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फ्रॉडिये शेरपुरिया ने क्या ट्रिक लगाई कि सिर्फ़ 40 लाख में PM मोदी का पड़ोसी बन गया?

कूड़ा बीनने वाला करोड़पति कैसे बना जानते हैं?

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27 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 27 अगस्त 2023, 03:12 PM IST)
DRC bought by fraud Sanjay Sherpuriya for just 40 lakhs
दिल्ली राइडिंग क्लब को 40 लाख में फ्रॉड ने कैसे खरीदा? (साभार - आजतक/DRC)
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संजय राय शेरपुरिया का नाम आप सुन चुके होंगे. वही ठग, जो प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी पहुंच बताकर लोगों को फंसाता था. अब इस ठग के बारे में एक और खुलासा हुआ है. लुटियंस दिल्ली की प्राइम प्रॉपर्टी उसने सिर्फ 40 लाख रुपये में खरीद ली. सिर्फ एक घर की बात होती तो समझ भी आता. घर के साथ था दिल्ली राइडिंग क्लब. यानी घर और उसके साथ दिल्ली के सबसे महंगे इलाके में एक घुड़सवारी क्लब भी. ये सब, सिर्फ 40 लाख रुपये में संजय शेरपुरिया को मिल गए. जानते हैं ये सब इस जानेमाने ठग ने कैसे किया?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने संजय शेरपुरिया के खिलाफ अपनी चार्जशीट में इसका खुलासा किया है. दरअसल, संजय ने इस क्लब की मालकिन बीरू सहगल को झांसा दिया कि वो बुढ़ापे में उनकी देखभाल करेगा. इसके बाद उसने सहगल को गुरुग्राम के एक भाड़े पर लिए घर में शिफ्ट करवा दिया और सिर्फ 40 लाख रुपये में ये संपत्ति अपने नाम करा ली. इसी पते को उसने अपना घर और ऑफिस बनाया और बड़े व्यापारियों के साथ सौदा करता रहा और उन्हें ठगता रहा.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ED ने चार्जशीट में बताया है,

“संजय राय शेरपुरिया खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय और भारत सरकार का करीबी दिखाना चाहता था. उसने महसूस किया कि अगर प्रधानमंत्री आवास के करीब की संपत्ति (हाउस नंबर 1, डीआईडी के पास, सफदरजंग रोड, नई दिल्ली) मिल जाए तो उसे खुद को पीएम का करीबी दिखाने में आसानी होगी.”

कैसे दिया मालिक को झांसा?

अखबार की रिपोर्ट बताती है कि इस क्लब के बारे में शेरपुरिया को जानकारी उसके ड्राइवर से मिली थी. ड्राइवर ने शेरपुरिया को बताया था कि सहगल की उम्र काफी ज्यादा है और वो इस प्रॉपर्टी का प्रबंधन नहीं कर पा रही हैं. इसके बाद, उसने इस क्लब की बुजुर्ग मालकिन बीरू सहगल को झांसे में लेने की प्लानिंग शुरू कर दी थी. शेरपुरिया ने सहगल से कई बार मुलाकात की. उन्हें समझाता रहा कि वो इस क्लब को मेनटेन करेगा और बीरू के लिए इसी परिसर में एक घर भी बनवा देगा.

शेरपुरिया ने ED की पूछताछ में इस बात को कबूला है. ED के मुताबिक शेरपुरिया ने बताया,

“काफी चर्चा के बाद बीरू सहगल मेरा प्रस्ताव मान गईं. उन्होंने 2018-19 में डीआरसी (DRC) का पूरा नियंत्रण मेरे हाथों में सौंप दिया. मेरे और बीरू सहगल के बीच एक मौखिक समझौता हुआ था. जब तक वो जीवित रहेंगी, मैं उनके दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता देता रहूंगा.”

शेरपुरिया ने अपनी पत्नी और अपनी कंपनी के अकाउंट से 20-20 लाख रुपये बीरू के खाते में जमा करवा दिए. भतीजे प्रदीप राय को क्लब का मैनेजर नियुक्त कर दिया गया. 2017 से ही संजय अपने परिवार को लेकर यहां रहने लगा था. बीरू सहगल को गुरुग्राम के एक किराए के फ्लैट में शिफ्ट कर दिया गया था. ED ने चार्जशीट में लिखा है कि शेरपुरिया ने एक महिला के खराब स्वास्थ्य का फायदा उठाया है और ‘मामूली मुआवजा’ देकर ‘अमूल्य संपत्ति’ पर कब्जा कर लिया.

बताते चलें, दिल्ली राइडिंग क्लब सफदरजंग मकबरे के पीछे लगभग तीन एकड़ में फैला हुआ है. इसके पास ही प्रधानमंत्री का भी आवास है. DRC की स्थापना दूसरे विश्वयुद्ध के अनुभवी कैप्टन कुंदन सिंह ने 1968 में एक अमरिकी दंपत्ति के साथ मिलकर की थी. कैप्टन कुंदन सिंह ने बाद में इसे अपनी बेटी बीरू सहगल को दे दिया था.

कैप्टन कुंदन सिंह
UP STF ने किया गिरफ्तार

दरअसल, इसी साल 26 अप्रैल को यूपी STF ने लखनऊ से संजय प्रकाश राय उर्फ संजय शेरपुरिया को गिरफ्तार किया था. उस पर ठगी का आरोप है. आरोप है कि यह दिग्गज नेताओं से कनेक्शन बताकर जालसाजी को अंजाम देता था. रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार को संजय के खिलाफ एक गुमनाम चिट्ठी मिली थी. चिट्ठी में आरोप था कि वो भाजपा के बड़े नेताओं के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहा था.

कूड़ा बीनने वाला बना करोड़पति

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के गाजीपुर के रहने वाले संजय का जन्म असम में हुआ था. घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. स्कूल की फीस देने के लिए पैसे नहीं थे. इस पैसे के लिए संजय हफ्ते में दो दिन कूड़ा बीनता था. इन पैसों से उसने अपने भाई-बहन को भी पढ़ाया. जानकारी के मुताबिक उसने 10वीं तक पढ़ाई की है. फिर वो गुजरात चला गया और वहां सिक्योरिटी सुपरवाइज़र बन गया. फिर धीरे-धीरे बैंक से पैसे लेकर उसने कई तरह के व्यापार किए.

इस दौरान वह PMO, RSS, भाजपा, प्रसिद्ध कथावाचकों और नामी पत्रकारों के साथ अपनी फोटो दिखाकर व्यापारियों को गुमराह करता रहा और अपना फायदा निकालता रहा. कुछ समय बाद शेरपुरिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 349 करोड़ 12 लाख रुपए लेकर भाग गया. सिर्फ SBI नहीं, कई बैंकों से कर्ज लेने की बात सामने आई. बैंकों ने उसे डिफॉल्टर घोषित कर दिया. समस्याएं बढ़ी तो वो दिल्ली आ गया, जहां उसने ये पूरा प्रकरण किया.

वीडियो: मनोज सिन्हा ने संजय शेरपुरिया से संबंध और 25 लाख रुपए लेने के पीछे का पूरा सच बताया?

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