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दीपिका JNU गईं तो बॉलीवुड के ये लोग उन पर भड़क गए

कुछ ने तो उनकी फिल्म को नहीं देखने की अपील तक कर डाली.

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8 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 8 जनवरी 2020, 04:04 PM IST)
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दीपिका पादुकोण पहुंचीं जेएनयू
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दीपिका पादुकोण. 7 जनवरी की शाम JNU पहुंचीं. 5 जनवरी को कैम्पस में हुई हिंसा के खिलाफ खड़े स्टूडेंट्स के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया. दीपिका के जेएनयू जाते ही सोशल मीडिया के एक धड़े ने उन्हें देशद्रोही करार दिया. उनकी फिल्म छपाक को बायकॉट करने की अपील की जाने लगी. फिल्म इंडस्ट्री में भी कई लोगों ने दीपिका के विरोध में ट्वीट किया है. फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने दीपिका के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया. वह 'छपाक' और दीपिका के खिलाफ लगातार ट्वीट कर रहे हैं. एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा,
'कुछ भारत विरोधी छात्रों के साथ खड़ी होकर दीपिका ने ये मैसेज दे दिया है कि वह भारत को प्यार करने वाले 98 प्रतिशत छात्रों के साथ नहीं हैं. आपको क्या लगता है?'
फिल्म क्रिटिक सुमित कडेल ने ट्वीट किया है कि वह छपाक का रिव्यू नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, 'जो महज फिल्म के प्रमोशन के लिये देश के गद्दारों के साथ खड़ी हो जाए उसकी फिल्म देखना शर्मनाक होगा.' कंगना की बहन और मैनेजर रंगोली चंदेल ने भी दीपिका का विरोध किया है. रंगोली ने ट्वीट किया, 'दीपिका से जुड़े कई लोग हैं जो टुकड़े टुकड़े गैंग का सपोर्ट करते हैं. ओवर रियेक्ट करने की जरूरत नहीं है. यह फिल्मी लोगों का पैटर्न है.' एक्ट्रेस कोयना मित्रा ने भी ट्वीट करके विरोेध  जताया है. कोयना ने 'राक्षस' संबोधित करते हुये ट्वीट किया है. फिल्मकार अशोक पंडित ने दीपिका से सवाल पूछा है कि क्या वो उन लोगों को सपोर्ट करती हैं जिन्होंने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे स्टूडेंट्स को पीटा.

वहीं दीपिका ने JNU के मुद्दे पर कहा,

'देश में जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर तकलीफ़ होती है.'

दीपिका से जब पूछा गया था कि 'देश के कई विश्वविद्यालयों में सरकार के ख़िलाफ़ खुलकर प्रदर्शन हो रहे हैं. कई फ़िल्मी सितारों ने इस पर बात भी रखी है. आपका इस पर क्या कहना है?' जवाब में दीपिका ने कहा

"अब जो मैं देख रही हूं, मुझे बहुत दर्द होता है. ये दर्द इसलिए क्योंकि लोग जो देख रहे हैं, उसे सामान्य न मानने लग जाएं. ये 'न्यू नॉर्मल' न बन जाए. कोई भी कुछ भी कह सकता है और उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा. तो डर भी लगता है और दुख भी होता है. मुझे लगता है कि हमारे देश की जो बुनियाद है, वो ये नहीं है."


ये खबर हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे शाश्वत ने लिखी है.


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