मकान फट रहे, सड़क अंदर घुसी...ये पूरा शहर डूबने वाला है!
उत्तराखंड की सरकारी एजेंसियां पहुंचीं, परिवार किए जा रहे शिफ्ट

उत्तराखंड के जोशीमठ में जगह-जगह पर जमीन धंसती जा रही है (Deep Cracks in Joshimath Uttarakhand). बड़ी बड़ी दरारें आ गई हैं जिससे पानी निकल रहा है. तस्वीरें डरावनी हैं. करीब 34 परिवारों को सेफ जगह पर शिफ्ट कर दिया गया है. पूरे जोशीमठ में हड़कंप मचा हुआ है. हजारों लोग सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. मामले पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वो एक टीम के साथ खुद वहां जाकर जायजा लेंगे.
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, जोशीमठ के मारवाड़ी क्षेत्र में मंगलवार, 4 दिसंबर की दोपहर के बाद से जमीन की दरारों से पानी निकल रहा है. जोशीमठ के तहसीलदार रवि शाह ने बताया-
जमीन से जो पानी वहां निकल रहा है वो किसी के सीवर लाइन के पानी लीकेज नहीं है. ये जमीन के अंदर से निकलने वाला पानी ही है.
प्रशासन ने जेपी कंपनी कॉलोनी के 35 घर खाली कराए हैं. खबर है कि एक दिन में ही जलस्तर दोगुना हो गया है. मकानों में दरारों की संख्या बढ़ गई है और कुछ मकानों के अंदर 2-3 फीट तक जमीन बैठ गई है. 4 दिसंबर की रात को जोशीमठ में बड़ी संख्या में लोगों ने मशाल जलाकर विरोध प्रदर्शन किया. जिला प्रशासन के मुताबिक, चमोली जिले के जोशीमठ कस्बे में 561 घरों में दरारें आ गई हैं. एहतियात के तौर पर दो होटलों को बंद कर दिया गया है.
जिला प्रशासन के मुताबिक, पवित्र बद्रीनाथ मंदिर से लगभग 50 किमी दूर स्थित सुरम्य शहर में 570 से अधिक घरों में दरारें आ गई हैं. 570 घरों में से 100 रहने लायक नहीं रहे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रशासन को स्थिति पर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है.
सीएम धामी ने कहा-
हमने जो रिपोर्ट मिली है, उसके अनुसार हम काम कर रहे हैं. सारे इंतजाम कर लिए गए हैं. इस संबंध में बैठक की गई. आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट पर है. सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
इससे पहले शनिवार को जोशीमठ के नगरपालिका अध्यक्ष शैलेंद्र पवार ने बताया था-
सर्दी के मौसम में जोशीमठ में भूस्खलन से मकान गिरने का खतरा बढ़ गया है. 9 वार्ड प्रभावित हुए हैं. टाउन क्षेत्र में 574 घर हैं, जिनमें 3,000 से अधिक लोगों को प्रभावित करने वाली बड़ी दरारें विकसित हुई हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, जोशीमठ समुद्र तल से करीब छह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है और सिस्मिक जोन 5 में आता है. यानी ये प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से काफी संवेदनशील है. यहां पिछले कुछ दिनों में भूधंसाव में काफी तेजी आई है. घरों के गिरने का खतरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है.
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