दिल्ली की एक अदालत ने बीजेपी के नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा (SambitPatra) के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है. ये आदेश संबित पात्रा की तरफ सेदिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक एडिटेड वीडियो पोस्ट करने के संबंधमें दिया गया है. पात्रा ने इस साल जनवरी के आखिर में अपने ट्विटर अकाउंटसे एक वीडियो साझा किया था. इस एडिटेड वीडियो में दिखाया गया था कि अरविंद केजरीवालतीन नए कृषि कानूनों के फायदे गिना रहे थे. बाद में आलोचना होने पर संबित पात्रा नेइस छेड़छाड़ वाले वीडियो को डिलीट कर दिया था.Delhi court orders registration of FIR against BJP leader Sambit Patra forallegedly posting a doctored video of Delhi CM Arvind Kejriwal on social media(File photos) pic.twitter.com/aPBoQt5ERs— ANI (@ANI) November 23, 2021स्क्रॉल की रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मामले में 4 फरवरी 2021को दिल्ली पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस की तरफ से आगे की कार्रवाई नाहोने पर पार्टी की लीगल टीम पूरे मामले को कोर्ट में ले गई थी. अब 9 महीने बादकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. इसमें पात्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने की बात कही गईहै. दूसरी तरफ, कोर्ट के इस फैसले पर अभी तक संबित पात्रा और बीजेपी की कोईप्रतिक्रिया नहीं आई है.Sambit Patra ने केजरीवाल का फर्जी वीडियो ट्वीट किया था. जिसे बाद में डिलीट भी करदिया था.कृषि कानूनों की विरोधी रही है AAP आम आदमी पार्टी (AAP) शुरुआत से ही तीनों नएकृषि कानूनों का विरोध करती रही है. संसद में भी पार्टी ने इन नए कृषि कानूनों सेजुड़े विधेयकों के खिलाफ वोटिंग की थी. पार्टी पंजाब चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कीउम्मीद बांधे हुए है. ऐसे में पार्टी के नेता समय-समय पर इन कानूनों के खिलाफमुखरता से बोलते रहे हैं और केंद्र सरकार को निशाने पर लेते रहे हैं. AAP नेराष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन का भी बढ़-चढ़कर समर्थन कियाहै.दूसरी तरफ, 19 नवंबर को एक बड़ा यू टर्न लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेराष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की.उन्होंने कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इन लगभग एक साल पुराने कानूनों कोवापस ले लिया जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार किसानों को इन कानूनोंके फायदे समझाने में नाकाम रही और अब किसानों के हित में इन कानूनों को वापस लेनेजा रही है. हालांकि, उनके इस यूटर्न को किसानों की भलाई से कम बल्कि आगामी विधानसभाचुनावों से अधिक जोड़कर देखा गया.पीएम मोदी ने19 नवंबर को राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों को वापसलेने की घोषणा की. (फोटो-ANI)हालांकि प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद भी दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन जारीहै. आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक ये कानून संसद में समाप्त नहीं किए जाएंगे,वो सीमाओं पर डटे रहेंगे. किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी कानून बनाने की मांग कररहे हैं. 22 नवंबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई किसान महापंचायत मेंआंदोलनकारियों ने इस मांग को प्रमुखता से उठाया था.