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नामांकन भरने दूल्हे की तरह निकले केजरीवाल, मगर 'बारातियों' ने खेल खराब कर दिया!

इसीलिए बड़े बुज़ुर्ग नागिन डांस करने वालों को तिरछी नज़र से देखते हैं.

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20 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 20 जनवरी 2020, 11:36 AM IST)
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केजरीवाल ने वापस लौटते हुए प्रेस से कहा कि उन्हें कहा जा रहा था कि नामांकन भरना है, लेकिन इतनी भीड़ को छोड़कर कैसे चला जाता?
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शादी का घर. सबसे ज़्यादा टेंशन होती है एक शख्स को. कौन? पंडिज्जी. काहे? मुहूर्त लेकर बैठे रहते हैं. मुहूर्त होता है पंडिज्जी का कोड ऑफ़ कंडक्ट. आचार संहिता. लेकिन दूल्हे के दोस्तों को अचार चटनी से लेना एक ना देना दो. बारात का रोड शो. नागिन की तरह नाचते नगीना दोस्त. उधर माथे पर आयोडेक्स मलते पंडिज्जी. मुहूर्त के मारे.

दिल्ली चुनाव. सबसे ज़्यादा टेंशन किसे? ना-ना पंडिज्जी को नहीं भाई. दूल्हे को. प्रत्याशी को. मां का आशिर्वाद लेकर नामांकन भरने निकले अरविंद केजरीवाल. साथ में रोड शो की बारात. मुहूर्त. समय सीमा. पंडिज्जी- निर्वाचन अधिकारी. केजरीवाल को पहुंचना था 3 बजे तक. लेकिन रोड शो था कि खत्म होकर ना दे.

# हुआ कैसे?

केजरीवाल का काफ़िला पहले पहुंचा वाल्मीकि मंदिर. फिर कनॉट प्लेस, पंचकुला मार्ग, बाबा खड़क सिंह मार्ग होते हुए ख़त्म होना था पटेल चौक मेट्रो स्टेशन पर. पार्टी के तमाम नेता और कार्यकर्ताओं के साथ नामांकन भरना था नई दिल्ली विधानसभा सीट से. केजरीवाल लगातार तीसरी बार AAP के टिकट पर यहां से उम्मीदवार घोषित हुए हैं. दूल्हे वाले केस में तो फिर भी पंडिज्जी मुहूर्त आगे-पीछे कर लेते हैं, लेकिन केजरीवाल का मुहूर्त आगे बढ़ नहीं पाया. बिना नामांकन पर्चा भरे लौट आए.

बारात में नाचने वाले नगीनों को इसीलिए बड़े बुज़ुर्ग डांटते डपटते चलते हैं. लेकिन दोस्तों के पास होता है वीटो ‘दोस्त की शादी दोबारा तो होगी नहीं’ का. लेकिन केजरीवाल के साथ बस एक चीज़ अच्छी रही कि आज नामांकन का लास्ट डे नहीं था. अब केजरीवाल ने कहा है कि मंगलवार को भरेंगे पर्चा.

कार्यकर्ता और नेता मना रहे होंगे कि मंगलवार को ‘तारे गिन गिन ...’ ना ही बजे तो चंगा.

# सीट की हिस्ट्री

नई दिल्ली सीट पर इससे पहले साल 2013 में कांग्रेस की शीला दीक्षित, और फिर 2015 में बीजेपी की नूपुर शर्मा को हराकर केजरीवाल ने यहां से विधानसभा चुनाव जीता था. साल 2008 में अस्तित्व में आई इस सीट पर चौथी बार चुनाव होने जा रहा है.


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