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किसान नेताओं ने विश्वासघात किया: दिल्ली पुलिस कमिश्नर

दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने किसान नेताओं पर बड़े आरोप लगाए हैं

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27 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 27 जनवरी 2021, 04:17 PM IST)
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दिल्ली के पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव (दाएं) ने कहा है कि किसानों ने ट्रैक्टर परेड की पहले से तय शर्तें नहीं मानीं. तभी व्यवस्था बिगड़ी, हिंसा हुई. (कैप्शन – PTI)
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दिल्ली के पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने बुधवार को दिल्ली में 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड और इस दौरान हुई हिंसा को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने बताया कि किन परिस्थितियों में पुलिस की तरफ से किसान नेताओं को मार्च करने की अनुमति दी गई और बाद में परेड वाले दिन हुई हिंसा के दौरान संयम बरता गया. कॉन्फ्रेंस में एसएन श्रीवास्तव ने किसान संगठनों पर कई आरोप लगाए हैं. उन्होंने किसान नेताओं पर 'विश्वासघात' करने का भी आरोप लगाया है और कहा है कि पुलिस दोषियों पर कार्रवाई करेगी. जानते हैं दिल्ली पुलिस आयुक्त ने और क्या-क्या कहा- # किसान बड़ी संख्या में पिछले दो महीने से दिल्ली की तीन सीमाओं पर बैठे हैं. 2 जनवरी को दिल्ली पुलिस को पता चला कि किसान ‘रिपब्लिक रैली’ करने जा रहे हैं. ट्रैक्टर मार्च. ये भी संयुक्त किसान मोर्चा ने आह्वान किया कि उनके समर्थक 26 जनवरी को दिल्ली आकर रैली में भाग लें. # जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, हमने किसान नेताओं से संपर्क किया. उनके साथ पांच राउंड की मीटिंग हुई. कई बार फोन पर भी बात हुई. सबसे पहले तो उनसे कहा गया कि वे 26 जनवरी को मार्च न करें. फिर हमने सजेस्ट किया कि कुंडली-मानेसर-पलवल पेरीफेरल पर मार्च निकालें. (लेकिन) किसानों ने दिल्ली में ही ट्रैक्टर मार्च निकालने की ठान ली. # पांच राउंड की मीटिंग के अंत में हमने उनके साथ आपसी सहमति से तीन रूट तय किए. हमने उनसे मार्च निकालने के लिए कुछ शर्तें भी रखीं. पहली शर्त - रैली 12 बजे शुरू हो और 5 बजे तक खत्म हो जाए. दूसरी शर्त - ट्रैक्टर मार्च का नेतृत्व किसान नेता करें. वे आगे रहें. तीसरी शर्त - 5 हजार से ज्यादा ट्रैक्टर न हों. और कोई भी हथियार साथ में नहीं होना चाहिए. # 25 जनवरी की शाम को ये समझ आया कि वे (किसान नेता) अपने वादे से मुकर रहे हैं. जो उनके आक्रामक और उग्र तत्व थे, उनको आगे कर दिया गया. उन्होंने भड़काऊ भाषण दिए. उनकी मंशा समझ आ गई. फिर भी दिल्ली पुलिस ने संयम से काम किया. # 26 जनवरी को सुबह साढ़े 6 बजे से ही बैरिकेड्स तोड़े जाने लगे. साढ़े 7 बजे से सिंघु पर जो किसान थे, उन्होंने मार्च करना शुरू कर दिया. समझौते के हिसाब से उन्हें जहां मुड़ना चाहिए था, वहां नहीं मुड़े. # उनके नेता सतनाम सिंह पन्नू ने काफी भड़काऊ भाषण दिया. इसके बाद उनके साथ जो किसान थे, वे बैरिकेड्स तोड़ने पर आमादा हो गए. एक और किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने भी तय रूट पर मुड़ने से इन्कार कर दिया. # किसान बूटा सिंह के साथ नांगलोई टी पॉइंट पर बैठ गए और आगे जाने से इन्कार कर दिया. एक बहुत बड़े कंटेनर को पलटकर आगे का रास्ता निकाला गया. फिर पंजाबी बाग होते हुए उनमें से कुछ लाल किला तक पहुंच गए. # उसी तरह गाजीपुर में राकेश टिकैत के साथ जो किसान थे, उन्होंने भी हिंसा की. वे अक्षरधाम तक गए. # पुलिस के पास सभी ऑप्शन थे. लेकिन उसने संयम का रास्ता चुना. नियम-शर्तें न मानने की वजह से हिंसा हुई. इसमें सभी किसान नेता शामिल रहे हैं. # कुल 394 पुलिसवाले घायल हुए हैं. 428 बैरिकेड्स, चार एक्सरे मशीन, 30 पुलिस गाड़ियां, छह कंटेनरों को नुकसान पहुंचाया गया है. # 25 से ज्यादा क्रिमिनल केस रजिस्टर हुए हैं. किसान संगठनों से पूछताछ होगी.  अब तक 19 अरेस्ट, 50 डिटेन किए गए.

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