रंगा और बिल्ला के बीच लड़ाई हो गई. दोनों काम तो एक ही करते थे, पर दोनों मेंकंपटीशन था. एक का फायदा दूसरे का घाटा होता था. एक दिन रंगा ने बिल्ला को मार्केटसे हटा दिया. लोग भी त्रस्त हो गये थे दोनों के झगड़ों से. बिल्ला को किसी नेसपोर्ट नहीं किया. कहा कि एक बार में एक को ही झेलेंगे. अब काम चलने लगा. पर बिल्लेसे रहा नहीं जा रहा था. एक दिन बिल्ला मार्केट में भागा-भागा जा रहा था. चिल्लातेहुए. कह रहा था कि रंगा के घर में ही हत्या हो गई है. अब वो जायेगा जेल. अब इसमार्केट में मेरा दबदबा होगा. मैं कहता तो था कि रंगा के दिन अब लदने वाले हैं. लोगभौंचक्के हो गये. रंगा के घर गये लोग तो पता चला कि एक चींटी मरी है रंगा के घर.वही हाल अभी राजनीति का हुआ है. नरेंद्र मोदी की सरकार को जनता ने वोट किया. बहुमतदिया. ढाई साल हो गये. विपक्ष मुद्दे खोज रहा है. अगले ढाई साल के लिये. मुद्दे मिलभी रहे हैं. पर इस चक्कर में कई फालतू बातें भी हो जा रही हैं. नवी मुंबई में APMCके चुनाव हुये. एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग कमिटी यानी कृषि कमिटी. मंडी. 17सीटें थी. भाजपा सारी सीटें हार गईं. PWP (पेजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी) ने 15सीटें जीतीं. शिवसेना और कांग्रेस को एक-एक सीटें मिलीं. कांग्रेस को 25 साल बाद इसचुनाव में पहली बार कोई सीट मिली. अब विपक्षी पार्टियों ने कहना शुरू किया है किमोदी के नोट बैन के फैसले से भाजपा की लोकप्रियता डूब रही है. सांस भी ना लेनेपाएगी. बुरी तरह हार रही है चुनाव. ये बिल्कुल ठीक है कि भाजपा मंडी के चुनाव हारगई. पर ये लोकल चीजें होती हैं. इसमें मुद्दे अलग होते हैं. इतने अलग कि महाराष्ट्रमें भाजपा और शिवसेना दोनों साथ हैं पर मंडी के चुनाव में विपक्ष में. अगर इनचुनावों के आधार पर लोकप्रियता तय होने लगे तब तो PWP देश की सबसे लोकप्रिय पार्टीहोगी. 2019 का चुनाव जीतने की प्रबल संभावना होगी. पर ऐसा तो है नहीं. नोट बैन केफैसले का प्रभाव आने में अभी वक्त लगेगा. अभी किसी को ये नहीं पता है कि इसका क्याप्रभाव पड़ा है. जनता में तो अभी तक पॉजीटिव सेंटीमेंट है. दिक्कतों के बावजूद.वक्त ही बतायेगा कि भाजपा की लोकप्रियता में कितनी कमी/बढ़ोत्तरी हुई है. अभी अगरचाहें तो सरकार के ढाई साल के फैसलों पर ही डाटा समेत सवाल खड़े किये जा सकते हैं.रुके हुए बिल को लेकर बातें की जा सकती हैं. नोट बैन पर समाधान निकाला जा सकता है.जिस हिसाब से रोज संसद स्थगित हो रही है, लग रहा है कि सारी ही पार्टियों कीलोकप्रियता घट रही है. अगर जनता से सवाल पूछा जाये तो लोग किसी एलियन को सत्ता सौंपदें.--------------------------------------------------------------------------------जानिए, नोट बैन करके मोदी ने कितना काला धन कम कर दिया!सरकार खूब सारे नोट छपवा के गरीबों में बांट क्यों नहीं देती?