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14 लाख करोड़ हो गए रद्दी, छपे कुल डेढ़ लाख करोड़, अब तुम ही बताओ कैसे कम हो कतारें

बैंकों में भीड़ और एटीएम खाली होने की वजह सामने आ गई. इस रिपोर्ट ने किया खुलासा.

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पंडित असगर
27 नवंबर 2016 (Updated: 27 नवंबर 2016, 06:45 AM IST)
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दिल्ली के लोग तो शनिवार से परेशान हैं क्योंकि दो दिन की छुट्टी होने की वजह से पैसा नहीं मिल पा रहा है. और एटीएम खली हो गए हैं. कई एटीएम में पैसा है ही नहीं तो जहां पहुंच रहा था, वहां भी छुट्टी की वजह से खत्म हो लिया. अभी ये परेशानी बनी रहेगी. क्योंकि बैंकों में कतारें और एटीएम खाली होने की एक बड़ी वजह सामने आई है वो ये कि नोट छपे ही नहीं है. जब नोट छपे नही तो मियां आपको मिलेंगे कहां से.
सामने आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अबतक कुल डेढ़ लाख करोड़ रुपये के नए नोट छापे हैं. जबकि 500 और 1000 रुपये के रूप में देश के 14.18 लाख करोड़ रुपयों को रद्दी बना दिया गया है. और हां डेढ़ लाख करोड़ रुपये में भी ज्यादातर नोट 2000 रुपये वाली गुलाबी पत्ती वाले हैं. जिससे कुछ सामान लेने जाओ तो छुट्टे नहीं मिलते. यानी गुलाब की पंखुड़ी समझकर बस 2000 वाले नोट को लेकर इतराते फिरो कि मेरे पास पैसे हैं.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नोटों के बारे में ये जानकारी Credit Suisse research report में दी गई है. जो 25 नवंबर को सामने आई है. डेढ़ लाख करोड़ रुपये की नई करेंसी के अलावा 1.2 लाख करोड़ रुपये की करेंसी पहले से चलन में है.
आठ नवंबर को नोटबंदी का ऐलान हुआ. देश के पीएम ने दो जुमलों में 500 और हजार के नोट को रद्दी बना दिया. ताकि नकली नोटों और कालेधन से निपटा जा सके. लेकिन न तो नकली नोट बनना रुक पाए और न ही वो काला धन सामने आया जो चुनाव के वक्त देश की जनता के लिए लाने का वादा हुआ था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को अभी जल्दी में एक हजार से लेकर दो हजार करोड़ रुपये और छापने होंगे, ताकि ट्रांसेक्शन लेवल काफी हद तक पहले की स्थिति में आ सके. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी जानकारी दी थी कि बैंक और एटीएम के जरिए उसने 10 से 18 नवंबर के बीच 1.03 लाख करोड़ रुपये लोगों तक पहुंचा दिए हैं. 14.18 लाख करोड़ रुपये की पुरानी करेंसी में से 6 लाख करोड़ रुपये बैंकों में फिर से जमा हो गए हैं. रिपोर्ट ने पिछले एक हफ्ते के आंकड़ों पर कहा है कि आरबीआई एक दिन में 500 रुपये के तकरीबन 4 से 5 करोड़ नोट छाप रहा है. ऐसे में अगर देखा जाए तो जनवरी 2017 तक पुरानी करेंसी का सिर्फ 64 फीसदी हिस्सा ही चलन में आ पाएगा.

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