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वैक्सीन लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन तो करा लिया, लेकिन स्लॉट कब और कैसे मिलेगा?

पहले दिन वैक्सीन के लिए 1.3 करोड़ लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया.

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एक मई से देश में 18 से अधिक की उम्र वालों को वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगा. इसके लिए Co-Win Portal पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. (फोटो: PTI)
एक मई से देश में 18 से अधिक की उम्र वालों को वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगा. 29 अप्रैल को सुबह 11 बजे तक Co-Win Portal पर 18 प्लस वाले 1.7 करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं.अब चैलेंज वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट उपलब्ध कराना है. (फोटो: PTI)
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अमित
29 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 29 अप्रैल 2021, 02:01 AM IST)
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देशभर में कोरोना (corona) के बढ़ते मामलों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन (vaccination) का दायरा 18 साल के ऊपर सभी लोगों के लिए बढ़ा दिया. 1 मई से वैक्सीनेशन का प्लान है. वहीं 28 अप्रैल से कोविन ऐप (CoWIN app) पर रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है. 29 अप्रैल की सुबह 11 बजे तक 18 से 44 साल तक के 1.7 करोड़ लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया. अब सवाल ये है कि क्या इन सबको वैक्सीनेशन का स्लॉट मिल जाएगा? अगर नहीं तो कब तक नंबर आएगा? ऑनलाइन पोर्टल पर स्लॉट की उपलब्धता कैसी है? जानते हैं ऐसे ही कुछ जरूरी सवालों के जवाब. इससे पहले कितने रजिस्ट्रेशन हुए? वैक्सीनेशन की शुरुआत होने से अब तक 14.80 करोड़ लोगों ने Co-WIN पर रजिस्ट्रेशन कराया है. इसमें से सिर्फ 2.91 करोड़ लोग ही ऐसे हैं जिन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया. बाकी के 9.33 करोड़ लोगों ने सीधे वैक्सीन सेंटर जाकर टीका लगवाने से पहले रजिस्ट्रेशन करवाया. इसके अलावा 2.55 करोड़ रिजस्ट्रेशन हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स ने कराए. जहां तक बात वैक्सीन दिए जाने की है तो प्रति राज्य को उपलब्ध कराई गई वैक्सीन की राशनिंग के हिसाब से एक दिन में अमूमन 25 से 30 लाख लोगों का वैक्सीनेशन संभव हो पा रहा है. इस चरण में पहले ही दिन 1.3 करोड़ से ज्यादा लोगों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना दिखाता है कि टास्क काफी बड़ा है. 18 साल से 44 साल तक के कितने लोगों को वैक्सीन देने का टास्क है?
देश में लगभग 59 करोड़ 46 लाख लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 18 से 44 साल के बीच की है. AIIMS के एक डॉक्टर के मुताबिक इस कैटेगिरी का वैक्सीनेशन करना भी एक बड़ी चुनौती होगा. देश में जिस तरह के मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है उससे लोगों में भय है. ऐसे में संभावना है कि भारी संख्या में लोग वैक्सीनेशन के लिए उमड़ेंगे.
रजिस्ट्रेशन हो गया, वैक्सीनेशन का नंबर कब आएगा?
ये बड़ा सवाल है. इसे लेकर ही राज्य सरकारें जूझ रही हैं. फिलहाल एक बात तो साफ है कि बड़े राज्यों में 1 मई से वैक्सीनेशन हो पाना लगभग नामुमकिन हो चुका है. ज्यादातर राज्य तीसरे चरण के लिए वैक्सीन की कमी का रोना रो रहे हैं. ज्यादातर जगहों पर 18 से 44 साल के लोगों के लिए वैक्सीनेशन के ऑनलाइन स्लॉट्स उपलब्ध नहीं हैं. द इंडियन एक्सप्रेस अखबार की खबर के मुताबिक देश में दिल्ली, छत्तीसगढ़, वेस्ट बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, असम और गुजरात जैसे राज्यों में 45 साल से कम वालों के लिए वैक्सीन के स्लॉट उपलब्ध नहीं हैं.
क्या हुआ जब हमने स्लॉट बुक करने की कोशिश की?
18 से 44 साल के बीच की कैटेगिरी के तौर पर हमने कोविन की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन किया. दिल्ली के बाशिंदे के तौर पर मैंने अपने इलाके का पिन कोड डाल कर आसपास के वैक्सीनेशन सेंटर में स्लॉट बुक करने की कोशिश की. हमें 10 मई तक किसी भी सेंटर पर स्लॉट नजर नहीं आए. 10 मई के बाद भी जो स्लॉट दिखे उनमें साफ लिखा था कि सिर्फ 45 साल से ऊपर वाले ही उन सेंटरों पर जा सकते हैं. फिर हमने आरोग्य सेतु ऐप के जरिए स्लॉट बुक करे की कोशिश की. इसमें 1 मई से लेकर पूरे महीने फ्री या पेड के ऑप्शन के साथ No Vaccination centers Found यानी कोई वैक्सीनेशन सेंटर उपलब्ध नहीं है दिखा रहा है. इसके बाद हमने मुंबई, लखनऊ और कोलकाता के पिन कोड डाल कर वहां पर स्लॉट बुक करने की कोशिश की. इसमें भी अगले एक महीने तक कोई भी स्लॉट उपलब्ध नहीं है. बता दें कि इससे आगे के स्लॉट बुक कराने का ऑप्शन उपलब्ध नहीं है.
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ये तस्वीर 27 अप्रैल क दिल्ली के खास इलाके में वैक्सीन के उपलब्धता दिखा रहा है. फिलहाल 1 मई से आगे के स्लॉट भरे दिख रहा है. (फोटो-कोविन वेबसाइट)


केंद्र सरकार का स्लॉट को लेकर क्या कहना है?
किसी अधिकारी ने तो इस पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन आरोग्य सेतु ऐप और माई गॉव जैसी सरकारी वेबसाइट के ट्विटर हैंडल पर इसे लेकर जानकारी उपलब्ध है. अरोग्य सेतु ऐप के अनुसार
18 साल से ऊपर वालों को वैक्सीनेशन के स्लॉट तब मिलेंगे जब राज्य सरकार और प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर वैक्सीनेशन शुरू करेंगे. रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है.

 


ऐसा ही कुछ My Gov का भी कहना है
18 साल से 44 साल तक के लोगों को वैक्सीन मिलना इस बात पर निर्भर है कि प्राइवेट वैक्सीन सेंटर और राज्य सरकारें कितने सेंटर उपलब्ध करती हैं.
पहली डोज़ लगवा ली तो दूसरी डोज़ के लिए भी जूझना पड़ेगा? इस सवाल का जवाब नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के CEO और CoWIN एम्पावर्ड कमिटी के चेयरपर्सन आर एस शर्मा ने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू में दिया. उनके अनुसार
अगर किसी को पहली डोज़ लिए चार सप्ताह हो गए हैं और उसने अगली डोज़ के लिए अपॉइंटमेंट नहीं कराया है तो हम उन्हें मेसेज के जरिए सूचित करेंगे. उन्हें वैक्सीनेशन के दूसरे डोज़ के लिए अपॉइंटमेंट लेने को कहेंगे. अगर अपॉइंटमेंट लेने के बाद भी वैक्सीन लगवाने नहीं पहुंचे तो हम उन्हें मेसेज के जरिए बताएंगे कि वह वैक्सीन लगवा लें. हम लगातार उन्हें बताते रहेंगे कि अभी सेकेंड डोज़ का वैक्सीनेशन नहीं कराया है. जब तक कोई सेकेंड डोज़ नहीं लगवाता हम उन्हें मेसेज भेजते रहेंगे. ऐसा सिस्टम हमारे सॉफ्टवेयर में है.
पहली डोज जहां से लगवाई दूसरी भी उसी सेंटर से लगवानी होगी? पहली और दूसरी डोज़ अलग-अलग सेंटरों से लगावाई जा सकती है. बस आप वैक्सीन का ब्रैंड नहीं बदल सकते. मतलब अगर पहला डोज़ कोविशील्ड का लगवाया है तो दूसरा डोज़ भी कोविशील्ड ही लगवाना है. पोर्टल पर इसके लिए भी व्यवस्था की गई है. अगर किसी ने कोविशील्ड की पहली डोज़ ली है और वह दूसरी डोज़ के लिए अपॉइंटमेंट लेने जा रहा है तो उन्हें उन सेंटरों की लिस्ट ही दिखेगी जहां पर कोविशील्ड उपलब्ध है. इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर शख्स एक ही वैक्सीन की दोनों डोज़ ले. पता कैसे चलेगा कि मेरे आसपास के सेंटर पर स्लॉट उपलब्ध है? एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक जिन अस्पतालों में अभी वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट उपलब्ध नहीं हैं वहां पर वैक्सीन पहुंचने के बाद स्लॉट अपडेट हो जाएंगे. सरकार प्राइवेट प्लेयर्स के साथ भी API ( Application Programming Interface) शेयर करने की तैयारी कर रही है. इससे कोई भी टेक कंपनी वैक्सीनेशन को लेकर अपडेट भेज सकेगी. ये वैसा ही होगा जैसे आप रेलवे की वेबसाइट के इतर भी वेबसाइटों पर ट्रेन के टाइम टेबल और सीटों की उपलब्धता की जानकारी ले सकते हैं. जल्द ही ऐसी वेबसाइट्स और ऐप दिखेंगे जिन पर भले ही वैक्सीन के लिए अपॉइंटमेंट न लिए जा सकें, लेकिन वैक्सीन की उपलब्धता का पता चल सकता है. इन पर मेसेज के जरिए अलर्ट भेजने की सुविधा भी होगी. फिलहाल यह सुविधा कोविन पर उपलब्ध नहीं है ऐसे में 1-2 दिन में आसपास के इलाके के हॉस्पिटल में स्लॉट चेक करते रहना ही एक मात्र विकल्प है.

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