कैसा भी समय आए, किसी ना किसी के अच्छे दिन आते ही हैं. आपदाएं भी नए किस्म केव्यापार लेकर आती हैं. जंग के समय हथियार बनाने वालों की चांदी होती है. महामारी केसमय डॉक्टरों की. कहीं बड़ी दुर्घटना में बहुत सारे लोगों की मौत हो जाए तो आस-पासके श्मशान घाट वालों में पहले ही होड़ शुरू हो जाती है. ऐसे ही नोटबंदी से भी कुछलोगों के अच्छे दिन आए हैं. ऑनलाइन पेमेंट करवाने वाली वेबसाइट्स और ऐप्लीकेशन कीबात नहीं कर रहे. एक मशीन की बात कर रहे हैं, जिससे आपका वास्ता पहले भी पड़ता था.पर अब और ज्यादा पड़ेगा. वो मशीन होती है ना. जो मॉल में शॉपिंग करने जाओ तो दिखतीहै. जिसमें अपना डेबिट कार्ड सरकाओ, पिन नंबर डालो तो पेमेंट हो जाता है. ना कैशलगे, ना फिटकरी. पेंमेंट पूरा होय. नोटबंदी से छोटे कारोबार मंद पड़े हैं. कारोबारचलता रहे, इसके लिए बहुत सारे व्यापारी ऐसी कार्ड-स्वाइप मशीनें खरीद रहे हैं. इनमशीनों के जरिये कस्टमर अपना डेबिट, क्रेडिट या प्रीपेड कार्ड स्वाइप करके पेमेंटकर सकता है. सीधे अकाउंट से पैसा कट जाता है. कैश की जरूरत नहीं है. कम से कम इसीतरह दुकानदारी चले.इन मशीनों को कार्ड स्वाइप मशीनें या पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनें कहते हैं. शहरी औरअर्धशहरी इलाकों के कई इलाकों में इनकी डिमांड कई गुना बढ़ गई है. छोटे कारोबारी भीमंगवा रहे हैं ताकि तकनीकी तौर पर सक्षम कंपटीटर्स के आगे उनका बिजनेस ना बूड़ जाए.इंडियन एक्सप्रेस ने एक HDFC बैंककर्मी के हवाले से छापा है, 'पहले हमें महीने मेंऐसी 5 हजार मशीनों की रिक्वेस्ट मिलती थी. लेकिन कुछ दिनों से हर रोज 5 हजार मशीनोंकी डिमांड आ रही है.' एक्सिस बैंक के एक कर्मचारी ने अखबार को बताया कि उनके पासPOS मशीनों की तीन गुना डिमांड आ रही है. ICICI बैंक ने डिमांड में बढ़ोतरी केआंकड़े नहीं बताए, लेकिन ये जरूर कहा, 'पिछले कुछ दिनों में हमारे आउटलेट्स परपेमेंट वाली मशीनों की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ी है. रोज की डिमांड इससे पहले हफ्तेभर में आने वाली औसत डिमांड से भी ज्यादा है.'बैंक के प्रवक्ता ने बताया कि इस मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त लोगों को कामपर लगाया गया है. तीनों बैंकों ने बताया कि इन मशीनों की डिमांड नई कैटेगरी केव्यापारियों की तरफ से आ रही हैं, जिनमें ब्यूटी सैलन, छोटी किराना दुकानें औरसब्जी बेचने वाले भी शामिल हैं.सितंबर 2012 में भारत में 7.41 लाख POS मशीनें थीं. जबकि सितंबर 2016 तक इनकीसंख्या 14.96 लाख हो गई थी. बैंक वालों का कहना है कि इन मशीनों की संख्या अबमहानगरों के अलावा, दूसरी श्रेणी के शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है. POS मशीनोंकी संख्या में बढ़ोतरी बैंकिंग के जानकार मानते हैं कि POS मशीनों की मांग बढ़ने कोअर्थव्यवस्था के लिए अच्छा कहा जा सकता है. अगर ज्यादा से ज्यादा लोग कैश के बजाय,कार्ड से पेमेंट करने लगें तो यह आदत में शुमार हो सकता है. एक बैंकर ने कहा, 'पहलेज्यादातर व्यापारी खुद कार्ड से पेमेंट करने को पसंद नहीं करते थे. अब वे खुदमशीनों की मांग कर रहे हैं. इससे ई-ट्रांजेक्शन बढ़ेंगे जो कि अच्छी बात है.'--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें तीन दिन से घर नहीं गया था बैंक मैनेजर, हार्ट अटैक से मौत पुरानीनोटों से फैल रही नई बीमारियां, बैंककर्मी परेशान क्या प्रधानमंत्री का रोना लोगोंकी चीखों पर भारी पड़ गया है?