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जिस ऐप को सिर्फ 335 लोगों ने यूज किया, उसने फेसबुक के 5.62 लाख यूजर्स का पर्सनल डेटा उड़ा लिया

मामला विवादित कैम्ब्रिज एनालिटिका और यूके की एक अन्य रिसर्च फर्म से जुड़ा है

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22 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 22 जनवरी 2021, 11:55 AM IST)
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फेसबुक पर आरोप है कि उनके माध्यम से कैम्ब्रिज एनालिटिका को भारतीय यूज़र्स के डेटा मिले. फिर एनालिटिका ने इसका मनमाने ढंग से इस्तेमाल किया. (फाइल फोटो- PTI)
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भारत के 5.62 लाख फेसबुक यूजर्स का डेटा चोरी होने के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने FIR दर्ज कर ली है. यह FIR कैम्ब्रिज एनालिटिका लिमिटेड और ग्लोबल साइंड प्राइवेट लिमिटेड नाम की दो कंपनियों के खिलाफ की गई है. 2018 में CBI ने इस मामले में जांच शुरू की थी. शुरुआती जांच में यूनाइटेड किंगडम (UK) की इन दोनों कंपनियों की डेटा चोरी में भूमिका पाई गई थी. अब FIR दर्ज की गई है. CBI का कहना है कि आरोपों की जांच के लिए फेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका से कुछ डिटेल्स मांगी गई थीं. मसलन, कितना डेटा चोरी हुआ, इसके गलत इस्तेमाल का कितना खतरा है आदि. साथ ही ये भी पूछा गया कि कैम्ब्रिज एनालिटिका किस तरह से इन डेटा का इस्तेमाल भारत में चुनावों को प्रभावित करने के लिए कर सकती है. जब फेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका ने CBI के सवालों के जवाब दिए तो जांच एजेंसी को उनमें विरोधाभास दिखाई दिया.
फेसबुक: संभव है कि 5.62 लाख भारतीय यूज़र्स का डेटा गलत तरीके से निकाला गया हो, इस्तेमाल किया गया हो. कैम्ब्रिज एनालिटिका: नहीं, नहीं. हमें तो ग्लोबल साइंस प्राइवेट लिमिटेड से सिर्फ UK के यूजर्स के डेटा मिले.
इस मामले में CBI की FIR क्या कहती है, वह भी पढ़ें –
“डॉ एलेक्जेंडर कोगन ग्लोबल साइंस प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर, डायरेक्टर हैं. इन्होंने फेसबुक पर एक ऐप बनाया था -  ‘This Is Your Digital Life’ नाम से. फेसबुक की पॉलिसी के मुताबिक ये ऐप कुछ एकेडमिक और रिसर्च काम के वास्ते यूजर्स के कुछेक डेटा ही जुटा रहा था. लेकिन असल में इस ऐप ने यूजर्स के फ्रेंड नेटवर्क तक को खंगाल डाला.”
अब ग्लोबल साइंस पर आरोप है कि उन्हें यहां से जो भी डेटा मिला, उसे कैम्ब्रिज एनालिटिका से साझा कर दिया गया. फिर एनालिटिका ने इसका मनमाने ढंग से इस्तेमाल किया. फेसबुक ने अपने जवाब में कहा है कि इस ऐप का भारत में सिर्फ 335 यूजर्स ने ही इस्तेमाल किया. हालांकि ऐप ने इन यूजर्स के फ्रेंड्स तक भी पहुंच बनाई. इन्हीं के फ्रेंडशिप नेटवर्क को फॉलो करते हुए ऐप ने लाखों यूजर्स को कवर कर लिया. इस तरह 5.62 लाख लोगों के डेटा का अवैध तरीके से इस्तेमाल किए जाने की संभावना जताई गई है. क्या है कैम्ब्रिज एनालिटिका? ये एक फर्म है, जिसका काम है पॉलिटिकल कंसल्टिंग. यानी राजनीतिक पार्टियों को सलाह-मशविरा देना. आपने प्रशांत किशोर का नाम सुना है? वही जिन्होंने 2014 में बीजेपी और फिर 2015 में जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को चुनाव जीतने के गुर बताए थे. प्रशांत किशोर भी पॉलिटिकल कंसल्टेंट ही हैं. इसी तरह का काम कैम्ब्रिज अनालिटिका का भी है. इसी फर्म ने 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के समय डॉनल्ड ट्रंप के लिए काम किया था. सोशल मीडिया, डिजिटल कैंपेनिंग वगैरा. इसी फर्म पर आरोप है कि लोगों का डेटा चुराकर उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया.

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