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नोटबंदी ने अटकाई भगवान की शादी

शादी का कार्ड है, वर वधू का नाम है, लेकिन एक बड़ा पेंच फंस गया है.

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आशुतोष चचा
28 नवंबर 2016 (Updated: 28 नवंबर 2016, 11:00 AM IST)
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इंसान तो क्या भगवान की हालत भी पतली है नोट बैन होने के बाद. बैंक से रकम नहीं निकल रही. भगवान की शादी खटाई में पड़ गई है. ये तब है जब सरकार ने शादी वाले घरों को अलग से कुछ सुविधाएं दी हैं. वो ढाई लाख रुपए तक निकलवा सकते हैं. रतलाम के नामली में कुमावत सोसाइटी तुलसी और चारभुजानाथ की शादी का आयोजन करती है हर साल. इस साल 1 दिसंबर की तारीख तय पाई गई है. लेकिन दिक्कत ये है कि बैंक से पैसा नहीं निकल रहा. खाता सोसाइटी की ओर से मंदसौर ग्रामीण बैंक में खुला हुआ है.
इस शादी के लिए वो ढाई लाख निकलवाना चाहते हैं. इसके लिए शादी का कार्ड भी छपा है. वर की जगह चारभुजानाथ और वधू की जगह तुलसी का नाम लिखा है. लेकिन बैंक की मांग है कि रकम वर या वधू के माता पिता को ही मिल सकती है. फंस गया है पेंच. सोसाइटी ये डिमांड कैसे पूरी करे?
सोसाइटी के मेंबर भेरूलाल बताते हैं कि कलेक्टर तक से गुहार लगाई जा चुकी है. लेकिन अभी कोई समाधान निकला नहीं है. सालों से चली आ रही परंपरा किनारे न लग जाए. पूरे शहर को भोज कराया जाता है इस दिन. सजावट वगैरह सब होती है. हर काम चेक से थोड़ी हो सकता है. बैंक के ब्रांच मैनेजर कह रहे हैं कि ऊपर से आदेश साफ साफ आए तो हम कुछ करें.
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