सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की वैक्सीन को मिली मंजूरी
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दो वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति दी.
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देश में दो वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है. फोटो- आजतक
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DCGI यानी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दो वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के निदेशक वीजी सोमानी ने कहा कि Central Drugs Standard Control Organisation की subject expert committee ने एक जनवरी को कोविशील्ड और दो जनवरी को कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति देने की सिफारिश की थी. इस कमेटी में डॉक्टर और वैज्ञानिक शामिल थे.
DCGI के फैसले के बाद अब देश की जनता को ये टीके लगाए जा सकेंगे. DCGI के निदेशक वीजी सोमानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दोनों वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित हैं और इनका इस्तेमाल इमरजेंसी की स्थिति में किया जा सकेगा.
https://twitter.com/ANI/status/1345603416727244807
जानकारी के मुताबिक इंजेक्शन के रूप में दो डोज मरीजों को दी जाएगी. इन वैक्सीन को 2 डिग्री से लेकर 8 डिग्री तक के तापमान में सुरक्षित रखा जा सकेगा. अब सरकार और कंपनियों के बीच एक करार साइन होगा जिसके बाद केंद्र सरकार वैक्सीन खरीद कर राज्य सरकारों तक पहुंचाएगी.
गौरतलब है कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की अनुमति के बाद ही किसी दवा का सार्वजनिक इस्तेमाल हो सकता है. अनुमति देने से पहले DCGI कई पैमानों पर उस दवाई को आंकता है और संतुष्ट होने के बाद ही दवा के इस्तेमाल की इजाजत देता है.
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के निदेशक वीजी सोमानी ने कहा कि हम कभी भी ऐसा कुछ अप्रूव नहीं करेंगे जिस पर हमें सुरक्षा संबंधी चिंता हो. टीके 110% सुरक्षित हैं. बुखार, दर्द और एलर्जी जैसे कुछ दुष्प्रभाव हर टीके के लिए आम हैं. यह (कि लोग नपुंसक हो सकते हैं) पूरी तरह बकवास है.
https://twitter.com/ANI/status/1345612111762735104
वैक्सीन को अनुमति मिलने के बाद पीएम मोदी ने तीन ट्वीट किए.
"वैश्विक महामारी के खिलाफ भारत की जंग में एक निर्णायक क्षण! सीरम इंडिया और भारत बायोटेक की वैक्सीन को DCGI की मंजूरी से एक स्वस्थ और कोविड मुक्त भारत की मुहिम को बल मिलेगा. इस मुहिम में जी-जान से जुटे वैज्ञानिकों-इनोवेटर्स को शुभकामनाएं और देशवासियों को बधाई." "यह गर्व की बात है कि जिन दो वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है, वे दोनों मेड इन इंडिया हैं. यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के लिए हमारे वैज्ञानिक समुदाय की इच्छाशक्ति को दर्शाता है. वह आत्मनिर्भर भारत, जिसका आधार है- सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया."इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया. उसमें पीएम मोदी ने लिखा,
"विपरीत परिस्थितियों में असाधारण सेवा भाव के लिए हम डॉक्टरों, मेडिकल प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों, पुलिसकर्मियों, सफाईकर्मियों और सभी कोरोना वॉरियर्स के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं. देशवासियों का जीवन बचाने के लिए हम सदा उनके आभारी रहेंगे."कोविशील्ड वैक्सीन डेवलप भले विदेश में हुई हो, लेकिन इसका प्रोडक्शन भारत में ही हो रहा है. पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) में वैक्सीन की डोज़ तैयार की जा रही हैं. SII के CEO आदर पूनावाला ने बताया था कि फिलहाल SII में पांच हज़ार कोविड डोज़ पर मिनट तैयार की जा रही हैं. उनका दावा है कि फरवरी तक ये रफ्तार दोगुनी हो जाएगी. वैक्सीन की एक शीशी में 10 डोज़ होती हैं. एक आदमी को दो डोज़ की ज़रूरत होती है. इस हिसाब से एक शीशी से पांच लोगों को वैक्सीनेट किया जा सकता है. लेकिन शीशी खुलने के बाद चार से पांच 4-5 घंटे में ही इस्तेमाल कर लेना होता है. क्योंकि एक बार खुलने के ब 4-5 घंटे में वैक्सीन ख़राब हो सकती है. भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के फेज़-2 क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे 23 दिसंबर को सामने आए थे. ये ट्रायल 380 बच्चों और व्यस्कों पर किए गए थे. इस दौरान उन्हें चार हफ्तों के अंतर पर दो डोज दी गई थीं. रिसर्स में पाया गया कि वैकसीन ने एंटीबॉडी बनाई. तीन महीने बाद भी एंटीबॉडी का स्तर अच्छा था. कंपनी का दावा है कि वैक्सीन शरीर में जो एंटीबॉडी बनाती है उसका असर छह से 12 महीने तक रहता है.

