14 साल की बच्ची मरने के बाद अपने आप को फ्रीजर में बंद करवा गई
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फोटो - thelallantop
छुटपन में आइसक्रीम जमाने के लिए दूध में चीनी घोलकर कटोरे को फ्रीजर में चिपका डालते थे. फिर हर 20 मिनट बाद जाकर देखते कि दूध जमकर टाइट हुआ या नहीं. ब्रिटेन में एक 14 साल की बच्ची है. सॉरी, है नहीं, थी. कैंसर से उसकी मौत हो गई है. उसने अपने शरीर को फ्रीजर में रखवाने के लिए कोर्ट से परमिशन ले ली थी. एक हम थे, दूध को जमाते थे और ये बच्ची अपने-आप को जमाने के लिए बोल कर गई है. ऐसा उसने क्यों किया ये जानकर हैरान रह जाएंगे.
उसका मानना था कि मेडिकल साइंस के जरिए फ्यूचर में वो ठीक हो सकती है. उसके लिए चाहे सौ साल भी क्यों न लग जाए. इंसान के शरीर को जमाने के प्रोसेस को क्रायोनिक्स कहते हैं, जिसमें शरीर को फ्रीज कर लिया जाता है. इससे फ्यूचर में मेडिकल साइंस की हेल्प से शरीर को जिंदा करने की उम्मीद रहती है.
अब इससे पहले कि आप इस बात पर दिमाग लगाना शुरू करें, जरा सोचिए. एक बच्ची, जिसकी उम्र महज 14 साल है. उसके अंदर जिंदा रहने, जिंदगी देखने की कितनी प्रबल इच्छा है कि वो अपने शरीर को फ्रीज करवा रही है. एक 14 साल की बच्ची ने इतना कुछ सर्च किया, पढ़ा और आखिर में इतना बड़ा फैसला ले लिया. हम साइंस पर क्यों शक करें. उम्मीद और कल्पना तो इंसान की है न. कुछ भी सोच सकता है. अच्छा है.
बच्ची का नाम किन्हीं कानूनी कारणों के चलते लिखा नहीं गया है. मरने से पहले उसने जो चिठ्ठी जज को लिखी थी, उसमें लिखा था,
'मैं सिर्फ 14 साल की हूं और मैं मरना नहीं चाहती, लेकिन मैं जानती हूं कि मैं मरने वाली हूं. मुझे लगता है कि क्रायो प्रॉसेस मुझे ठीक होने और वापस उठने का एक और मौका दे सकती है, फिर उसमें 100 साल का समय ही क्यों न लग जाए.'बच्ची ने अपनी मां को अधिकार दिया है कि आगे चलकर अगर वो चाहें तो उसके शरीर का अंतिम संस्कार कर सकती हैं. बिटिया के फैसले को उसकी मां ने सपोर्ट किया है. बच्ची के पेरेंट्स डिवॉर्स के बाद अलग रहते हैं. शुरुआत में बाप ने अड़ंगा लगाने की कशिश की थी, लेकिन बाद में वो भी मान गए थे. जज पीटर जैक्सन का कहना है कि ये अपने-आप में एक अनोखी रिक्वेस्ट है, जो इस देश में तो क्या, दुनिया में पहले कभी भी नहीं दिया गया होगा. जैक्सन ने कहा, 'साइंस जिस तरह कानून के सामने नए-नए सवाल खड़ा करता है, ये उसी की एक मिसाल है.'

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