The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Congress SP BSP alliance SP, BSP and Congress are likely to come together in Uttar Pradesh before Lok Sabha Election 2019

यूपी में मोदी-शाह की हार का फॉर्मुला क्या सपा-बसपा ने ढूंढ निकाला है?

बीजेपी हर हाल में इसे टालना चाहेगी. इसी का तो डर रहा होगा.

Advertisement
pic
7 मार्च 2019 (अपडेटेड: 7 मार्च 2019, 09:18 AM IST)
Img The Lallantop
2017 में अखिलेश और राहुल के बीच अच्छा तालमेल देखा गया था. हालांकि चुनावी नतीजों में इसका कोई खास फायदा नजर नहीं आया. इसके बाद अखिलेश कांग्रेस से दूरी बनाए हुए थे.
Quick AI Highlights
Click here to view more

दिसंबर 2016 की एक सुबह कन्नौज से सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के पास एक फोन आता है. फोन की दूसरी तरफ थीं रायबरेली की विधायक अदिति सिंह. अदिति और डिंपल में पुरानी दोस्ती थी. अदिति ने डिंपल को बताया कि प्रियंका गांधी उनसे मिलना चाह रही हैं. डिंपल ने उन्हें लखनऊ आने का न्यौता दिया. इस तरह प्रियंका और अखिलेश यादव की पहली मुलाकात हुई. एक महीने के भीतर प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव स्काइप पर वीडियो चैट करते हुए उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस गठबंधन को आखिरी रूप दे रहे थे.

23 जनवरी 2017. प्रियंका गांधी ने आधिकारिक तौर पर कांग्रेस की सदस्यता ली. उन्हें ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी का सचिव बनाया गया और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई. कांग्रेस ने यह फैसला सपा-बसपा गठबंधन के दबाव में लिया था. ताकि वापस दबाव बनाया जा सके. फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव के वक़्त ही सपा ने कांग्रेस से हाथ झटककर बसपा का दामन थाम लिया था. इसके बाद कई दौर की वार्ता के बाद भी कांग्रेस को सपा-बसपा गठबंधन में जगह नहीं मिल पाई थी. उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद प्रियंका ने 2016 के अपने आजमाए हुए दांव को फिर से आजमाने की कोशिश की. कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा के बाद भी प्रियंका लगातार डिंपल के सम्पर्क में बनी हुई थीं.



पिछले एक महीने से प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का संगठन दुरुस्त करने में लगे हुए हैं.

प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले एक महीने से जमीन पर कांग्रेस का संगठन दुरुस्त करने में लगे हुए हैं. कांग्रेस उत्तर प्रदेश में जितना मजबूती से चुनाव लड़ेगी, सपा और बसपा को उतना ही ज्यादा नुकसान होना तय है. खास तौर पर इससे मुस्लिम वोट के बंटने की संभावना जताई जा रही है. सपा-बसपा इस नुकसान से नावाकिफ नहीं हैं. इधर एयर स्ट्राइक की वजह से बीजेपी को मिल रही बढ़त के चलते सपा-बसपा त्रिकोणीय मुकाबले से बचना चाह रही हैं. ऐसे में बीच का रास्ता निकालते हुए दोनों दल कांग्रेस को गठबंधन में जगह देने के बारे में विचार कर रहे हैं. अंदरखाने से खबर आ रही है कि सपा-बसपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बातचीत अंतिम पड़ाव में हैं. इसी वजह से प्रियंका गांधी का प्रस्तावित उत्तर प्रदेश दौरा फिलहाल टाल दिया गया है.

कहां अटकी है बात?

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की तरफ से गठबंधन के तहत 20 सीटों की मांग रखी गई थी. 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 21 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसी को आधार बनाकर कांग्रेस इस बार भी 20 सीट चाह रही थी. लेकिन सपा-बसपा की तरफ से अमेठी और राय बरेली को मिलाकर कुल 11 सीटें दिए जाने की बात कही जा रही है. अब दोनों तरफ से नरमी के कुछ संकेत मिल रहे हैं. कहा जा रहा है कि सपा और बसपा की तरफ से अमेठी-राय बरेली को मिलाकर कांग्रेस के सामने 15 सीटों का ऑफर रखा गया है. इसके लिए सपा 7 और बसपा 6 सीट छोड़ने के लिए तैयार भी हो गई हैं. गठबंधन की सारी बातचीत अंतिम चरण में हैं. अगर कांग्रेस 15 सीटों के लिए राजी होती है तो जल्द ही गठबंधन की घोषणा कर दी जाएगी. और घोषणा होती है तो जाहिर सी बात है इससे बीजेपी के माथे पर पसीना आएगा.



कभी पुताई का काम करने वाला यूपी का ये नेता कैसे बना हजारों करोड़ का मालिक?

Advertisement

Advertisement

()