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पड़ताल: क्या राहुल गांधी ने 20 सूटकेस लेकर नीरव मोदी की बैंक लिमिट बढ़वाई थी?

सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि 16 मई को कौन राहुल गांधी के घर सूटकेस लेकर पहुंचा था.

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14 जून 2018 (अपडेटेड: 15 जून 2018, 05:58 AM IST)
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वॉट्सऐप पर शेयर हो रहा है ये मेसेज
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भाई साब वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट रिसर्च में इतना फरवट हो गए हैं कि क्या बताएं. मतलब अगर धरती पर चित्रगुप्त की नज़र से भी कुछ बच गया है, तो ये उसे भी खोज निकालेंगे. अब देखिए न, 16 मई 2014 को राहुल गांधी क्या कर रहे थे, इसकी ऐसी बारीक जानकारी निकाली है कि खुद राहुल को अपने टैलेंट पर शक हो जाए.

फेसबुक और वॉट्सऐप पर पिछले कई दिनों से एक वीडियो के साथ मेसेज शेयर हो रहा है कि जिस दिन 2014 लोकसभा चुनाव के नतीजे आ रहे थे, उस दिन राहुल गांधी नई बनने वाली सरकार की फील्डिंग सेट कर रहे थे.

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मेसेज के मुताबिक 16 मई को नीरव मोदी एक सूटकेस लेकर राहुल गांधी के घर आए, जिसके बाद उन्हें बैंक लिमिट में छूट दी गई. इस रियायत में पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम और RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की भी भूमिका थी.

आप पहले ये मेसेज पढ़िए:

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इस मेसेज के साथ CNN-News18 के एक बुलेटिन का वीडियो भी शेयर किया जा रहा है. करीब सवा मिनट के इस वीडियो में एंकर 2016 में आई CAG की रिपोर्ट के आधार पर पिछली सरकार के फैसलों पर सवाल उठा रही हैं. देखिए ये वीडियो:


Posted by Vishal
on Thursday, June 14, 2018
राहुल गांधी कौन हैं? वो नेता, जिन्हें बीजेपी अपना मुख्य विपक्षी मानती है. नीरव मोदी कौन हैं? हीरों के वो व्यापारी, जो हज़ारों करोड़ का कर्ज लेकर विदेश भाग गए और केंद्र सरकार की साख पर कालिख पोत गए. रघुराम राजन कौन हैं? देश की अर्थव्यवस्था को काफी वक्त तक संभाले रखने वाले शख्स, जो बीजेपी नेताओं को कभी रास नहीं आए.

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इस मेसेज का दावा है कि इन सबने मिली-भगत करके भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मुश्किलें खड़ी कीं. मेसेज का आखिरी हिस्सा इशारा करता है कि पिछले कुछ महीनों में सामने आए बैंक-फ्रॉड के लिए नरेंद्र मोदी को नहीं, बल्कि उनसे पिछली सरकार को दोषी ठहराना चाहिए. ढेर सारे लोग पिछले कई महीनों से लगातार ये मेसेज और वीडियो शेयर कर रहे हैं.

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पर क्या है इस मेसेज और वीडियो की सच्चाई?

इस मेसेज की सच्चाई और वीडियो के साथ इसका कनेक्शन जानने के लिए हम बिजनेस मैग्ज़ीन 'बिजनेस टुडे' के एडिटर राजीव दुबे के पास गए. उन्होंने इसके एक-एक रेशे को साफ कर दिया. आप भी जानिए.

#1. 80:20 स्कीम क्या है, जिसकी वीडियो में बात हो रही है?

ये स्कीम अगस्त 2013 में पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने सोने का आयात कम करने के लिए लॉन्च की थी. इसके तहत सभी व्यापारियों और कंपनियों को आयात किए हुए कुल सोने का 80% भारतीय मार्केट में बेचना था, जबकि 20% निर्यात कर देना था. जब तक पिछले कन्साइन्मेंट का 20% निर्यात नहीं किया जाता, तब तक नया माल नहीं मंगाया जा सकता था.

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#2. क्यों लाई गई थी ये स्कीम

राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) को कम करने के मकसद से. उस समय सरकार घाटे से जूझ रही थी. जो कंपनियां विदेश से सोना खरीदती हैं, उन्हें सौदा डॉलर में करना पड़ता है, जबकि भुगतान रुपए में. चूंकि रुपया डॉलर के मुकाबले कमज़ोर है, इसलिए भारत घाटे में रहता. ऐसे में अगर कंपनियां 20% सोना निर्यात करतीं, तो इससे रुपए में खरीदा गया सोना बेचने पर डॉलर वापस मिलता, तो घाटे पर कुछ मरहम लगता.


पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम, जिन्होंने 80:20 स्कीम लॉन्च की थी.
पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम, जिन्होंने 80:20 स्कीम लॉन्च की थी.

#3. मई 2014 में इस स्कीम के साथ क्या किया गया

मई 2014 में ट्रेड बॉडी, डीलर्स और डीलर बैंकों ने वित्त मंत्रालय से रियायत की गुजारिश की. तो मंत्रालय के निर्देश पर RBI ने आभूषण निर्यात को लेकर स्कीम के नियम कुछ ढीले कर दिए. इससे कुछ प्राइवेट फर्म्स को सोना आयात करने का मौका मिल गया. अप्रैल से सितंबर 2014 के बीच भारत में जितना सोना आयात किया गया, उसका 40% इन्हीं प्राइवेट फर्म्स ने आयात किया. जबकि इससे पहले स्कीम के तहत सिर्फ राज्यों की मिल्कियत वाली संस्थाओं को सोना आयात करने की इजाज़त थी. इस फैसले में गलती ये थी कि सबके बजाय कुछ लोगों को छूट दी जा रही थी. इससे बड़े प्लेयर्स को फायदा हुआ, जो कुल मार्केट में 50% के हिस्सेदार थे.


RBI
RBI

#4. नई सरकार ने इस स्कीम का क्या किया

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA सरकार बनने के 6 महीने के भीतर नवंबर 2014 में 80:20 स्कीम खत्म कर दी गई. इससे अगस्त 2013 से सोने के आयात-निर्यात पर जितनी शर्तें लगाई गई थीं, वो खत्म हो गईं.


प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते समय नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते समय नरेंद्र मोदी

#5. फिर CAG की रिपोर्ट में क्या आया

2016 में आई CAG की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि 80:20 स्कीम की वजह से केंद्र सरकार को एक लाख करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा हुआ. कुछ सूत्रों के मुताबिक इस स्कीम से सोने की स्मगलिंग को बढ़ावा मिला और कुछ व्यापारियों ने इसका गलत इस्तेमाल भी किया.


CAG
CAG

#6. तो वायरल वीडियो क्या साबित करता है?

वायरल मेसेज के संदर्भ में ये वीडियो कुछ साबित नहीं करता है. ये CAG रिपोर्ट आने के बाद का वीडियो है, जिसमें स्कीम की खामियों और इससे सरकार को हुए नुकसान गिनाए जा रहे हैं. न तो CAG की रिपोर्ट किसी से छिपी हुई थी और न इससे संबंधित खबरें. जो भी था, पब्लिक फोरम में था, सब लोगों के सामने था.

#7. वायरल मेसेज की सच्चाई क्या है?

मेसेज का दावा है कि 16 मई 2014 को राहुल गांधी ने व्यापारियों से सूटकेस लिए, फिर 21 मई को चिदंबरम के निर्देश पर RBI ने नीरव मोदी समेत 20 उद्योगपतियों की बैंक लिमिट बढ़ा दी. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है. न ही मीडिया रिपोर्ट्स और न ही किसी एजेंसी के खुलासे में ऐसी किसी घटना का ज़िक्र है. बिजनेस टुडे के एडिटर राजीव दुबे भी ऐसी किसी घटना के ज़िक्र से इनकार करते हैं.


नीरव मोदी
नीरव मोदी

जहां तक RBI के बैंक लिमिट बढ़ाने की बात है, तो बैंक लिमिट से आशय किसी व्यापारी को बैंक से मिलने वाली लोन की रकम से होता है. लोन पर कोई कैप न होने से ही विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे व्यापारियों को हज़ारों करोड़ का कर्ज लेने की सहूलियत मिली. लेकिन मई 2014 में RBI की तरफ से उद्योगपतियों की बैंक लिमिट बढ़ाने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ था.

#8. वायरल मेसेज और वीडियो का आपस में कोई कनेक्शन है?

कोई नहीं है. मेसेज में सूटकेस लेकर बैंक लिमिट बढ़ाने की बात हो रही है, जबकि वीडियो में 80:20 स्कीम और CAG की रिपोर्ट के बारे में बात की जा रही है. मेसेज में नीरव मोदी का नाम इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि वीडियो में मेहुल चोकसी और उसकी कंपनी 'गीतांजलि' की बात हो रही है.


मेहुल चोकसी
मेहुल चोकसी

पहली बात, इस मेसेज और वीडियो का आपस में कोई ताल्लुक नहीं है. दूसरी बात, ये मेसेज फर्जी है. अगर आपको भी वॉट्सऐप पर कोई ये मेसेज इस वीडियो के साथ भेजता है, तो आप उसे हमारी इस 'पड़ताल' का लिंक भेजिए, ताकि कोई और गुमराह न हो.

इसके अलावा अगर आपको सोशल मीडिया पर कोई संदिग्ध कॉन्टेंट वायरल होता दिखता है, तो आप हमें lallantopmail@gmail.com पर भेज सकते हैं. हम उसकी सच्चाई आप तक पहुंचाएंगे.




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