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जिस आइशी घोष पर केस दर्ज हुआ उसने 3 बजे ही JNU में हिंसा की सूचना पुलिस को दी थी

लेकिन 5 मिनट में पहुंचने का दावा करने वाली पुलिस ने एक्शन लेने में चार घंटे लगा दिये.

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9 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 9 जनवरी 2020, 10:59 AM IST)
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बाएं से दाएं: 5 जनवरी को हुई हिंसा की एक तस्वीर. वॉट्सऐप पर पुलिस को की गई शिकायत. फोटो- PTI/ @TanushreePande
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JNU में 5 जनवरी के दिन जमकर बवाल हुआ. कुछ नकाबधारी गुंडों ने कैंपस के अंदर तोड़-फोड़ की. स्टूडेंट्स और टीचर्स को पीटा. करीब 34 स्टूडेंट्स घायल हुए. इनमें JNUSU की प्रेसिडेंट आइशी घोष भी शामिल थीं. उनके सिर पर गहरी चोट आई थी.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हंगामे वाले दिन पुलिस शाम करीब 7.45 पर यूनिवर्सिटी के अंदर घुसी थी, जबकि पुलिस को कैंपस के अंदर मच रहे बवाल के बारे में दोपहर 3 बजे ही खबर मिल गई थी. आइशी घोष ने पुलिस के कुछ अधिकारियों को वॉट्सऐप मैसेज करके कैंपस के अंदर के हालात के बारे में बताया था. इंडिया टुडे के पास आइशी के मैसेज के स्क्रीनशॉट भी हैं.

आइशी ने 5 जनवरी के दिन दोपहर 3 बजे वसंत कुंज पुलिस स्टेशन के SHO ऋतुराज, एक इंस्पेक्टर संजीव मंडल और स्पेशल कमिश्वर ऑफ पुलिस आनंद मोहन को मैसेज किए थे. जानकारी दी थी कि कैंपस के अंदर हथियारों के साथ कुछ गुंडें मौजूद हैं.

तीनों पुलिस अधिकारियों को किए गए मैसेज में लिखा है,

'सर आपको ये बताना है कि बहुत सारे स्टूडेंट्स हथियारों और लाठियों के साथ एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक के पास इकट्ठा हो गए हैं. यूनिवर्सिटी के बाकी स्टूडेंट्स को पीट रहे हैं. हम आपसे अपील कर रहे हैं कि आप जल्द से जल्द एक्शन लें और इन स्टूडेंट्स को हटाएं जो हाई कोर्ट के ऑर्डर का उल्लंघन कर रहे हैं'


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पुलिस को 5 जनवरी की दोपहर में ही मैसेज किया गया था. फोटो- @TanushreePande

पुलिस अधिकारियों ने ये मैसेज कुछ ही मिनट बाद पढ़ भी लिए थे, लेकिन कैंपस के अंदर पुलिस शाम 7 के बाद पहुंची. इसके अलावा ये भी सामने आया है कि दोपहर के वक्त ही JNU के अंदर से पुलिस कंट्रोल रूम में करीब 50 कॉल्स किए गए थे. नकाबधारी गुंडों की मौजूदगी के बारे में जानकारी दी गई थी.

इंडिया टुडे से हुई बातचीत में आइशी ने बताया,

'मैंने वसंत कुंज पुलिस स्टेशन के SHO को कई बार कॉल किया था, जब पहली बार नकाबधारी गुंडे दिखे थे तब मैसेज भी किया था. अगर दिल्ली पुलिस चाहती, तो स्टूडेंट्स और टीचर्स को पिटने से बचा सकते थे. लेकिन बदकिस्मती से ऐसा नहीं हुआ.'

वहीं इस मामले में दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि उन्हें कैंपस के अंदर घुसने की अपील शाम 7 बजे के बाद ही मिली थी और उसके बाद ही वो अंदर गए. उनके मुताबिक, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जो हुआ, उसके बाद वो किसी यूनिवर्सिटी में प्रशासन की परमिशन के बिना एंट्री नहीं करना चाहते थे.


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पुलिस को 5 जनवरी की दोपहर में ही मैसेज किया गया था. कुछ ही मिनट बाद मैसेज देख भी लिया गया था. फोटो- @TanushreePande

वहीं JNU के वीसी एम जगदेश कुमार ने इंडिया टुडे से कहा,

'शाम करीब 4.30 बजे हमें पता चला कि स्टूडेंट्स का एक ग्रुप गुस्से में इधर-उधर घूम रहा है, हमने हमारे सिक्योरिटी गार्ड्स को तुरंत वहां भेजा ताकि वो स्थिति का अंदाजा लगा सकें. उन्हें वहां पहुंचकर स्थिति के बारे में पता लगाने में वक्त लगा, उसके बाद हमने पुलिस को कॉल किया. PCR को कई बार कॉल किया गया, हमने पुलिस स्टेशन में भी कॉल किया उसके बाद पुलिस आई.'

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जगदेश कुमार ने दिल्ली पुलिस को शाम 6.30 बजे के आसपास मैसेज किया था. इस दौरान उन्होंने पुलिस को कैंपस में आकर कार्रवाई करने के बजाए गेट पर रहने को कहा था. ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक
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