वेस्ट दिल्ली में रणहौला इलाके में दिनदहाड़े एक बुजुर्ग महिला को लूट लिया गया. कहोइसमें नया क्या है? दिल्ली वालों को कौन किसने पहली दफा लूटा है. नया ये है कि दावाकिया जा रहा है. दो बदमाशों ने उनकी आंख में देख लूट लिया, माने उनको हिप्नोटाइजमाने सम्मोहित कर लिया. उनसे लाखों के सोने के गहने लूट लिए. ये पूरा इंसीडेंटसीसीटीवी में आ गया. इस कांड को भये एक हफ्ता बीत गया लेकिन केस में आगे कुछ न होपाया है. जिन बुजुर्ग महिला को लूटा गया उनका नाम प्रितिमा देवी है. उनको कुछबदमाशों ने पहले तो हिप्नोटाइज किया फिर अपने जाल में फंसाया और फिर उसके जेवरातलूटे और फिर फरार हो गए. उनने ये दावा किया है. प्रितिमा के बताए के मुताबिक़ उनकोहिप्नोटाइज किया गया तो खुद सोने की चेन, दो अंगूठी और एक कड़ा उतार कर उनको दे दीं.वो तो भला हो एक कड़ा टाइट होने के कारण हाथ से निकल नहीं पाया. पुलिस कहती है. इससम्मोहन गैंग ने 300 से ज्यादा ऐसे कांड किए हैं . और ये हमेशा बुजुर्गों को हीफांसते हैं. पुलिस कहती है इस गैंग मे शामिल ज्यादातर लोग उत्तरप्रदेश के हैं. परकौन हैं? क्या हैं? कैसे हिप्नोटाइज कर लूट लेते हैं, दइउ जाने प्रितिमा देवी कोकैसे लूटा गया, सच में हिप्नोटाइज किया गया. या बातों में बहकाया गया शायद ही पतालगे. पर आगे आपको कुछ ऐसे गिरोहों के बारे में बताते हैं. जिनकी लूट का ढंग खुद मेंही अजीब होता है. होता था.नमस्ते गैंगये गैंग भी दिल्ली-एनसीआर में एक्टिव है. पैटर्न समझिए, जहां-जहां कॉल सेंटर औरबीपीओ ज्यादा होते हैं, बाहर से आकर लोग काम करते हैं. वहीं ऐसे गिरोह पाए जातेहैं. ऐसे शहरों में भीड़ ज्यादा होती है और जान-पहचान वाले कम. नमस्ते गैंग वाले भीकारवालों को निशाना बनाते हैं. लूटने के लिए कार वालों को ये नमस्ते करते हैं. फिरकार रोकने का इशारा करते हैं. फिर समान पार कर देते हैं. कई बार सामान ले जाना इतनाआसान नहीं होता. तो ये चाकू और बंदूक अड़ाकर लूट लेते हैं.कूलर गैंगकूलर गैंग वाले आप पर हमला नहीं करते आपके कूलर को निशाना बनाते हैं. आमतौर पर कूलरघर के बाहर खिड़कियों पर लगे होते हैं. ये कूलर के पानी में नशीली दवाई मिला देतेहैं. नशा पानी में घुलकर हवा से सारे कमरे में फैलता है. आप गहरी नींद में सो जातेहैं. कई घंटों तक नींद नहीं टूटती, आप सोते हैं और सोते ही जाते हैं. इस बीच तालाटूटता है, आलमारी चटकती है, जेवर साफ होते हैं और आप कंगले.चड्डी बनियान गिरोहइस गिरोह के लोग दिनभर भिखारियों, बेकारों जैसे फिरते थे. लोगों के घर पर नजर रखतेऔर रात होते ही कपड़े उतार लूट के लिए निकल पड़ते. ये सिर्फ चड्डी बनियान में होते.इनके हाथ में हथियार होते, चाकू, कुल्हाड़ी, रॉड. इनके उन्ह पुते होते. हाथ-पैर औरसारी देह में या तो कीचड लगा होता या तेल जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल होता. हाथलगाते ही ये छिटल जाते. साथ ही ये लंबूसड़ से होते, तेल-मैल में पुते होते तो डरावनेभी दिखते और इसका सायकोलॉजिकल प्रेशर पड़ता. ये अपनी लूट के रास्ते में आने वालों कोजान से मार देने में भी नहीं हिचकते थे. मेरे साथ स्कूल में एक लड़का पढ़ता था, उसकेपापा के घर में ये गिरोह घुसा तो सबको मार डाला था, सिर्फ उसके पापा बच गए थेक्योंकि वो वहां थे नहीं. चड्डी-बनियान गिरोह देश के हर कोने में मिल जाया करता है.आज भी इसकी खबरें आती हैं.सरियामार सरियामार गिरोह का आतंक सबसे ज्यादा बच्चों में था. उन्हें इसके नाम से खूब डरायाजाता. नाम बताने की किसी शर्त पर काम किए बिना सीलमपुरिया सूत्र टिनटिन त्रिवेदीबताते हैं, ये गिरोह कुछ वैसे ही चलता था, जैसे NH-10 में आपने अनुष्का शर्मा कोचलये देखा होगा. ये पैर के पास सरिया रख कर चलते और बगल में जाते किसी को भी सरियासे मार उसे लूट लेते थे. कई बार इस गिरोह के लोग घर में घुसकर लोगों को मार-लूटलेते थे.महिला शॉल गिरोहइस गिरोह में बेसिकली औरतें होती हैं. ये दुकानों के आगे शॉल खोलकर बैठ जातीं, उसकीआड़ में कोई शटर खोलता और पीछे से शटर के नीचे घुस जाता. बाहर से देखने पर कुछ पतानहीं चलता कि क्या हो रहा है, अंदर घुसी औरत सामान पारकर बाहर आ जाती. ऐसा ये बिनाताला तोड़े भी कर लेती थीं. किसी दुकान में कई शॉल ओढ़ी औरतें पहुंचती. दुकानदार सेबातें करतीं सामान निक्ल्वातीं और इतने में कोई शॉल में सामान छुपा पार कर देती.टट्टी गिरोह ये यूजुअल चोरों जैसे ही होते थे, खाली घरों के ताले तोड़ते, चोरी करते. लेकिनजाते-जाते टट्टी कर जाते. जिसके घर में चोरी हुई हो उसके सामने सवाल होता पहलेपुलिस को बताए या टट्टी हटाए.-------------------------------------------------------------------------------- दिल्ली-NCR में आपका एक नमस्ते आपको लुटवा सकता है!हाथ पर गुदा टैटू भी बड़ा काम आ सकता हैपसीना चाटके मर जाना, कूलर न चलाना, वरना कूलर गैंग आ जाएगाइनकी चोरी के बाद कन्फ्यूज रहोगे पुलिस के पास जाएं या टट्टी हटाएं