राहुल गांधी की सांसदी कब बहाल होगी? कांग्रेस ने लोकसभा सचिवालय को चिट्ठी भेज क्या आरोप लगाया?
कांग्रेस ने सवाल किया कि राहुल गांधी को अयोग्य करार देने में जो तेजी दिखाई गई, वो बहाल करने में क्यों नहीं.

‘मोदी सरनेम’ मानहानि केस में सुप्रीम कोर्ट की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राहत दी जा चुकी है. अब कांग्रेस जल्द से जल्द उनकी लोकसभा सदस्यता की बहाली का इंतजार कर रही है. कांग्रेस सवाल कर रही है कि जिस रफ्तार से राहुल गांधी की सदस्यता रद्द की गई थी, उसी रफ्तार से उनकी बहाली पर काम क्यों नहीं हो रहा है. कांग्रेस चाहती है कि 7 अगस्त से पहले तक राहुल गांधी की सांसदी बहाली कर दी जाए.
कब बहाल होगी राहुल गांधी की सांसदी?कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार, 5 अगस्त को राहुल गांधी के केस पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश लोकसभा सचिवालय को सौंपा. साथ ही, राहुल गांधी की सदस्यता की बहाली की मांग वाला एक पत्र भी दिया गया.
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा सचिवालय के सूत्रों की ओर से बताया गया है कि कि कांग्रेस कोर्ट का आदेश सौंप चुकी है. सूत्रों ने कहा कि '(कांग्रेस के) अनुरोध की जांच' सोमवार, 7 अगस्त को की जाएगी. इसकी वजह ये है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला रविवार को दिल्ली से बाहर यात्रा पर हैं.
कांग्रेस चाहती है कि राहुल गांधी सदन में लौटें और अविश्वास प्रस्ताव में हिस्सा लें, जिस पर 8 अगस्त को चर्चा होनी है. शुक्रवार, 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के तुरंत बाद अधीर रंजन चौधरी ने ओम बिड़ला से मुलाकात की थी. उनसे राहुल गांधी की सदस्यता बहाल करने की अपील की थी. इस पर स्पीकर ने कांग्रेस नेता से कहा था कि उनके ऑफिस को सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलने के बाद वह फैसला करेंगे.
इस बारे में अधीर रंजन चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा,
क्या जानबूझकर देरी की जा रही?“अदालत का आदेश मिलने के बाद, मैंने शुक्रवार, 4 अगस्त की रात स्पीकर को फोन किया. मैंने उनसे कहा कि मैं राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने वाला सुप्रीम कोर्ट का आदेश सौंपना चाहता हूं. साथ ही, पार्टी की ओर से राहुल गांधी की बहाली वाला लेटर भी सौंपना चाहता हूं. मैंने उनसे मिलने का समय मांगा. उन्होंने मुझसे कहा कि वह शनिवार, 5 अगस्त को मुझसे मिलेंगे. ”
अधीर रंजन चौधरी ने कहा,
“मैंने उन्हें शनिवार (5 अगस्त) सुबह फोन किया. मैंने उनसे बात की थी. उन्होंने मुझे लोकसभा महासचिव से संपर्क करने और डॉक्यूमेंट उनके दफ्तर को सौंपने की सलाह दी. मैंने महासचिव को फोन किया. महासचिव ने कहा कि आज (5 अगस्त) छुट्टी होने के कारण उनका ऑफिस बंद है. मैंने पूछा कि फिर चिट्ठी किसे दूं? उन्होंने मुझसे कहा कि चिट्ठी अध्यक्ष को ही दे दीजिए (और यह) अध्यक्ष के ऑफिस से उन तक पहुंच जाएगा.”
उन्होंने आगे कहा,
“मैंने महासचिव से कहा कि कम से कम पत्र रिसीव तो कर लें. उन्होंने कहा कि आज छुट्टी है. छुट्टी का दिन है तो क्या हुआ....इमरजेंसी कामकाज की स्थिति में चिट्ठी रिसीव करने की कोई व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि एक सिस्टम है. उन्होंने कहा कि एक डाक सिस्टम है और मुझसे चिट्ठी और आदेश के साथ किसी को भेजने के लिए कहा. मैंने चिट्ठी भेजी...एक अवर सचिव ने इसे रिसीव किया. उन्होंने चिट्ठी पर हस्ताक्षर तो किए, लेकिन मुहर नहीं लगाई.”
चौधरी ने कहा कि जब कोर्ट ने राहुल गांधी को राहत दे दी है, तो स्पीकर और उनके कार्यालय को सदन में राहुल गांधी की वापसी में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि राहुल गांधी की बहाली के लिए पार्टी की ओर नियमों के मुताबिक सब कुछ किया गया है.
यह पूछे जाने पर कि क्या वह अध्यक्ष को दोष दे रहे हैं या जानबूझकर देरी का आरोप लगा रहे हैं, इस पर अधीर रंजन चौधरी ने कहा,
“मेरा अध्यक्ष को कटघरे में खड़ा करने का कोई इरादा नहीं है. अध्यक्ष के लिए मेरे मन में सम्मान है. मैं सिर्फ अपना अधिकार मांग रहा हूं. मैं अलग से कोई सुविधा नहीं मांग रहा हूं."
उन्होंने कहा,
‘मोदी सरनेम’ केस“अब निर्णय अध्यक्ष और महासचिव पर निर्भर है. अगर वे सलाह लेना चाहते हैं...किसी से...कानून मंत्री से परामर्श करना चाहते हैं, तो वे ऐसा कर सकते हैं...लेकिन सोमवार (7 अगस्त) से पहले जब हफ्ते के आखिर की छुट्टी के बाद सदन की बैठक शुरू होगी, राहुल गांधी को बहाल कर दें. जिस तत्परता से राहुल गांधी को अयोग्य ठहराया गया, हमने तब कुछ नहीं कहा; जिस दिन उन्हें अपना घर खाली करने के लिए कहा गया था, उस दिन भी छुट्टी थी, आज भी छुट्टी है, उस दिन की तत्परता कुछ अलग थी...आज की तत्परता कुछ धीमी लग रही है...''
ये मामला साल 2019 में राहुल गांधी के एक बयान से जुड़ा है. कर्नाटक के कोलार में राहुल गांधी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था,
"नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?"
इस पर राहुल गांधी के खिलाफ सूरत में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया गया था. आरोप लगाया गया था कि राहुल ने अपने बयान से पूरे मोदी समाज का अपमान किया है. इस मामले में सूरत की कोर्ट ने इस साल 23 मार्च को राहुल गांधी को 2 साल जेल की सजा सुनाई. हालांकि, कोर्ट ने सजा के अमल को 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया था. वहीं 2 साल की सजा सुनाए जाने के कारण 24 मार्च को राहुल गांधी की सांसदी रद्द कर दी गई थी. राहुल गांधी केरल की वायनाड सीट से सांसद थे.
सूरत की निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए राहुल गांधी की तरफ से गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. जिसे 7 जुलाई को खारिज कर दिया गया था. हाई कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को राहुल गांधी की सजा पर रोक लगा दी.
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