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जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वहां NPR लागू नहीं होगा?

कांग्रेस ने केंद्र से कहा- NPR अपडेट करने की प्रक्रिया तुरंत रोक दी जाए.

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12 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 12 जनवरी 2020, 06:59 AM IST)
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11 जनवरी को कांग्रेस वर्किंग कमिटी की मीटिंग हुई. इसमें CAA और NPR को लेकर प्रस्ताव पास किया गया. (फोटो-पीटीआई)
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नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR). कांग्रेस ने केंद्र सरकार से कहा है कि इसे अपडेट करने की प्रक्रिया तुरंत रोक दी जाए. इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि कांग्रेस शासित राज्य मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब जैसे राज्य अपने यहां NPR लागू नहीं करेंगे. पश्चिम बंगाल और केरल पहले ही NPR को खारिज कर चुके हैं. कांग्रेस के एक नेता ने संकेत दिया कि कांग्रेसी राज्य इसके लिए विधानसभा में प्रस्ताव ला सकते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, कांग्रेस के नेता ने कहा कि अगर राज्य विधानसभाएं संकल्प पारित करती हैं, तो यह पूरी तरह से अलग आयाम लेगा. 11 जनवरी यानी शनिवार को कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक बॉडी कांग्रेस वर्किंग कमिटी की मींटिग हुई. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने NPR 2020 के बारे में कहा,
पहले सरकार ने सोचा कि एनआरसी को पूरे देश में लागू करेंगे. लेकिन असम में जिस तरह के परिणाम देखने को मिले उसके बाद सरकार NPR का आइडिया लेकर आई. कई राज्यों में हमारी सरकार है. हमें NPR पर समझदारी से एक समान फैसला लेना होगा.
विचार-विमर्श के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) जोरदार शब्दों में संकल्प के साथ सामने आई कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को वापस लिया जाए और NPR की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए. सोनिया गांधी ने सीडब्ल्यूसी की मीटिंग में कहा कि सीएए एक भेदभावपूर्ण और विभाजनकारी कानून है. इसका मकसद धार्मिक आधार पर देश के लोगों को बांटना है. भारत के जिन पांच राज्यों में कांग्रेस की सरकार है उन राज्यों में भारत की 16 प्रतिशत जनसंख्या रहती है. पश्चिम बंगाल और केरल जो पहले से ही अपने यहां एनपीआर लागू करने से मना कर चुके हैं वहां 10.3 प्रतिशत जनसंख्या है. महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार है. इसके अलावा वह झारखंड में झारखंड मुक्तिमोर्चा के साथ सरकार में है. इन दोनों राज्यों में लगभग 12.1 प्रतिशत आबादी रहती है. अगर सही राज्यों की जनसंख्या को जोड़ दिया जाए तो यह 40 प्रतिशत बनती है. हालांकि बिहार जहां जेडीयू और बीजेपी की सरकार है वहां NPR की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. NPR के लिए 15 मई से 28 मई के बीच डाटा इकट्ठा किया जाएगा. जेडीयू NRC का विरोध करती रही है लेकिन उसका कहना है कि पार्टी को NPR से कोई दिक्कत नहीं है. 2018-19 की गृह मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट में कहा गया कि NPR, NRC की दिशा में पहला कदम है. इसमें कहा गया है, ‘सिटिजनशिप ऐक्ट के प्रावधानों के हिसाब से NPR नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिज़ंस NRIC की दिशा में पहला कदम है. कंफ्यूजन तब शुरू हुआ जब तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में एक लिखित जवाब में कहा था कि NPR, NRC की दिशा में पहला कदम है. हालांकि पीएम मोदी ने 22 दिसंबर 2019 को दिल्ली की एक चुनावी रैली में कहा था कि NRC पर सरकार में कोई चर्चा नहीं हुई है. झूठ फैलाया जा रहा है. पीएम ने कहा था, 2014 से आज तक मेरी सरकार आने के समय से… NRC पर कोई चर्चा नहीं हुई है. गृहमंत्री अमित शाह ने भी कहा था कि NRC और NPR के बीच कोई संबंध नहीं है. NRC के लिए NPR के डेटा का उपयोग कभी नहीं किया जा सकता है.
बिहार में NPR लागू करने को लेकर क्या बोली जेडीयू और बीजेपी?

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