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दिल्ली सर्विसेज बिल पर राज्यसभा में जबरदस्त बहस, AAP ने 'संवैधानिक पाप' बता दिया

बिल पर AAP और कांग्रेस के हमलों का BJP ने क्या जवाब दिया?

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7 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 7 अगस्त 2023, 07:59 PM IST)
Delhi services bill in Rajya Sabha
7 अगस्त को राज्यसभा में दिल्ली सर्विसेज बिल पर चर्चा हुई. (फोटो: राज्यसभा/ट्विटर)
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 (दिल्ली सर्विसेज बिल) पर सोमवार, 7 अगस्त को राज्यसभा में बहस हुई. ये बिल 3 अगस्त को लोकसभा में पास हो गया था. आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और BJP सांसदों ने बिल पर अपने-अपने विचार रखे. AAP और कांग्रेस ने इस बिल का विरोध किया है. वहीं BJP  ने बिल का समर्थन करते हुए AAP और कांग्रेस पर तंज कसा.

राघव चड्ढा ने बिल को ‘संवैधानिक पाप’ कहा

राज्यसभा में पेश किए गए दिल्ली सर्विस बिल को आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद राघव चड्ढा ने ‘राजनीतिक धोखा’ बताया. उन्होंने इसे ‘संवैधानिक पाप’ करार देते हुए कहा कि इससे दिल्ली में प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो जाएगा. राघव चड्ढा ने कहा,

"BJP ने 1989, 1999 और 2013 के लोकसभा चुनाव के घोषणा-पत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया था. आज BJP के पास मौका है, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दीजिए."

राघव चड्ढा बोले,

"गृह मंत्री अमित शाह कह रहे थे कि पंडित नेहरू दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के पक्ष में नहीं थे. मैं उन्हें बता दूं कि लाल कृष्ण आडवाणी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए बिल लेकर आए थे. अटल जी, आडवाणी जी, सुषमा स्वराज और मदन लाल खुराना ने दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने के लिए संघर्ष किया था. आप ये बिल लाकर उनके संघर्ष का अपमान कर रहे हो. आपके पास मौका है- नेहरूवादी नहीं अटल-आडवाणीवादी बनिए."

कांग्रेस क्या बोली?

इससे पहले कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने बिल पर चर्चा की शुरुआत की. उन्होंने कहा,

"ये विधेयक पूरी तरह से असंवैधानिक है, ये मौलिक रूप से अलोकतांत्रिक है, और ये दिल्ली के लोगों की आवाज़ और आकांक्षाओं पर सीधा हमला है. यह संघवाद के सभी सिद्धांतों, सिविल सेवा जवाबदेही के सभी मानदंडों और विधानसभा-आधारित लोकतंत्र के सभी मॉडलों का उल्लंघन करता है."

उन्होंने कहा,

"ये बिल संघीय ढांचे के खिलाफ है. इसके बाद मुख्यमंत्री दो सचिवों के नीचे आएगा यानी सचिव फैसला करेगा और मुख्यमंत्री देखेगा. सभी बोर्डों, कमेटियों के प्रमुख सुपर CM यानी गृह मंत्रालय से ही बनाए जाएंगे."

सिंघवी ने कहा कि बिल का मकसद डर पैदा करना है. 

कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने इस बिल को आगे ना बढ़ाने की अपील करते हुए कहा,

“मैं सदन से अपील करता हूं कि इस विधेयक को आगे ना बढ़ाया जाए क्योंकि ये विधेयक (दिल्ली सेवा विधेयक) असंवैधानिक है. कानून मंत्रालय जानता है कि ये असंवैधानिक है.”

बिल के समर्थन में क्या कहा गया?

वहीं BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि संसद को दिल्ली पर कानून बनाने का अधिकार है. उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा,

“AAP ने पंजाब और दिल्ली से कांग्रेस को साफ कर दिया, गुजरात में वोट हाफ कर दिया फिर भी कांग्रेस ने इनको माफ कर दिया.”

पूर्व CJI रंजन गोगोई ने भी दिल्ली सर्विस बिल का समर्थन किया है. राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई ने कहा,

“दिल्ली सर्विसेज बिल से जुड़े दो सवाल सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ को भेजे गए हैं, इसका सदन में बहस से कोई लेना-देना नहीं है.”

गोगोई ने कहा कि ये कहना गलत कि मामला कोर्ट में लंबित है इसलिए इस पर सदन में बिल नहीं आ सकता. पूर्व CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जो मामला लंबित है वो अध्यादेश की वैधता है, और इसका सदन में बहस से कोई संबंध नहीं है.

इस विधेयक के खिलाफ विपक्षी दलों का समर्थन मांग रही AAP ने अपने राज्यसभा सदस्यों को व्हिप जारी किया था. इसमें उन्हें सोमवार और मंगलवार को सदन में उपस्थित रहने के लिए कहा गया था. कांग्रेस ने भी अपने सांसदों को राज्यसभा में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया था. बिल पर बहस अभी भी जारी है. सभापति जगदीप धनखड़ ने सत्र को 8 बजे के बाद भी जारी रखने की घोषणा की है.

वीडियो: अमित शाह के सामने लोकसभा में दिल्ली पर विधेयक पास होते ही सुशील कुमार रिंकू सस्पेंड

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