगे ये भी बोले,
“ऐसा कौन सा आदमी है, जो कहेगा कि मेरी बीवी की इज्ज़त ले लो और मुझे 12,000 रुपए दे दो. कोई नहीं होगा.”
इसके बाद पब्लिक में से किसी ने कहा कि वो बहुत गरीब है. उसके पास इतने पैसे नहीं हैं. वो टॉयलेट नहीं बना सकता. डीएम साहब गरजे,
“आपसे भी बात करेंगे. जाओ बेच दो जा के अपनी बीवी को. अरे जाओ बेच दो और शराब पी जाओ दो दिन की. अगर ये मानसिकता है तो नीलाम कर दीजिए अपने घर की इज्ज़त. और कह दीजिए सरकार से नहीं बनेगा हमसे शौचालय.”
देखिए डीएम साहब की बदज़ुबानी का वीडियो: अक्षय कुमार की फिल्म आ रही है. ‘टॉयलेट - एक प्रेम कथा’. इसमें गांवों में टॉयलेट की कमी की समस्या को उठाया गया है. और ये समस्या वाकई गंभीर है. उधर भारत सरकार का स्वच्छ भारत अभियान ज़ोरों पर है. हर गली, नुक्कड़, चौराहे पर आपको ऐसे बोर्ड मिल जाएंगे जो अपने गांव-शहर को स्वच्छ रखने की अपील करते हो. ऐसे में डीएम साहब की ये बदज़ुबानी इस कैम्पेन के लिए कितनी सहायक है ये तो वो ही जानते होंगे. हो सकता है कंवल तनुज की नीयत किसी का अपमान करने की नहीं, बल्कि प्रेरित करने की हो. लेकिन उसके लिए आपके शब्दों का चयन भी सावधानी से किया जाना चाहिए. वरना सब गुडगोबर हो जाता है.
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