श्रीलंका में 'दित्वाह' से भारी तबाही, 80 लोगों की मौत, भारत ने शुरू किया 'ऑपरेशन सागर बंधु'
Sri Lanka में दित्वाह चक्रवाती तूफान (Cyclone Ditwah) ने 80 लोगों की जान ले ली. भारी बारिश से पड़ोसी देश में आई भारी तबाही के बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है. Operation Sagar Bandhu के तहत श्रीलंका में राहत सामग्री भेजी गई है.
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श्रीलंका में दित्वाह चक्रवाती तूफान (Cyclone Ditwah) ने तबाही मचा रखी है. अभी तक कम से कम 80 लोगों की जान जाने की खबर है. भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से बुनियादी ढांचे तहस-नहस हो गए हैं. कई इलाकों में लोगों के घरों में पानी भरा हुआ है. आंधी-पानी के कारण तूफान प्रभावित क्षेत्रों में बिजली गुल हो गई है. 2 लाख से ज्यादा लोग तूफानी चक्रवात से प्रभावित बताए जा रहे हैं. मरने वालों की संख्या और बढ़ने के आसार हैं. 30 से ज्यादा लोग तूफान के बाद से लापता हैं. विपदा की ऐसी घड़ी में अपने ‘सागर-बंधु’ के लिए पड़ोसी भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है (India Operation Sagar Bandhu in Sri Lanka).
भारत ने शुक्रवार, 28 नवंबर को श्रीलंका में तूफान प्रभावितों की मदद के लिए 'ऑपरेशन सागर बंधु' शुरू किया है, जिसके तहत भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) और फ्रंटलाइन शिप आईएनएस उदयगिरि (INS Udaigiri) से श्रीलंका में राहत सामग्री पहुंचाई गई है. भारतीय वायुसेना का सी-130J एयरक्राफ्ट (C130J aircraft) खाना और सेनेट्री जैसी इमरजेंसी सप्लाई लेकर शुक्रवार, 28 नवंबर को दोपहर 1.30 बजे कोलंबो के भंडारनायके इंटरनेशनस एयरपोर्ट पर उतरा.

यहां एयरपोर्ट पर इंडियन हाई कमीशन के अधिकारी और श्रीलंका के वायुसेना के अधिकारी मौजूद थे. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर इसके बारे में जानकारी दी. उन्होंने लिखा,
ऑपरेशन सागर बंधु शुरू हुआ.भारतीय वायुसेना का C-130 J एयरक्राफ्ट लगभग 12 टन मानवीय सहायता लेकर कोलंबो पहुंचा, जिसमें टेंट, तिरपाल, कंबल, स्वच्छता किट और खाने-पीने की चीजें शामिल थीं.
एक और पोस्ट में जयशंकर ने बताया कि इंडियन एयरफोर्स का IL-76 विमान कोलंबो में उतरा है. इस विमान के साथ 9 टन राहत सामग्री, 2 अर्बन सर्च एंड रेस्क्यू टीमें, NDRF के 80 कर्मचारी कोलंबो पहुंचे हैं. उन्होंने आगे कहा कि अब तक हवा और समुद्र के रास्ते लगभग 27 टन राहत सामग्री श्रीलंका भेजी जा चुकी है. और ज्यादा मदद रास्ते में है.
श्रीलंका में तूफानी चक्रवात दित्वाह ने देश के पश्चिमी हिस्से में तबाही मचा रखी है. श्रीलंकाई अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी प्रांत में शुक्रवार रात से ‘अभूतपूर्व’ आपदा जैसी स्थिति बन सकती है, क्योंकि केलेनी और अटानागालू नदियों का पानी खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है. डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) के मुताबिक, शनिवार, 29 नवंबर की सुबह 6 बजे तक देश भर में 69 मौतें पुष्टि हो चुकी थी और कम से कम 34 लोग लापता थे. इस तूफान से अब तक करीब 61 हजार परिवारों के 2 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं.
मध्य प्रांत के कैंडी में राहत कार्य संभाल रहे अधिकारियों ने कहा कि मौत का आंकड़ा और ज्यादा हो सकता है. उनके मुताबिक, कैंडी जिले में ही शुक्रवार (28 नवंबर) देर रात तक मौतों की संख्या 50 से ऊपर पहुच गई थी. हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

केंद्रीय पहाड़ी इलाके में स्थित बदुल्ला भी भूस्खलन से बुरी तरह तबाह हो गया है. यहां कई लोग लापता हैं और 35 से ज्यादा मौतों की पुष्टि हो चुकी है. शुक्रवार सुबह से लगभग 35 फीसदी इलाकों में बिजली नहीं है, जिससे सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के करीब 70 लाख ग्राहक प्रभावित हैं. बिजली बहाल करने और अन्य मरम्मत के काम लगातार बारिश और बाढ़ की वजह से मुश्किल हो रहे हैं.
हालात बिगड़ते देख श्रीलंकाई सरकार ने शुक्रवार को सभी सरकारी दफ्तरों और स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया है.
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