1983 में पीएम मोदी की डिग्री पर दस्तख़त करने वाइस चांसलर का 'निधन' 1981 में ही हो गया था?
पहले डिग्री के फॉन्ट पर सवाल उठा, अब दावा हो रहा है कि दस्तखत करने से पहले ही कुलपति इस दुनिया से चले गए थे.

प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री. इस विषय में लोगों की दिलचस्पी घटने का नाम नहीं ले रही है. कभी फॉन्ट तो कभी तारीख, रोज़ नया दावा आता है. यही काम 5 अप्रैल को भी हुआ. सोशल मीडिया पर ये दावा हुआ कि प्रधानमंत्री की डिग्री पर जिस कुलपति ने 1983 में दस्तखत किए, उनका तो 1981 में ही देहांत हो गया था.
ट्विटर पर ब्लूटिक धारी यूज़र अशोक शेखावत ने लिखा,
शेखावत की ही तरह अनिल पटेल नाम के ब्लूटिक धारी यूज़र (जो कि बायो के मुताबिक कांग्रेस सपोर्टर सोशल एक्टिविस्ट हैं) ने भी दो तस्वीरें ट्वीट कीं. एक तरफ प्रधानमंत्री की डिग्री. और दूसरी तरफ एक तस्वीर जिसके नीचे लिखा है - प्रोफेसर के. एस. शास्त्री, कुलपति (22 अगस्त, 1980 से 13 जुलाई, 1981). साथ में प्रधानमंत्री मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को टैग करते हुए लिखा है,
पड़ताल'दी लल्लनटॉप' ने जब वायरल दावे की पड़ताल की तो वायरल दावा गलत निकला. कैसे? वो ऐसे कि देखने में भले लगे कि प्रोफेसर शास्त्री का जीवन महज़ 11 महीने का था, लेकिन वास्तव में ऐसा था नहीं.
पोस्ट में प्रोफेसर केएस शास्त्री की जो फोटो लगी है, वो उठाई गई है वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी (VNSGU) की वेबसाइट से. प्रोफेसर केएस शास्त्री 22-08-1980 से 13-07-1981 तक इस यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर थे. तो तस्वीर के नीचे उनके जन्म और मृत्यु की तिथि नहीं, कार्यकाल की अवधि लिखी है.
1981 में ही प्रोफेसर शास्त्री गुजरात यूनिवर्सिटी के कुलपति बने. और 1987 तक इसी पद पर रहे. गुजरात यूनिवर्सिटी के कुलपतियों की सूची में प्रो. शास्त्री का नाम देखा भी जा सकता है.
मई 2016 में बतौर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रधानमंत्री की जो पीजी की डिग्री दिखाई थी, उसमें साल अंकित है 1983. और इस साल प्रो. शास्त्री ही गुजरात यूनिवर्सिटी के कुलपति थे.
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