जामिया प्रदर्शन: पुलिस ने कहा था कि एक भी गोली नहीं चली, केस डायरी कुछ और ही कह रही है
तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इन्होंने दावा किया था कि उन्हें गोली लगी है.
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जामिया मिलिया इस्लामिया में विरोध प्रदर्शन के दौरान गोली चली थी कि नहीं, ये अब तक सस्पेंस बना हुआ है. (फाइल फोटो)
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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में विरोध प्रदर्शन हुआ था. जांच में पता चला है कि एसीपी रैंक के अधिकारी के सामने दो पुलिसकर्मियों की तरफ से दो बुलेट फायर किए गए थे. यह उन दावों के ठीक उलट है. जिसमें दिल्ली पुलिस ने कहा था कि झड़प के दौरान पुलिस की ओर से एक भी गोली नहीं चलाई गई थी.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, दक्षिणी दिल्ली पुलिस की केस डायरी में इसका ज़िक्र है. 15 दिसंबर 2019 को विरोध प्रदर्शन हुआ था. इसके बाद हिंसा भड़क गई थी. जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों और स्थानीय लोगों सहित प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने संसद तक जाने की कोशिश की लेकिन मथुरा रोड पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया. इसके बाद प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने पथराव शुरू कर दिया. बसों और निजी वाहनों को आग लगा दी. इसके बाद पुलिस ने कैंपस के अंदर घुसकर कार्रवाई की.
विरोध के कुछ घंटों बाद, जामिया मिलिया इस्लामिया के दो छात्रों जिनकी पहचान अज़ाज़ अहमद और मोहम्मद शोएब के रूप में हुई उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहीं तीसरे की पहचान मोहम्मद तामिन के रूप में हुई. उन्हें होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया. इन लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें गोली लगी है. उनके इस दावे को अस्पताल की एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) रिपोर्ट में भी दर्ज किया गया.
हालांकि पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने एक भी गोली नहीं चलाई. लेकिन होली फैमिली अस्पताल की एमएलसी रिपोर्ट में बंदूक की गोली से घाव लगने की रिपोर्ट दर्ज है. घायलों के बयान के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया था.
साउथ ईस्ट डीसीपी चिन्मय बिस्वाल ने कहा,
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हमने किसी भी छात्र पर गोली नहीं चलाई. हो सकता है किसी मेटल से चोट लगी हो. लेकिन सफदरजंग में भर्ती दो घायलों का भी दावा है कि उन्हें गोली लगी है. लेकिन अगर किसी को भी गोली लगी होती तो एम्बुलेंस उन्हें नजदीक के होली फैमिली या फोर्टिस में ले जाती.सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 15 दिसंबर की झड़पों के बाद साउथ ईस्ट दिल्ली के पुलिसकर्मियों ने सीनियर अधिकारियों से पूछा था कि क्या उनमें से किसी ने गोलियां चलाई थीं. उन सभी अधिकारियों ने कहा था कि गोली नहीं चलाई थी. लेकिन 18 दिसंबर को एक वीडियो सामने आया. इसमें दो पुलिसवाले फायरिंग करते दिखे. पास में एक तीसरा अधिकारी खड़ा था. एक सूत्र ने अखबार को बताया कि साउथ ईस्ट पुलिस ने इन पुलिसवालों के साथ ही साथ एसीपी की भी पहचान की. और इसकी पुष्टि की गई कि फायरिंग हुई थी. इन पुलिसवालों ने बताया कि जब प्रदर्शन हिंसक हो गया था कि वो उन्होंने आत्मरक्षा में फायरिंग की. उनके बयान तब केस डायरी में दर्ज किए गए थे. जामिया नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में हिंसा से संबंधित दो एफआईआर दर्ज की गई हैं. इसमें पुलिस गोलीबारी का कोई जिक्र नहीं है. एक अधिकारी ने कहा विशेष केस डायरी अभी क्राइम ब्रांच एसआईटी को नहीं सौंपी गई है. 4 जनवरी को जब दोबारा पूछा गया कि क्या पुलिस ने गोलियां चलाई? तो डीसीपी बिस्वाल ने कहा कि वह इस पर कमेंट नहीं कर सकते क्योंकि जांच चल रही है. इस बीच, जामिया के तीनों छात्रों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है. एसआईटी आने वाले दिनों में उनके बयान दर्ज करने के लिए उनसे संपर्क कर सकती है. सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर सुनील गुप्ता का कहना है कि दोनों छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. उनके शरीर से जो चीज निकाली गई है उसे दिल्ली पुलिस को भेज दिया गया है. हमारी भूमिका सिर्फ बेसिक ट्रीटमेंट देने तक की है. होली फैमिली अस्पताल के डायरेक्टर फादर जॉर्ज पीए का कहना है कि पेशेंट की बॉडी से जो भी निकला है उसे दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया है. पुलिस जांच कर पता लगाएगी कि यह गोली थी या टियर गैस सेल.
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