भारत-पाकिस्तान के लड़कों ने AI टूल बनाया, अब दोनों को ₹25-25 हजार करोड़ मिलेंगे!
भारतीय मूल के 25 साल के अमन सांगर और पाकिस्तान के 26 साल के सुआलेह आसिफ अरबपति बन गए हैं. स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क ने उनकी कर्सर एआई वाली कंपनी को 60 अरब डॉलर में खरीद लिया है.

अरबपति बनने की सही उम्र क्या होती है? ‘जीरो’ से शुरू किया तो इसमें पूरी जिंदगी भी खप जाती है. लेकिन भारत और पाकिस्तान के दो लड़कों ने अपनी जवानी के दिनों में ही ये कारनामा कर दिखाया है.
एलन मस्क को तो सब जानते ही हैं. दुनिया के सबसे बड़े अमीरों में से एक हैं. जैसे हम-आप मोबाइल फोन खरीदते हैं. मस्क कंपनियां खरीदते हैं. हाल ही में उन्होंने प्रोग्रामर्स को कोड लिखने में मदद करने वाले AI टूल ‘कर्सर AI’ की पैरेंट कंपनी एनीस्फीयर को खरीद लिया. इस खरीदारी ने मस्क का जो भी फायदा कराया हो, लेकिन 25 और 26 साल के भारत और पाकिस्तान के दो लड़कों को करियर की शुरुआत में ही अरबपति जरूर बना दिया है.
हम बात कर रहे हैं एनीस्फीयर (Anysphere) कंपनी की सौदेबाजी के बारे में. ये वही कंपनी है, जिसने ‘कर्सर AI टूल’ बनाया है. ये टूल प्रोग्रामरों को कोड लिखने में मदद करता है. कंपनी दावा करती है कि दुनिया भर में लाखों सॉफ्टवेयर डेवलपर इस टूल का इस्तेमाल करते हैं. एनवीडिया, एडोब, उबर, शॉपिफाई और पेपाल भी इनमें से एक हैं. इस कंपनी को एलन मस्क ने 60 अरब डॉलर यानी साढ़े 5 लाख करोड़ से भी ज्यादा की कीमत पर खरीद लिया.
इस सौदे ने भारतीय मूल के अमन सांगर और पाकिस्तान के सुआलेह आसिफ को रातोरात अरबपति बना दिया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, एनीस्फीयर कंपनी में अमन और आसिफ दोनों में हर एक के पास 4.5 फीसदी की हिस्सेदारी है. इस डील से हरेक को 2.7 अरब डॉलर यानी तकरीबन 25ृ-25 हजार करोड़ रुपये की हिस्सेदारी मिलेगी.
इस सौदे ने इन युवाओं को एक झटके में दुनिया के सबसे अमीर युवाओं की लिस्ट में खड़ा कर दिया है. हालांकि, ये सौदा ‘ऑल स्टॉक डील’ है. यानी अमन और आसिफ को कैश में पैसा नहीं मिलेगा. उन्हें एलन मस्क के स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों में हिस्सेदारी मिलेगी.
कौन हैं अमन सांगर?अमन सांगर एनीस्फीयर को बनाने वाले लोगों में शामिल हैं. अमेरिका के न्यूयॉर्क में पैदा हुए, लेकिन जड़ें भारत में हैं. उनके पिता अरविंद सांगर ने आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई की है. उनकी मां शिल्पा सांगर दांतों की डॉक्टर (orthodontist) हैं. वह प्रथम USA नाम के एनजीओ की बोर्ड मेंबर भी हैं, जो भारत समेत अन्य विकासशील देशों में वंचित बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाने का काम करती है.
इंडिया टुडे ने ‘गोल्डन हाउस’ की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अमन की बचपन से कोडिंग में दिलचस्पी थी और ये काम उन्होंने 14 साल की उम्र से ही शुरू कर दिया था.
जब अमन MIT (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) में पढ़ रहे थे तब उनकी मुलाकात आसिफ, माइकल ट्रूएल और आर्विड लुनमार्क से हुई थी. इन चारों दोस्तों ने मिलकर ‘कर्सर AI’ टूल बनाया. सांगर को ट्रूएल के साथ नियो स्कॉलर्स के लिए भी चुना गया था. ये एक ऐसा प्रोग्राम है जो टैलेंटेड टेक इंजीनियरों को सिलिकॉन वैली के निवेशकों से जोड़ता है. सांगर ने कर्सर से पहले ब्रिजवाटर एसोसिएट्स, गूगल और ‘यू डॉटकॉम’ में इंटर्नशिप भी की थी. वह एक AI कंसल्टेंसी भी चला चुके हैं.
आसिफ कौन हैं?अब बात आसिफ की. वह एनीस्फीयर के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर हैं. पाकिस्तान के कराची के रहने वाले हैं. गणित विषय के मेधावी छात्र माने जाते थे. साल 2016 से लेकर 2018 तक इंटरनेशनल मैथ्य ओलंपियाड में वो लगातार अपने देश पाकिस्तान को रिप्रेजेंट करते रहे और कांस्य पदक भी जीता. स्कॉलरशिप पर उन्होंने एमआईटी में एंट्री ली. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, आसिफ ने कर्सर AI टूल बनाने से पहले तीन साल तक एमआईटी में रिसर्च असिस्टेंट के तौर पर भी काम किया है.
कैसे हुआ सौदा?रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2026 में SpaceX और Cursor के बीच साझेदारी हुई थी. स्पेसएक्स में अपनी कंप्यूटिंग पावर कर्सर AI को दी थी ताकि वो अपने AI मॉडल को ठीक तरीके से ट्रेन कर सके. उसी समय स्पेसएक्स ने ये विकल्प दिया था कि बाद में वो एनीस्फीयर को खरीद सकता है. सौदे से पहले Cursor की अनुमानित कीमत 29.5 अरब डॉलर बताई जा रही थी लेकिन अब मस्क ने इसे 60 अरब डॉलर में खरीद लिया है.
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