कोरोना महामारी में अपनी सेवा देने के लिए ये डॉक्टर मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र पहुंच गई, स्कूटी पर!
छुट्टी पर अपने घर आई हुई थीं डॉ. प्रज्ञा घरड़े.
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डॉ. प्रज्ञा ने जो किया, बस ऐसी ही बातें मिसाल बन जाती हैं. फोटो - आजतक
डॉ. प्रज्ञा घरड़े. शायद ये नाम सुनकर आपके दिमाग में कुछ हिट ना करे. ऑर्डनेरी सा लगे. लेकिन इसी ऑर्डनेरी नाम ने एक एक्स्ट्रा ऑर्डनेरी काम किया है. कोरोना वायरस संकट में अपनी सेवा देने के लिए डॉ. प्रज्ञा घरड़े स्कूटी पर सवार होकर मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र पहुंच गईं. उनके बारे में जानने के बाद लोग उनकी सेवा भावना और समर्पण की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
छुट्टी छोड़कर अस्पताल पहुंचीं
मध्य प्रदेश के बालाघाट की रहने वाली डॉ. प्रज्ञा महाराष्ट्र के नागपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में कार्यरत हैं. अस्पताल के कोविड केयर सेंटर में अपनी सेवाएं देती हैं. इन दिनों छुट्टियों पर अपने घर आई हुई थीं. इसी बीच कोरोना वायरस (Coronavirus) से जुड़े मामले बढ़ने लगे. देखते ही देखते रोज़ाना दर्ज होने वाले मामलों का आंकड़ा लाखों में पहुंच गया. ऐसे में छुट्टी के बीच ही डॉ. प्रज्ञा को हॉस्पिटल में रिपोर्ट करने का ऑर्डर मिला. लेकिन एक समस्या थी. लॉकडाउन के चलते नागपुर जाने के तमाम साधन ठप्प पड़े थे. फिर भी हालात की गंभीरता को समझते हुए डॉ. प्रज्ञा ने वक्त बर्बाद नहीं किया. अपनी स्कूटी निकाली और निकल पड़ीं नागपुर के लिए.बालाघाट से नागपुर का सफर कोई छोटा नहीं. डॉ. प्रज्ञा के घरवालों ने इस पर आपत्ति जताई. कहा कि इतना लंबा सफर अकेले कैसे तय करोगी. लेकिन बेटी की इच्छाशक्ति देखकर घरवालों को भी अपनी सहमति देनी ही पड़ी. 19 अप्रैल की सुबह निकलीं डॉ. प्रज्ञा उसी दोपहर नागपुर पहुंच गईं. यहां तक कि पहुंचने के थोड़ी देर बाद ही उन्होंने ड्यूटी भी जॉइन कर ली.

कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से छुट्टी के बीच से ही डॉ. प्रज्ञा को वापस बुला लिया गया. फोटो - इंडिया टूडे फाइल (रिप्रेज़ेन्टेशन के लिए )
आजतक से बात करते हुए डॉ. प्रज्ञा ने बताया कि वो नागपुर में डेली 6 घंटे एक कोविड हॉस्पिटल में ड्यूटी करती हैं. वहां वो आरएमओ के पद पर कार्यरत हैं. इसके साथ ही वो शाम की शिफ्ट में एक और हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं देती हैं. इसकी वजह से उन्हें रोज लगभग 12 घंटे पीपीई किट पहनकर काम करना पड़ता है.
प्रज्ञा ने आगे बताया कि वो अपने घर आईं थीं. इस दौरान लॉकडाउन लग जाने की वजह से नागपुर लौटने का कोई साधन नहीं मिला. लेकिन जब उन्हें मालूम हुआ कि कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, तो वो अपनी स्कूटी लेकर ही नागपुर के लिए रवाना हो गईं.
180 किलोमीटर. लगभग इतना ही फासला है बालाघाट और नागपुर के बीच. 7 घंटे लगे डॉ. प्रज्ञा को ये रास्ता कवर करने में. उन्होंने बताया कि धूप और गर्मी की वजह से दिक्कत भी हुई. उनके पास सामान भी ज़्यादा था. ऊपर से रास्ते में कुछ खाने-पीने को भी नहीं मिला. लेकिन उन्हें इस बात की संतुष्टि है कि वो दोबारा अपने काम पर लौट आईं.

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