यूपी के हापुड़ में एक लड़के ने अपने दोस्त के साथ मिल कर अपनी बहन के प्रेमी को मारडाला. उसके बाद उसकी लाश को सीमेंट के खंबे से बांध तालाब में फेंक दिया. लड़की काप्रेमी 12वीं क्लास का स्टूडेंट था. उम्र थी 20 साल. अचानक एक दिन गायब हो गया. जबघरवालों को वो खोजने पर नहीं मिला, उन्होंने पुलिस में शिकायत लिखवाई. उन्हें डर थाकि उनका बेटा कहीं मर तो नहीं गया. जांच हुई. डर सच निकला. पता चला कि लड़के को उसकेपड़ोसी ने मारा था. क्योंकि पड़ोसी की बहन के साथ मरने वाले लड़के का अफेयर था. बचपनमें एक गाना सुना करते थे. 'मुक़ाबला-मुक़ाबला'. उसकी कुछ पंक्तियां याद आईं जो पिकेमिश्रा ने लिखी थीं. बंदूर को तान कर गोली चलाने से प्यार कभी मरता है क्या मछलीपकड़ने का जाल बिछाने से अंबर के तारे फंसते क्या आप ये खबर पढ़ कर शायद बुरा महसूसकरें. मरने वाले के लिए. उसके मां-बाप के लिए. उस लड़की के लिए जो लड़के से प्यारकरती थी. लेकिन जब बीते दिनों आपने डॉक्टर पंकज नारंग के पीट-पीट कर मारे जाने कीखबर सुनी थी, तो आपने बुरा महसूस करने के बजाय उसमें हिंदू और मुसलमान को खोजनाशुरू कर दिया था. कुछ बड़े काबिल लोगों ने लिखा दिल्ली के एक हिंदू डॉक्टर कोमुसलामानों के एक ग्रुप ने पीट-पीट कर मार डाला. जैसे अखलाक को हिंदुओं ने पीट-पीटकर मार डाला था. अब हम खबर पर वापस आते हैं और आपको नाम बताते हैं. मरने वाले कानाम था मुनीफ. जिसने उसे मारा उसका नाम था नदीम. नदीम ने मुनीफ का खून अपने दोस्तअंकित के साथ किया था. मतलब एक मुसलमान ने एक हिंदू के साथ मिल कर, एक मुसलमान कोमारा. इस खबर को सोशल मीडिया पर लगाते वक़्त आप क्या एंगल देंगे? यही प्रेमी अगरहिंदू होता. और उसको मारने वाले दोनों लोग मुसलमान होते. तो बड़ी आसानी से आपने कहदिया होता कि कत्ल धर्म के लिए किया गया है. है न? हमारे देश के सारे बड़े धार्मिकदंगे ऐसे ही तो शुरू होते हैं. खबर में जो सच है वो ये है कि लड़की अगर पड़ोसी सेइश्क करे, तो उसका भाई सहन नहीं करेगा. लड़की के फैसले उसका भाई लेगा. और जरूरत पड़नेपर उसके प्रेमी का खून भी करेगा. सच है इश्क करने की छूट न होना. और अपनी 'मर्यादा'के लिए किसी को बेरहमी से मार डालना. लेकिन आप मरने और मारने वालों के नाम सुनते हीउसमें धर्म खोजने लगेंगे. तो क्या आप इस कत्ल को 'सेकुलर मर्डर' कहेंगे?