कोरोना: पूर्व PM देवगौड़ा के लेटर पर मोदी ने खुद फोन किया, मनमोहन का जवाब मंत्री से दिलवाया
दो पूर्व PM, मनमोहन सिंह और एचडी देवगौड़ा ने नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा था.

क्या है लेटर में? एचडी देवगौड़ा ने इस लेटर की शुरुआत में लिखा है कि देश में इस समय कोरोना वायरस की दूसरी लहर चल रही है. कब्रिस्तान और श्मशान के बाहर लंबी लाइनें लगी हैं. मैं इस बात को सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मैं आपके (पीएम मोदी) नेतृत्व में जान बचाने के लिए लिए गए सभी फैसलों के साथ खड़ा हूं. पूर्व पीएम देवगौड़ा ने लिखा कि जब कर्नाटक में मामले बढ़ रहे थे तो उन्होंने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को 21 अप्रैल को पत्र लिखकर सुझाव दिए थे. पीएम को लिखे लेटर में देवगौड़ा लिखा है कि मैं इस बात को लेकर भी निश्चिंत हूं कि आपको पहले ही इस मामले में कई सुझाव मिले होंगे और आप उन पर अमल कर रहे होंगे. देवगौड़ा ने अपने पत्र के जरिए पीएम मोदी को 16 सुझाव दिए. 1. स्वास्थ्य प्रशासन और कोविड प्रबंधन का विकेंद्रीकरण कर देना चाहिए. जिला प्रशासन को मदद के लिए छोटे कॉन्ट्रैक्ट पर मेडिकल प्रोफेशनल्स को नौकरी देने की जरूरत है, ताकि वे जिला लेवल पर जरूरतों के हिसाब से काम कर पाएं. 2. सभी जिला मुख्यालयों पर वॉर रूम बनाने की जरूरत है. राज्य की राजधानियों में वॉर रूप काफी नहीं हैं. प्राइवेट और गवर्मेंट सेक्टर में कोविड सेंटर और स्वास्थ्य केंद्रों को बढ़ाने की जरूरत है. 3. इस समय बड़े शहरों पर ही फोकस है, लेकिन जरूरत गैर-शहरी इलाकों, तालुकाओं और गांव में है. इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय को लगाया जाना चाहिए. 4.वैक्सीन को लेकर भ्रामक सूचनाओं को दूर करने की जरूरत है. खासकर दूसरी लहर में वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज लेने के बाद भी संक्रमण के मामले सामने आने से लोगों में भ्रम है. इसे दूर करने के लिए साइंटिस्टों और डॉक्टरों को लगाए जाने की जरूरत है. 5. एक डेडलाइन तय किए जाने की जरूरत है कि लोगों को कब तक वैक्सीन लग जाएगी. चुने हुए जनप्रतिनिधियों को ये बात सुनिश्चित करने की जरूरत है कि उनकी विधानसभा में पर्याप्त वैक्सीन है या नहीं? 6. देश के गरीब तबके को ध्यान में रखकर ही वैक्सीन की कीमत तय की जानी चाहिए. सभी नागरिकों को मुफ्त में वैक्सीन लगाई जाए, ये अच्छा मानवीय संकेत होगा. 7. टीका लगवाने आ रहे गरीब लोगों को आईडी कार्ड जैसी बाधाओं से मुक्त करना होगा. इंटरनेट ना होना और सरकारी वेबसाइट का ज्ञान ना होना, उनके वैक्सीनेशन पर असर डाल सकता है. 8. 12-15 साल के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन ट्रायल होना चाहिए. ताकि जब स्कूल शुरू हों, तो वो क्लास अटेंड कर सकें. 9. निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी स्वास्थ्य बीमा देना चाहिए. छोटे नर्सिंग होम और गैर शहरी इलाकों में क्लीनिक में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को भी इसकी जरूरत है. 10. सरकारी क्षेत्र में काम कर रहीं गर्भवती महिलाओं को तीन महीने की छुट्टी वो भी सैलरी के साथ दिए जाने की जरूरत है. 11. NEET पोस्ट ग्रेजुएट एग्जाम में उन डॉक्टर्स को ग्रेस मार्क दिए जाने की जरूरत है, जिनकी ड्यूटी कोविड हॉस्पिटल में लगी है. क्योंकि ड्यूटी की वजह से इनमें से अधिकतर लोग अपनी पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं. 12. जिस कोरोना योद्धा ने इस जंग में अपनी जान गंवाई है, उनके परिवार में किसी एक को सरकारी नौकरी देनी चाहिए. 13. राज्य सरकारों को एक दूसरे की मदद के लिए इनफॉर्मल कम्युनिकेशन नेटवर्क बनाने की जरूरत है. हर राज्य में एक मंत्री को दूसरे राज्यों की हेल्प करने के लिए रखा जाना चाहिए. इस काम में विपक्ष के नेताओं को भी लगाया जा सकता है, जिन्हें प्रशासनिक अनुभव है. यह एक राष्ट्रीय विपदा है और हमें इससे एक राष्ट्र के रूप में लड़ना है. 14. अगले 6 महीने के लिए बड़ी सामूहिक गतिविधियों पर रोक लगाने की जरूरत है. यह काम तुरंत किया जाना चाहिए. इसके साथ ही अगले 6 महीने तक राज्यों में होने वाले उपचुनाव और स्थानीय चुनाव पर रोक लगाई जानी चाहिए. 15. केंद्र सरकार को नॉर्थ इंडिया और साउथ इंडिया में वैक्सीनेशन प्रोड्क्शन सेंटर बनाना चाहिए. 16. लॉन्ग टर्म पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने की जरूरत है. इसे तुरंत शुरू कर दिया जाना चाहिए. हमारे रिसोर्सेज के एक बड़े हिस्से को पब्लिक हेल्थ के लिए लगा देना चाहिए. हमें इस दिशा में प्रण लेने की जरूरत है. इस लेटर के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा से फोन पर बात की. इसकी जानकारी देवगौड़ा ने खुद ट्वीट कर दी. उन्होंने लिखा,I wrote a letter to Hon'ble PM Shri Narendra Modi ji yesterday offering a few suggestions to tackle the pandemic. This is a national crisis and we need to fight it as one nation. We should support all constructive measures taken to save lives and reduce suffering.@PMOIndia pic.twitter.com/jHEZFZLalP
— H D Devegowda (@H_D_Devegowda) April 26, 2021
पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ मिनट पहले मुझसे बात की. यह बताने के लिए कि उन्होंने कोविड पर मेरे लेटर को ध्यान से पढ़ा है. उन्होंने मुझे यह भी आश्वासन दिया कि वह मेरे सुझावों को आगे बढ़ाएंगे. मैं उनकी चिंता और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद देता हूं. हमें महामारी को हराने के लिए एक साथ काम करने की जरूरत है.
मनमोहन सिंह ने भी लिखा था लेटर इससे पहले 18 अप्रैल को पूर्व पीएम डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा था. इसमें उन्होंने पांच बातों पर फोकस किया था. 1. मनमोहन सिंह ने लिखा था कि अगर हमें 6 महीनों के दौरान किसी निश्चित जनसंख्या को वैक्सीन लगानी है, तो इसके लिए हमें एडवांस में ऑर्डर देने चाहिए, ताकि वैक्सीन सप्लाई होने में परेशानी न आए. 2. सरकार को यह बताना चाहिए कि ये सब कैसे किया जाएगा और सभी राज्यों में वैक्सीन किस हिसाब से बांटी जाएगी. 3. राज्यों को फ्रंटलाइन वर्कर्स तय करने में थोड़ी सहूलियत देनी चाहिए, ताकि 45 से कम उम्र के लोगों को भी वैक्सीन लगाई जा सके. 4. इस इमरजेंसी के हालत में सरकार को वैक्सीन प्रोड्यूसर्स को प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए सहूलियतें और रियायतें देनी चाहिए. 5. स्वदेशी वैक्सीन की सप्लाई सीमित है. ऐसे में यूरोपियन मेडिकल एजेंसी और USFDA जैसी विश्वसनीय एजेंसियों ने जिन वैक्सीन को अप्रूवल दिया है, उन्हें घरेलू ट्रायल जैसी शर्त के बिना मंगवाया जाए.Hon’ble PM @narendramodi avaru spoke to me a few mins ago to tell me that he had read my letter on Covid carefully. He also assured me that he will take forward my suggestions. I thank him for his concern & quick response.We need to work together to defeat the pandemic.@PMOIndia
— H D Devegowda (@H_D_Devegowda) April 26, 2021
पूर्व पीएम के इस लेटर का जवाब स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने दे दिया था. हर्षवर्धन ने अपने जिस ट्वीट में मनमोहन सिंह की चिट्ठी का जवाब दिया, उसकी शुरुआत उन्होंने 2014 में मनमोहन सिंह द्वारा कहे गए शब्दों से ही करते हुए उनपर तंज कसा. बता दें कि 2014 में मनमोहन सिंह ने अपनी सरकार के ऊपर लगे तमाम आरोपों पर कहा था,Key to our fight against Covid19 must be ramping up vaccination effort. We must resist temptation to look at absolute numbers being vaccinated, focus instead on percentage of population vaccinated: Former PM Dr. Manmohan Singh writes to PM Modi on ramping up vaccination programme pic.twitter.com/ZD5SbQOE0u
— Congress (@INCIndia) April 18, 2021
“इतिहास हमारे प्रति दयालु होगा (History will be kinder to me)”
19 अप्रैल को डॉ. हर्षवर्धन ने अपने ट्वीट में लिखा था,History shall be kinder to you Dr Manmohan Singh ji if your offer of ‘constructive cooperation’ and valuable advice was followed by your @INCIndia leaders as well in such extraordinary times !
Here’s my reply to your letter to Hon’ble PM Sh @narendramodi ji 👍 @PMOIndia pic.twitter.com/IJcz3aL2mo — Dr Harsh Vardhan (@drharshvardhan) April 19, 2021
‘यदि आपके सकारात्मक और मूल्यवान सुझावों का पालन आपके पार्टीजन भी करें तो इतिहास आपके प्रति दयालु होगा…माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को लिखे आपके पत्र का जवाब यहां दिया गया है…’हर्षवर्धन ने लिखा था कि आपने कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर चिंता जताई है, लेकिन आपकी कांग्रेस पार्टी में टॉप लेवल पर बैठे लोग ऐसा नहीं मानते हैं. अभी तक कांग्रेस के बड़े नेताओं ने, न तो हमारे वैज्ञानिकों और न ही दवा कंपनियों की तारीफ की. डॉ हर्षवर्धन के इस लेटर में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया था उसकी आलोचना भी हुई थी. इस मामले को कैसे देख जाना चाहिए? कोरोना की चुनौतियों से निपटने के लिए दो पूर्व प्रधानमंत्री आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखते हैं लेकिन उनका रिस्पॉन्स अलग-अलग होता है. इसे किस रूप में देखा जाना चाहिए? इंडिया टुडे के सीनियर जर्नलिस्ट राहुल श्रीवास्तव का कहना है कि मनमोहन सिंह और कांग्रेस से मोदी सरकार को प्रॉब्लम तो है. मनमोहन सिंह ने जब भी बोला है तो सरकार परेशानी में आ जाती है. मनमोहन सिंह नोटबंदी को संगठित लूट और कानूनी डाका बता चुके हैं. मोदी की पूरी पॉलिटिक्स मनमोहन सिंह की नीतियों के खिलाफ है. वहीं देवगौड़ा के साथ ये है, कि वो बहुत बड़े प्लेयर नहीं हैं. ये रिएक्शन ये दिखाने के लिए भी हुआ है कि मोदी उतने खराब नहीं हैं, जितने लोग कह रहे हैं. मनमोहन सिंह वाले मामले के बाद सरकार की आलोचना हुई थी, लेकिन पीएम ने देवगौड़ा को फोन कर बैलेंस कर लिया.

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