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डेटॉल और डाबर साबुन की टिकिया पर क्यों लड़ बैठे?

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामला सुलटाते हुए क्या कहा?

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दिल्ली हाईकोर्ट ने डेटॉल और डाबर के साबुन में अंतर बताया. फोटो: India Today
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निशांत
10 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 10 दिसंबर 2020, 11:19 AM IST)
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डेटॉल साबुन. टीवी ऐड में इसे कीटाणुओं से 'लड़ते' हुए और उनका 'सफाया' करते हुए दिखाया जाता है. फिलहाल डेटॉल बनाने वाली कंपनी कीटाणुओं से नहीं मशहूर कंपनी 'डाबर' से लड़ रही है. कोर्ट में.
डेटॉल साबुन बनाने वाली कंपनी का नाम रेकिट बेनकाइजर (Reckitt Benckiser) है. इसने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका डाली. आरोप लगाया कि डाबर ने अपने 'सैनिटाइज़' नाम के साबुन में डेटॉल की डिज़ाइन चोरी की है. 'सैनिटाइज़' साबुन के शेप, हरे रंग की पैकेजिंग और टैगलाइन 'be 100 percent sure' के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई और इस पर रोक लगाने की मांग हुई.
इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने डेटॉल को झटका देते हुए कहा कि 'सैनिटाइज़' और 'डेटॉल' साबुन में कन्फ्यूज़न नहीं हो सकता. हालांकि कोर्ट ने डाबर को 'सैनिटाइज़' साबुन की बिक्री का लेखा-जोखा रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने दोनों साबुन के बीच का अंतर भी बताया. जस्टिस राजीव शकधर की सिंगल जज बेंच ने ये अंतरिम फैसला दिया है.
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डेटॉल साबुन.

डेटॉल और डाबर की दलील 
डेटॉल बनाने वाली रेकिट बेनकाइजर ने कहा कि डाबर ने द डिज़ाइन ऐक्ट, 2000 की धारा 22 का उल्लंघन किया है. डाबर ने इसका खंडन करते हुए दलील दी कि साबुन का शेप और उसकी बाकी बनावट सार्वजनिक डिज़ाइन पर आधारित है. डाबर ने कहा कि बिजनेस में सामान्य साबुन के रंग और जनरिक टैगलाइन को याचिकाकर्ता का सांपत्तिक अधिकार (Proprietary Rights) नहीं बनाया जा सकता.
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गोलाकार कॉर्नर और दोनों तरफ से दबे साबुन की डिज़ाइन यूनिलिवर ने 1989 और 1995 में पब्लिश की थी. यही डिज़ाइन डेटॉल साबुन की है. इस आधार पर डाबर का दावा मजबूत हुआ कि डेटॉल का 'डिज़ाइन रजिस्ट्रेशन' सही नहीं है.
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डाबर सैनिटाइज़ साबुन.

'टैगलाइन रजिस्टर्ड नहीं'
टैगलाइन विवाद पर कोर्ट ने कहा कि ये बिजनेस की 'वर्तमान भाषा' की लाइन पर पारंपरिक लगती है. साथ ही कोर्ट ने जोड़ा कि डेटॉल की न तो टैगलाइन और न ही दूसरे फीचर्स ट्रेडमार्क अथॉरिटी में रजिस्टर किए गए. कोर्ट ने कहा कि डेटॉल ने कोई ऐसा सर्वे भी सामने नहीं रखा है, जिससे कम से कम प्रथमदृष्टया लगे कि उनकी टैगलाइन और फीचर अलग हैं.
कोर्ट ने दोनों साबुनों में अंतर बताते हुए कहा,
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कोर्ट ने ये भी कहा कि बाज़ार में कई साबुन हैं, जिनके रंग, शेप और गंध मिलते-जुलते हैं.

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