दीपिका के JNU जाने को लेकर मनोज तिवारी ने एकदम बेतुकी बात कह दी है
अच्छा कहना चाह रहे थे, लेकिन बड़ी गड़बड़ कर दी.
Advertisement

दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक का विरोध करने वालों के लिए सांसद और बीजेपी दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने पते की बात बोली है.
Quick AI Highlights
Click here to view more
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी. 5 जनवरी को यहां हिंसा हुई. मास्क लगाए गुंडों ने छात्रों और टीचर्स को पीटा. हॉकी, रॉड और लाठी-डंडों से हमला किया. इसके बाद खूब हंगामा हुआ. विरोध प्रदर्शन हुए. हिंसा के खिलाफ कैंपस में विरोध प्रदर्शन चल रहा था. 7 जनवरी को दीपिका पादुकोण JNU गईं. इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई तरह की बातें लिखी गईं. कुछ लोगों ने उनकी फिल्म ‘छपाक’ के बायकॉट की बात कही. ट्विटर पर उनकी फिल्म के बायकॉट को लेकर हैशटैग चलाए गए.
दीपिका के JNU जाने पर दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने भी अपनी बात रखी. कहा,
वीडियो देखें:
दीपिका की फिल्मों का बायकॉट नहीं किया जाना चाहिए. वह देशभक्त सुपरस्टार हैं. हिंसा का विरोध करना ही चाहिए. मेरा मानना है कि दीपिका हिंसा का विरोध करने के लिए ही जेएनयू गई थीं. वैसे उनकी फिल्म भी आ रही है. लेकिन मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि जिस तरह वह लोगों के साथ खड़ी हो गईं उन्हें मिसलीड किया गया. जिन लोगों के साथ वो खड़ी थीं वो ग्रुप तो है इंडिया आर्मी मुर्दाबाद कहने वाला. वहां कन्हैया कुमार भी खड़े थे. दीपिका पादुकोण जैसी एक्ट्रेस की इमेज को खराब करने की कोशिश की गई. उनको गलत जानकारी देकर वहां ले जाया गया. मेरा ऐसा मानना है कि हिंसा का विरोध होना चाहिए. हिंसा का विरोध करने के लिए दीपिका का जाना हुआ तो यह गलत नहीं है.मनोज तिवारी ने कहा कि दीपिका पादुकोण एक देशभक्त सुपरस्टार हैं. कई बार वो इंडियन आर्मी के साथ भी देखी गई हैं. उनको पता नहीं होगा कि कन्हैया कुमार जैसे लोगों के साथ खड़े होने का मतलब क्या होता है. मुझे ऐसा लग रहा है कि वो अनजाने में वहां चली गईं होंगी. उन्हें पूरी जानकारी नहीं होगी. दीपिका की फिल्म छपाक के बायकॉट पर मनोज तिवारी ने कहा कि बीजेपी इसका समर्थन नहीं करती कि उनकी फिल्म का बायकॉट किया जाए. फिल्म का मामला कलाकारों का अपना है. हम सबसे प्रार्थना करते हैं कि इस तरह दीपिका की फिल्म का बायकॉट न करें.
दीपिका पादुकोण की आलोचना के सवाल पर मनोज तिवारी ने कहा कि आलोचना करना अलग बात है. दीपिका का जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष के साथ खड़े होने में कोई दिक्कत नहीं है. दिक्कत कन्हैया कुमार के साथ खड़े होने में है. दीपिका को पता नहीं होगा कि कन्हैया कुमार वही है जिसने कहा था कि भारत की बर्बादी तक जंग जारी रहेगी. इंडियन आर्मी मुर्दाबाद, भारत तेरे टुकड़े होंगे. ये अच्छी बात है कि मनोज तिवारी कह रहे हैं कि दीपिका की फिल्मों का बायकॉट नहीं किया जाना चाहिए. हिंसा का विरोध होना चाहिए. लेकिन मनोज तिवारी ने कुछ बातें ऐसी कही हैं जिससे यह साफ है कि वह पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं. बातों से साफ है कि तिवारी को लगता है कि दीपिका को देश-दुनिया की खबर नहीं है, वो वही करती हैं जो उनकी टीम कहती है. मनोज तिवारी का कहना कि दीपिका को मिसलीड किया गया. उनको गलत जानकारी देकर वहां ले जाया गया. उनको पता नहीं है कि कन्हैया कुमार जैसे लोगों के साथ खड़े होने का मतलब क्या होता है. मुझे ऐसा लग रहा है अनजाने में वह जेएनयू चली गईं. उन्हें पूरी जानकारी नहीं होगी. ये बताता है कि तिवारी को लगता है कि दीपिका के पास अपनी समझ नहीं है, वह खुद से फैसले नहीं ले सकतीं. उनके ये कमेंट्स एक नागरिक के तौर पर, एक इंडिविजुअल के तौर पर दीपिका के अस्तित्व को खारिज करने वाला है. तिवारी की ये बात उस मानसिकता को बल देती है जो फिल्म एक्टर्स को महज़ नाचने-गाने वालों तक रिड्यूस कर देती है. तिवारी खुद फिल्मी बैकग्राउंड से हैं. सांसद हैं. एक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं. जब उनके पास अपनी राजनीतिक राय हो सकती है, किसी मुद्दे पर अपना ओपिनियन हो सकता है तो वो कैसे दीपिका की राय को ये कहकर खारिज कर सकते हैं कि उन्हें पता नहीं होगा? क्या दीपिका उनके पाले में जाकर खड़ी होतीं तब भी वो यही कहते कि दीपिका को मालूम नहीं होगा कि एबीवीपी पर हमले के आरोप लग रहे हैं, इसलिए वह उन्हें सपोर्ट कर रही हैं?In times of crisis, women stand beside each other. Women revolt. Women march on the streets. Women are the leaders of this country. Thank you, @deepikapadukone #JNUResists pic.twitter.com/yxrjbI263V
— JNUSU (@JNUSUofficial) January 7, 2020
वीडियो देखें:

