देश में दो चीज़ों का शोर है. क्रिकेट और आज़ादी. क्रिकेट का क्या है? अभी खतम होजायेगा. आज़ादी की गूँज रहेगी. आज़ादी अचानक से ही डिमांड में आ गयी. कर्ट्सीकन्हैया, उमर ख़ालिद, वकील्स, मंत्रीज़, साध्वीज़, योगीज़ ऐंड खेर्स! एक और है जो आज़ादीको दूर तक पहुंचा रहा है - टीवी. टीवी वो भी केबिल वाली. काहे से दूरदर्शन पे सबकुछ एक्स्ट्रा-स्वीट चल रहा होता है. तो अब हुआ ये कि जहाँ केबिल टीवी नहीं है,वहां लोह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर ये कौन सी आज़ादी है जो मांगी जा रही है? येवीडियो उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. उन सभी लोगों को ये समझाया जाएगाकि आखिर असल मुद्दा है क्या और किस बात से आज़ादी चाहिए इन सभी लोगों को. अब कहोगेकि जहां केबिल नहीं पहुंच रहा है वहां फेसबुक और यूट्यूब कैसे पहुंचेगा? तो भइय्या,मेरे रंगीले रतन, नूरे नज़र इतना सीरियसली काहे लेते हो हमारी बात को. इस वीडियो कोभी न लेना. क्यूंकि हम बनाते वक़्त भी सीरियस नहीं थे. वीडियो देखो यार:https://www.youtube.com/watch?v=c5QdCpR9WHc&feature=youtu.be