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क्या भारत ज़्यादा पैसे देकर ख़रीद रहा कोरोना वैक्सीन?

कांग्रेस का मोदी सरकार पर आरोप.

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17 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 17 जनवरी 2021, 11:41 AM IST)
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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार को जवाब देना चाहिए कि निशुल्क कोरोना वैक्सीन ‘किसे', ‘कैसे' और ‘कहां' मिलेगी?
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भारत में शनिवार 16 जनवरी से कोरोना वैक्सीनेशन की शुरुआत हो चुकी है. वहीं कांग्रेस ने वैक्सीन से जुड़े कई मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को घेरा है. कांग्रेस ने कोरोना वैक्सीन की कीमत को लेकर भी सरकार से सवाल पूछे हैं. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार को जवाब देना चाहिए कि निशुल्क कोरोना वैक्सीन ‘किसे', ‘कैसे' और ‘कहां' मिलेगी? सुरजेवाला ने कहा,
भारत के ड्रग कंट्रोलर वीजी सोमानी ने कहा कि मोदी सरकार ने कोरोना वैक्सीन की 16.5 मिलियन यानी 165 लाख टीके खरीदे हैं. जिनमें 55 लाख कोवैक्सीन एवं 1.1 करोड़ कोविशील्ड मंगाई हैं. हर व्यक्ति को 2 खुराक दिए जाने पर यह वैक्सीन 82.50 लाख स्वास्थ्यकर्मियों को ही दी जा सकेगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले राउंड में वैक्सीन तीन करोड़ लोगों को दी जाएगी. प्रधानमंत्री एवं मोदी सरकार इस बात का जवाब देने से कतरा रहे हैं कि भारत की अगर तीन करोड़ को भी मान लें तो 135 करोड़ नागरिकों को कोरोना वैक्सीन कैसे मिलेगी और क्या यह वैक्सीन उनके लिए मुफ्त होगी. 28 प्रतिशत लोग गरीब या गरीबी की श्रेणी में आते हैं.
सुरजेवाला ने आगे कहा,
कोविशील्ड' एस्ट्राजेनेका की ओर से विकसित वैक्सीन' है, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रही है. यह वैक्सीन भारत सरकार को 200 रुपये प्रति खुराक की दर से दी जा रही है. एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन बिना कोई मुनाफा कमाए देने का वादा किया है.
एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा,
बेल्जियम के मंत्री ऐवा डे ब्लीकर के अनुसार, उनके लिए एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की कीमत 1.78 यूरो (2.18 अमेरिकी डॉलर) यानी 158 रुपये है. सवाल ये है कि भारत सरकार सीरम इंस्टीट्यूट से वही टीका 200 में क्यों खरीद रही है.
सुरजेवाला ने कहा,
कोवैक्सीन जो दूसरा टीका है उसका उत्पादन भारत बायोटेक' द्वारा किया जा रहा है. कोवैक्सीन की एक खुराक 295 रुपये में दी जा रही है. भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से कोवैक्सीन बनाई गई है. ‘कोवैक्सीन' को अनुमति, पहले चरण में 375 प्रतिभागियों एवं दूसरे चरण में 380 प्रतिभागियों यानि कुल 755 लोगों पर टेस्टिंग की है. तीसरे चरण के परीक्षण अभी चल रहा है.
उन्होंने कहा,
सवाल यह है कि मोदी सरकार भारत बायोटेक की वैक्सीन के लिए 95 रुपये प्रति टीका ज्यादा क्यों दे रही है? जबकि इस वैक्सीन का अविष्कार भारत सरकार की एजेंसी और वैज्ञानिकों की जानकारी में हुआ है. तो इसके लिए मोदी सरकार ज्यादा पैसा क्यों दे रही है. जबकि इसका ट्रायल पूरा भी नहीं हुआ है.
सुरजेवाला ने कहा कि तीसरा पहलू. कोरोना के टीके का खुले बाजार में कीमत 1000 रुपए प्रति खुराक क्यों? 11 जनवरी 2021 को सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने साफ तौर से कहा कि वो एस्ट्राजेनेका की ‘कोविशील्ड वैक्सीन' खुले बाजार में 1000 रुपये प्रति खुराक में बेचेंगे. जब कोविशील्ड वैक्सीन भारत सरकार को 200 रुपए प्रति खुराक में दी जा रही है तो भारत के नागरिकों के लिए 500 प्रतिशत मुनाफा में क्यों बेची जाएगी? क्या इससे सीधा-सीधा लोगों की जेब पर डाका नहीं डलेगा? 200 रुपए की वैक्सीन 1000 रुपए में क्यों? क्या मोदी सरकार का कर्तव्य नहीं कि वह कोविशील्ड वैक्सीन 200 रुएप में खरीदकर जो भी लेना चाहे उसे 200 में उपलब्ध कराए. सूरजेवाला ने पूछा कि क्यों कोरोना की वैक्सीन राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची में नहीं रखी गई? क्या 1000 रुपए प्रति खुराक से बेचे जाने की अनुमति ली गई है? कोरोना वैक्सीन के निर्यात की अनुमति क्यों दी जा रही है? एक्सपोर्ट क्यों किया जा रहा है.

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