एक साल में सरकार की 50 वेबसाइट हैक कर ली गई, केंद्रीय मंत्री ने खुद जानकारी दी
सरकार ने डेटा ब्रीच और हैकिंग पर बहुत कुछ बताया है.

साइबर क्राइम की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. हैकर्स आम लोगों को ही नहीं बल्कि सरकार को भी निशाना बना रहे हैं. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार, 3 फरवरी को राज्यसभा में मामले को लेकर कुछ आंकड़े जारी किए. पता चला कि साल 2022 में करीब 50 सरकारी वेबसाइट हैक की गई (50 Govt Websites Hacked in 2022). वहीं डेटा में सेंधमारी के आठ मामले सामने आए. राज्यसभा में पिछले सालों के भी आंकड़े बताए.
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक साल 2020 में 59 और 2021 में 42 सरकारी वेबसाइट हैक की गई थीं. वैष्णव ने आगे बताया,
बता दें, CERT-in साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय एजेंसी के तौर पर काम करती है. पूरा नाम है- इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिसपॉन्स टीम. एजेंसी का काम साइबर घटनाओं पर जानकारी इकट्ठा करना, एनेलिसिस करना, ऐसी घटनाओं का फोरकास्ट कर अलर्ट करना है. ये टीम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत ही आती है. अश्विनी वैष्णव बताते हैं-
उनके सिस्टम की जानकारी किसी को ना लगे इसके लिए हैकर्स छिपे हुए सर्वर का इस्तेमाल करते हैं. अश्विनी ने राज्यसभा में बताया कि समय-समय पर भारतीय साइबर स्पेस पर देश के बाहर और अंदर से भी साइबर हमले करने की कोशिश की गई है. ये देखा गया है कि इस तरह के हमलों में नकली तकनीकों और छिपे हुए सर्वरों का इस्तेमाल किया जाता है. ताकि वास्तविक सिस्टम की पहचान छिपाई जा सके.
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2022 में बताया था कि साइबर हमलों के चलते पिछले पांच सालों में कुल 641 सरकारी ट्विटर अकाउंट, ईमेल और वेबसाइटों से समझौता किया गया. इस बार के डेटा में इस संख्या में कुछ कमी आई है.
हाल के दिनों में सबसे बड़ा साइबर अटैक दिल्ली AIIMS के सर्वर पर हुआ था. नवंबर 2022 में हुए इस साइबर हमले के कारण कई दिनों तक AIIMS की सुविधाएं प्रभावित हुई थीं. हैकिंग के दौरान हॉस्पिटल में इमरजेंसी वार्ड से लेकर आउट पेशेंट (OPD), इन पेशंट, लैब यूनिट को रजिस्टरों पर मैनुअली काम किया गया था.
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