चार महीने प्रेग्नेंट हैं फिर भी रोज़े रखते हुए कोविड ड्यूटी कर रही हैं ये नर्स
वो मानती हैं कि रमज़ान के महीने में सेवा सबसे पावन काम है.
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किसी कल्पना की जरूरत नहीं, जब सिस्टर नेंसी आइजन जैसे इंसपायरिंग लोग हमारे बीच हों. फोटो - पीटीआई (रिप्रेज़ेंटेशन के लिए)
कोरोना. दुख, त्रासदी और आपदा का पर्यायवाची बन चुका है ये शब्द. यकीन नहीं होता कि पिछले साल हम इस शब्द पर मीम्स तक बना रहे थे. ‘गो कोरोना गो’ कह खूब हंसते थे. अब तो आलम ये है कि इस शब्द का लेशमात्र ज़िक्र भी किसी बुरी खबर का सूचक बन गया है. हालात ही ऐसे हैं. टीवी पर कोरोना से बिलखने वाले लोगों में हमें हमारे अपनों के चेहरे कब नज़र आने लगे, इसका आभास तक ना हुआ. लेकिन अवसाद चाहे कितना भी गहरा हो. प्रबल हो. उम्मीद की किरणें फूटेंगी जरूर. ऐसी ही एक उम्मीद भरी खबर आई है गुजरात से. वो भी एक कोरोना वॉरियर की. नाम है नेंसी आइजन. वो नर्स जो प्रेग्नेंट होने के बावजूद कोरोना मरीजों की सेवा में तत्पर हैं.सूरत के अलथान इलाके में स्थित सूरत महानगर पालिका के कम्यूनिटी हॉल में कोविड केयर सेंटर शुरू किया गया. फ़िलहाल इस कोविड सेंटर में करीब 105 कोरोना पॉज़िटिव लोगों का इलाज चल रहा है. मरीज इतने ज़्यादा हैं कि 24 घंटे यहां डॉक्टर्स और नर्स कार्यरत हैं. इन्हीं में से एक हैं सिस्टर नैंसी आइजन. चार महीने प्रेग्नेंट नर्स. जो इस कोविड सेंटर की शुरुआत से वहां ड्यूटी कर रही हैं. 29 वर्षीय नेंसी कोरोना से बिना डरे लगातार अपनी सेवाएं दे रही हैं. ऊपर से रोजे भी रख रही हैं. मानती हैं कि रमजान के पावन महीने में सेवा करने से अल्लाह नेकी प्रदान करेंगे.

ऑक्सीजन, दवाइयों की किल्लत के बीच देश में हाहाकार मचा हुआ है. ऐसे में सिस्टर नैंसी जैसे लोगों की कहानी ढांढ़स बंधाती है. फोटो - पीटीआई (रिप्रेज़ेंटेशन के लिए)
आजतक से बात करते हुए नेंसी ने बताया,
अभी मैं अटल संवेदना कोविड सेंटर में काम करती हूं. मैं गर्भवती हूं और गर्भ का चौथा महीना चल रहा है. खुद का भी ध्यान रखती हूं. बच्चे का भी ध्यान रखती हूं. रमजान के महीने में अगर ऐसे मरीजों की दुआ मिलेगी तो बहुत अच्छी बात है.प्रेग्नेंसी में नैंसी की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर पड़ रहा है. उनकी साथी नर्स ग्रीशमा सोलंकी के मुताबिक नैंसी को अभी संक्रमण होने का खतरा है. बावजूद इसके वो पूरी तरह अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित हैं. प्रेग्नेंसी की वजह से उन्हें पीपीई किट पहनने में दिक्कत आती है. इसलिए गाउन पहनकर काम करती हैं.
भूखे और गर्भवती रहते हुए इस तरह ड्यूटी करना उनकी सेहत पर क्या असर डालेगा, ये तो कोई डॉक्टर ही ठीक-ठीक बता सकते हैं. फ़िलहाल हम इतना कह सकते हैं कि इस कोरोना काल में किसी सुपरहीरो के आने की आकांक्षा मत कीजिए. हमारे हीरो हमारे आसपास हैं.

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