'डिअर मोदी जी, हमें दिव्यांग मत कहो'
विकलांगों की संस्थाओं ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी. कहा, ये शब्द हमारे लिए 'इन्सल्टिंग' है.
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विकलांगों के लिए काम करने वाली कुछ संस्थाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर विकलांगों के लिए 'दिव्यांग' शब्द का इस्तेमाल न करने की बात कही है. इन संस्थाओं के मुताबिक 'दिव्यांग' शब्द उनके लिए 'इन्सल्टिंग' है.
आभा खेतरपाल नाम की औरत ने ये खत लिखा. आभा को बीते दिनों विमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट मिनिस्ट्री ने देश की टॉप 100 महिलाओं में सेलेक्ट किया था. दूसरों ने आभा का साथ दिया. आभा का कहना है कि 'दिव्यांग' का मतलब होता है दिव्य यानी ऐसी शक्तियों वाला जो नैचुरल न हों. वो कहती हैं कि अगर हम विकलांगों को बाकी सबकी तरह नॉर्मल मानते हैं तो उनको 'दिव्य' कहना गलत होगा. क्योंकि विकलांगों के पास कोई सुपरनैचुरल शक्तियां नहीं होतीं.
आभा ने कहा, 'हालांकि प्रधानमंत्री की नीयत अच्छी थी. लेकिन 'दिव्यांग' शब्द सुनकर लगता है कि विकलांगों की दया या करुणा की फीलिंग से देखा जा रहा है. जैसे विकलांगों में टैलेंट पाया जाना कोई खास बात हो. इसलिए अच्छी नीयत होते हुए भी शब्द के बुरे मतलब निकल सकते हैं.'
विकलांग संगठनों ने सरकार से मांग की थी कि देश के 5 विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के नामों से 'हैंडीकैप्ड' शब्द हटा दिया जाए. जिसे पूरा करने में सरकार नाकाम रही है.

