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दविंदर पर आरोप- 20 साल के लड़के को उठवाया, पिता से पैसों का इंतज़ाम करने को कहा था

पुलिस ने लड़के को आतंकी बता दिया, एक हफ्ते बाद उसकी लाश मिली थी.

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20 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 21 जनवरी 2020, 06:21 AM IST)
Davinder Singh
फोटो - thelallantop
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जम्मू-कश्मीर के डीएसपी दविंदर सिंह. कुछ दिन पहले दो आतंकियों के साथ गिरफ्तार हुए. आतंकियों को सुरक्षित दिल्ली पहुंचाने के लिए 12 लाख रुपये लेने की बात कुबूल चुके हैं. अब इन पर एक और आरोप लगा है. कि इनके सुपरविजन में एक कैंप में एक 20 साल के लड़के की मौत हो गई थी. लड़के का नाम एजाज़ अहमद बजाज़ था. मामला जून, 2000 का है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर
के मुताबिक, बजाज़ के पिता मोहम्मद शफ़ी ने बताया-
वह श्रीनगर के बेमिना में अपनी चाची के पास गया था. हमारे घर से ज्यादा दूर नहीं है. दो दिन बाद उसे पुलिस ले गई. हमें पता चला कि हुम्हामा टास्क फोर्स कैंप (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) उसे ले गई है. हफ्ते भर बाद एक पुलिसवाला मेरे घर आया और पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) चलने को कहा. वहां मेरे बेटे की बॉडी पड़ी हुई थी. वह मेरा इकलौता बेटा था. उसके पूरे शरीर पर टॉर्चर के निशान थे.
इस दौरान दविंदर सिंह हुम्हामा में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के प्रभारी थे.
जम्मू-कश्मीर राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने बजाज़ की मौत का संज्ञान लिया. पिछले साल जम्मू-कश्मीर के दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदलने बाद SHRC खत्म हो गया था. SHRC के अंतिम अध्यक्ष, न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) बिलाल नाज़ी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा-
आयोग के सामने यह मामला मेरे कार्यकाल से पहले आया था और मुझे बताया गया था कि आयोग ने दविंदर सिंह के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी.
बजाज़ के पिता मोहम्मद शफी श्रीनगर में जाने-माने पशु चिकित्सक हैं और उनके बेटे की हत्या पर लोगों का ध्यान गया. शफी ने बताया-
सालों से हमने पुलिस और सरकार के दरवाजे खटखटाए, लेकिन हम दीवार पर अपना सिर मार रहे थे. दविंदर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. दविंदर की सुरक्षा अब समाप्त हो गई है. अब उम्मीद है कि हमें कुछ न्याय मिल सकता है.
दविंदर सिंह को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 11 जनवरी को दो 'मोस्ट वांटेड' आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार किया था. दविंदर 1990 में सब इंस्पेक्टर के तौर पर पुलिस से जुड़े थे. वह पहले इंस्पेक्टर और फिर DSP बने. दविंदर 1994 में लॉन्च हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में शामिल हुए थे.
श्रीनगर में एक आर्मी बेस के नज़दीक घर बना रहे थे दविंदर. (फोटो: इंडिया टुडे)
श्रीनगर में एक आर्मी बेस के नज़दीक घर बना रहे थे दविंदर. (फोटो: इंडिया टुडे)

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बजाज़ के पिता ने कहा,
'बेटे को खोजते हुए मुझे देविंदर का पता चला. एक मध्यस्थ ने मुझसे पैसे का इंतज़ाम करने को कहा. उसने कहा कि हमें देविंदर सिंह को पेमेंट करना होगा. उन्होंने मुझसे 40,000 रुपये इंतजाम करने को कहा. मैंने पत्नी के गहने बेचकर उसे पैसे दिए. हफ्ते भर इंतज़ार करने के बाद खुद पुलिस स्टेशन से एक पुलिसवाला आया और मुझे बताया कि आपका बेटा बेमिना बायपास के नज़दीक एनकाउंटर में मारा गया.'
जम्मू और कश्मीर पुलिस ने उस वक्त  बयान जारी किया था कि बजाज़ पर '1996 में दो आईईडी विस्फोट का मास्टर माइंड' था. पुलिस के बयान को फर्जी मुठभेड़ के लिए कवर अप के रूप में खारिज़ कर दिया गया था, क्योंकि बॉडी को परिवार को सौंपने के तुरंत बाद विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया था.
बजाज़ की मौत के वक्त, दविंदर सिंह और उसके टास्क फोर्स कैंप ने अफज़ल गुरु को भी उठा लिया था. दिसंबर, 2001 में संसद पर हमले के तुरंत बाद अफज़ल को गिरफ्तार कर लिया गया. 2004 में, तिहाड़ जेल से अफज़ल ने अपने वकील सुशील कुमार को लिखा और आरोप लगाया कि देविंदर ने उसे संसद हमले के मामले में एक सह-आरोपी मोहम्मद को दिल्ली ले जाने के लिए कहा था. उसके लिए घर का इंतज़ाम किया था और उसे कार खरीद कर दी थी.
अफज़ल गुरु ने एक पुलिस अधिकारी, शांति सिंह का हवाला देते हुए कहा कि उसने दविंदर सिंह के साथ हुम्हामा एसटीएफ कैंप में टॉर्चर किया था.
2003 में क्राइम ब्रांच की जांच के बाद शांति सिंह को जेल हो गई थी. वह शोलीपोरा के एक नागरिक मोहम्मद अय्यूब डार को मारने में शामिल था. मारने के बाद भी उसके बॉडी पर गोलीबारी की थी. उसे मुठभेड़ में मारा गया आतंकवादी बताया.
2005 में, दविंदर सिंह फिर से विवादों में थे. उन्होंने दो पक्षों के बीच एक व्यापारिक सौदा स्थापित करने में मदद की थी. बाद में एक बिजनेसमैन से नकदी और एक जेसीबी मशीन छीन ली थी. श्रीनगर के सदर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई, और बाद में मामले की जांच क्राइम ब्रांच ने की. एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मामले में कुछ भी करने से बचने के लिए बहुत दबाव था. 2014 में बाढ़ के दौरान मामले के रिकॉर्ड नष्ट हो गए थे, और बाद में मामला बंद कर दिया गया.
फरवरी 2013 में जब अफज़ल गुरु को फांसी दी गई थी, तब दविंदर को ट्रैफिक पुलिस में शिफ्ट कर दिया गया था. 2018 में, जम्मू-कश्मीर पुलिस मुख्यालय ने क्राइम ब्रांच को कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा. इसके बाद देविंदर को वीरता मेडल से सम्मानित करने का रास्ता साफ हो गया. अब उनकी गिरफ्तारी के बाद मेडल वापस ले लिया गया है.
जम्मू और कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- यह असंभव सा है कि दविंदर की मदद और लोगों ने न की हो. वह आतंकियों को अपनी कार में दिल्ली क्यों ले जा रहा था? वह आतंकियों को अपने घर पर क्यों छिपाएगा? वह एक खुली लाइन पर संवाद क्यों कर रहा था, वह भी अपने फोन पर? बहुत सारे सवाल हैं, जिसके जवाब अभी नहीं हैं. नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है. उम्मीद है जल्द ही इन सवालों के जवाब मिल जाएंगे.


वीडियो- DSP दविंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की बात क्यों हो रही है?

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