धनबाद अग्निकांड: शादी में सबसे पूछती रही दुल्हन- 'मां कहां है', किसी ने कुछ नहीं बताया
मां और दादी समेत अन्य रिश्तेदारों की भी हुई मौत.

धनबाद के आशीर्वाद अग्निकांड के बाद झकझोर देने वाली कहानियां सामने आ रही हैं (Dhanbad Wedding Fire Update). मंगलवार, 31 जनवरी को जिस आशीर्वाद टावर में आग लगी उसमें रहने वाली स्वाति की उसी रात शादी होनी थी. इसके लिए वो होटल भी पहुंच गई थीं. लेकिन शादी से पहले उनके घर की इमारत में आग लग गई जिसमें स्वाति की मां समेत दूसरे करीबी रिश्तेदारों की मौत हो गई. स्वाति को इस बारे में कुछ नहीं बताया गया. पूरी शादी के दौरान उनकी आंखें अपनी मां को ढूंढती रहीं. उन्हें पता ही नहीं था कि उनकी मां की मौत हो चुकी थी.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में मारे गए लोगों में स्वाति की मां के अलावा दादी और मौसी भी शामिल हैं. 31 जनवरी की शाम को पास के सिद्धि विनायक होटल में स्वाति की शादी होनी थी. शाम पांच बजे दुल्हन और परिवार के ज्यादातर पुरुष होटल पहुंच गए. कुछ घंटों में बारात भी आ गई. दूसरी तरफ घर में महिलाएं शादी के लिए तैयार होकर निकल ही रही थीं कि अचानक बिल्डिंग में आग लग गई. इतनी भयानक आग कि 14 लोग जिंदा जलकर मर गए.
दूसरी तरफ होटल में मौजूद लोगों को इसकी खबर मिली तो उनके बीच मातम पसर गया. लेकिन परिवार की बेटी की शादी ना रुके इसलिए किसी ने स्वाति को मां और रिश्तेदारों की मौत के बारे में बताया ही नहीं. रिपोर्ट के मुताबिक फेरे लेते वक्त स्वाति को भनक तक नहीं थी कि वो अपनी मां, दादी और दूसरे रिश्तेदारों को खो चुकी हैं. शाम को पास के सिद्धि विनायक होटल में जिस समय शादी की रस्में चल रही थीं तब स्वाति हर किसी से पूछती रहीं, ‘मां-दादी कहां है’. रस्में पूरी होने के बाद दुल्हन को पता चला कि क्यों उसकी मां-दादी और बाकी कुछ रिश्तेदार शादी में नहीं आए.
कैसे लगी आग?धनबाद के डिप्टी कमिश्नर संदीप कुमार ने आशंका जताते हुए कहा कि आशीर्वाद अपार्टमेंट में चल रही किसी पूजा के दौरान चिंगारी से आग लगी हो. आग लगने से पूरी बिल्डिंग में अफरा-तफरी मच गई थी. सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दर्जन भर से ज्यादा गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंची गईं. लेकिन आग पर काबू पाने में असफल साबित होती दिखीं.
उधर अपार्टमेंट में फंसे दर्जनों लोगों के बीच चीख पुकार मची हुई थी. बचाव दल ने कई लोगों को बाहर निकाल कर बचा लिया. उन्हें अलग अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया. हालांति तमाम प्रयासों के बावजूद 14 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी. मरने वालों में 10 महिलाएं और 3 बच्चे शामिल हैं.
घटना को लेकर झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने घटना पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि वो खुद पूरे मामले को देख रहे हैं. वहीं कांग्रेस विधायक नीरज पूर्णिमा सिंह ने आजतक को बताया,
घटना बेहद दुखद है. मौत का का कारण नगर निगम है जो फायर सेफ्टी का कोई इंतजाम नहीं करता. 14-15 मंजिला बिल्डिंग का नक्शा यूं ही पास कर दिया जाता है. हादसे की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए.
नीरज पूर्णिमा ने कहा कि इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा की जाएगी.
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