नोटबंदी से कहीं लाइनें लगीं. कहीं लोग मरे. कहीं पैसा नहीं मिला. कहीं काम धंधेबंद हो गए. एक के बाद एक दिल दुखाने वाली ख़बरें आईं. इतना बड़ा फैसला, मगर जिससे दिलको सुकून मिलता वो ख़बरें न के बराबर ही मिलीं. कहीं जाली नोट चले. कहीं फोटो कॉपी.और तो और इतनी हड़बड़ी में नोट छापे गए कि दो हजार के नोट से गांधी जी ही उठकर चलेगए. इतने आधे अधूरे नोट छपेंगे तो इसका फायदा जालसाज उठा लेंगे तो कोई हैरानी नहींहोगी. अब तक इतने तरह के नोट सामने आ चुके हैं कि लोगों को पहचानना वैसे ही मुश्किलहो जाए जाए कि कौन गंगाधर है और कौन शक्तिमान. 500 और 1000 के पुराने नोट आठ नवंबर 2016 को बंद कर दिए गए. 500 और 2000 रुपए कानया नोट मार्केट में लाया गया. नोटबंदी के फैसले से इकॉनमी से करीब 85 परसेंट कैशवापस ले लिया गया. मगर छपा उस स्पीड में नहीं. और जब आनन फानन में लोगों कीमुश्किलें दूर करने के लिए नोट छापा गया तो मिस प्रिंटिंग की ख़बरें सुर्खियां बननेलगीं. जी हां, बिना महात्मा गांधी की तस्वीर का नोट, वो भी असली. ये नोट मध्यप्रदेश के किसानों को मिले हैं. गुलाबी पत्ती यानी 2000 के ये नोट एसबीआई की ब्रांचने दिए हैं. जब किसानों को ये नोट मिले तो वो उन्हें नकली समझ बैठे, लेकिन बैंकवालों का कहना था कि ये नोट असली हैं. बस प्रिंटिंग सही नहीं हुई है. मध्य प्रदेशके श्योपुर जिले की बड़ोदा तहसील में ये गड़बड़ी सामने आई है. बिच्छुखेड़ी गांव केलक्ष्मण मीणा और काडूखेड़ी के रहने वाले गुरमीत सिंह बैंक से 8-8 हजार रुपयेनिकालने एसबीआई ब्रांच पहुंचे थे. दोनों किसानों को बैंक ने दो-दो हजार रुपये केचार-चार नोट दिए. इन्होंने 2000 रुपये के नोट नहीं देखे थे. उन्होंने कैशियर से येनोट ले लिए. जब दोनों बैंक से बाहर आए तो लोगों ने देखा तो नोट के ऊपर से महात्मागांधी ही गायब थे. बैंक के बाहर लोगों में तो शोर मच गया. वहां मौजूद लोगों नेनोटों की फोटो खींच ली. इसके बाद ये वापस बैंक के अंदर गए और बैंक अफसरों को इसबारे में बताया। पहले तो बैंक अफसरों ने अनाकानी की. बाद में बैंक ने उनके नोट वापसले लिए. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक में ब्रांच के मैनेजर के हवाले सेलिखा गया है, 'नोट फर्जी नहीं हैं. नोट पर तस्वीर की जगह खाली छोड़ी गई है. हमनेनोट वापस ले लिए हैं.' खबर ये भी है की बैंकों के पास ऐसे नोटों का पूरा बंडल है.जब बैंक वालों से बात की गई तो उन्होंने बताने से इंकार कर दिया कि ऐसे और कितनेनोट बैंक में हैं. जिस मकसद से नोटबंदी का फैसला लिया गया वो मकसद कामयाब होता नजरनहीं आया. पहला ये था कि जाली नोट बंद हो जाएंगे. ठीक है जो पहले से जाली नोट थे.बंद हो गए. लेकिन उसके बाद क्या. क्योंकि नए नोट तो लोगों ने जाली बाद में छापे,फोटोकॉपी ही चला दी. दूसरा था करप्शन पर रोक लगेगी. लेकिन आपने खुद नोटों के जखीरेपकडे जाने की ख़बरें पढ़ी होंगी ये तो वो थे जो पकड़े गए. और कितने जखीरे होंगे पतानहीं. रैलियों में दावे किये गए कि करीब 14 लाख करोड़ में 6 लाख करोड़ काला धन है, जोनोटबंदी के फैसले से सिस्टम से बाहर हो जाएगा. मगर ऐसा भी नहीं हुआ क्योंकि तकरीबनतकरीबन 14 लाख करोड़ रुपये बैंकों में जमा हो गए. यानी काला धन पर रोक लगाने में भीविफल हो गए. बस लोगों को परेशानियां ही बचीं. किसी को इलाज के कराने के लिए पैसेनहीं मिले तो किसी को शादी के लिए. हाँ वो लग बात थी कि मंत्रियों की प्यारीसंतानों की शादी में कोई दिक्कत नहीं आई. वही ठाठ. करोड़ो रुपये के खर्चे. वो जानेंया सिस्टम कि 4000 रूपये निकालने वाली पाबंदी होने के बावजूद उन्हें इतने पैसे कहांसे मिल गए. जो कतारों में लोग खड़े रहे और उन्हें नहीं मिले.-------------------------------------------------------------------------------- ATM की लाइन में लगने वालों का मजाक उड़ा रहे हैं BJP नेता मनोज तिवारी!नोटबंदी पर RBI और सरकार एक सवाल का जवाब तक नहीं दे रहे