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साईं बाबा के गुज़रने के 102 साल बाद उनके जन्मस्थान को लेकर बवाल क्यों मचा है?

महाराष्ट्र सरकार ने शिरडी नहीं, पाथरी को साईं का जन्मस्थान माना है.

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20 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 20 जनवरी 2020, 02:02 PM IST)
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19 जनवरी को शिरडी बंद के बीच भी मंदिर खुला रहा। एनसीपी नेता छगन भुजबल दर्शन करने भी पहुंचे। (फोटो- ANI)
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जानकार बताते हैं कि साईंबाबा का जन्म 1838 में हुआ था. मृत्यु हुई 1918 में. यानी उन्हें इस दुनिया से गए 102 साल बीत चुके हैं. अब इतने साल बाद इस बात को लेकर बवाल हो रहा है कि उनका जन्म कहां हुआ था. विवाद शुरू हुआ महाराष्ट्र सरकार के एक फैसले से. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 17 जनवरी को घोषणा की कि राज्य के परभणी जिले का पाथरी गांव साईंबाबा की जन्मस्थली है. सरकार ने गांव के विकास और इसे टूरिज्म के लिहाज से विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा भी कर दी. घोषणा होते ही शिरडी के साईं भक्त नाराज़ हो गए. उनका भी दावा रहा है कि साईं बाबा का जन्म शिरडी में हुआ था. बस यहीं से विवाद शुरू हुआ. उद्धव की अपील के बाद बंद वापस लिया गया शिरडी के आस-पास के 25 गांव महाराष्ट्र सरकार के फैसले के विरोध में हैं. ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान कर दिया. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपील की, तो बंद तो वापस ले लिया गया, लेकिन शिरडी इस फैसले से सहमत नहीं है. पाथरी के नेता बोले- हमारे पास 29 सबूत पाथरी के एनसीपी नेता बाबाजनी दुर्रानी ने सरकार के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, ‘सरकार के फैसले के बाद अब इसमें कोई शक नहीं है कि साईं बाबा का जन्म पाथरी में ही हुआ था. इस बात को साबित करने के लिए हमारे पास 29 सबूत हैं.’ शिरडी के शिवसेना नेता कमलाकर कोटे ने जवाब दिया कि उनके पास दुर्रानी से ‘एक सबूत ज्यादा है.’ 2018 में राष्ट्रपति की बात पर भी विवाद हुआ था राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 2018 में शिरडी दौरे पर गए थे. वहां उन्होंने कहा था, ‘कुछ लोग पाथरी को साईं बाबा की जन्मस्थली मानते हैं. उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए पाथरी को भी विकास के लिए कुछ फंड मिलना चाहिए.’ इसके बाद कमलाकर कोटे 22 लोगों का प्रतिनिधिमंडल लेकर दिल्ली में राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे और उनसे कहा कि साईं बाबा का जन्मस्थान शिरडी ही था. विवाद पनपता देख राष्ट्रपति को अपना पाथरी दौरा रद्द करना पड़ा. शिरडी साईं मंदिर की 2855 करोड़ रुपए की संपत्ति 'श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट' की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर की कुल संपत्ति 2017-18 में करीब 2693 करोड़ रुपए थी, जो 2018-19 में बढ़कर 2855 करोड़ रुपए हो गई. इस फाइनेंशियल ईयर में अब तक मंदिर में करीब 260 करोड़ रुपए का डोनेशन आ चुका है. ये आंकड़ा पिछले साल 247 करोड़ रुपए था. 2017 में साईं बाबा की 100वीं पुण्यतिथि के मौके पर शिरडी में एयरपोर्ट भी शुरू किया गया था. पहले भी शिरडी से जुड़े विवाद सामने आए हैं 2017 में राजस्व विभाग ने मंदिर ट्रस्ट पर 4 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था. मंदिर ट्रस्ट को रेवेन्यू से जुड़े मामलों में अनियमितता का दोषी पाया गया था. करीब एक एकड़ की जमीन ऐसी थी, जो शिरडी के भक्तों ने ब्रिटिश राज के दौरान मंदिर के नाम पर किराये पर ली थी. मामला इसी जमीन से जुड़ा था. इसी तरह 2018 में श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट की ओर से मंदिर प्रांगण में लगे तमाम बोर्ड का रंग सफेद से बदलकर भगवा किया जा रहा था. विवाद हुआ तो काम रोक दिया गया.

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