कांग्रेस ने जमानत पर चल रहे कार्ति चिदंबरम को टिकट देकर भाजपा का बहुत बड़ा फायदा कर दिया है
बीजेपी को बैठे बिठाए मुद्दा मिल गया है.
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कार्ति चिदंबरम
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कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे. रविवार को कांग्रेस की ओर से जारी 9वीं लिस्ट में कार्ति का नाम है. कार्ति आईएनएक्स मीडिया और एयरसेल-मैक्सिस मामले में आरोपी हैं. कार्ति को लोकसभा का चुनाव लड़वाया जाए या नहीं इसे लेकर कांग्रेस दुविधा में थी. घोटाले में नाम आने के बाद तमिलनाडु के कई नेता नहीं चाहते थे कि कार्ति को लोकसभा का टिकट दिया जाए. उनकी दलील थी कि कार्ति के चुनाव लड़ने से भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्टी का स्टैंड कमजोर होगा. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यूपीए सरकार के भष्टाचार को बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया था और चुनावों में शानदार जीत हासिल की थी.
45 करोड़ की धांधली का भी आरोप
एयरसेल-मैक्सिस केस में ईडी ने चेस ग्लोबल अडवाइजरी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की तलाशी ली थी. पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति इस कंपनी के डायरेक्टर थे. उस दौरान ईडी के अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान मिले डॉक्युमेंट्स के आधार पर पता चला है कि कार्ति ने पिता के पद का दुरुपयोग किया है. मामले की जांच सीबीआई कर रही है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कार्ति के विदेशों में कई बैंक अकाउंट हैं, जिन्हें वो बंद करवा चुके हैं. इसके अलावा ये भी आरोप हैं कि चिदंबरम जिस वक्त यूपीए सरकार में मंत्री थे उस वक्त कार्ति ने आईएनएक्स मीडिया को कई रियायतें दिलवाईं और बदले में दलाली ली. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्ति पर विदेशी मुद्रा अधिनियम के खिलाफ 45 करोड़ रुपए की धांधली का एक और आरोप है.
शिवगंगा सीट पर एक नजर
तमिलनाडु की शिवगंगा सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी. कांग्रेस को इस सीट पर पहली बार 1980 में जीत मिली थी. 1999 को छोड़ दिया जाए तो 1984 से 2009 तक यह सीट पी चिदंबरम के पास रही. पिता की पारंपरिक सीट पर 2014 में कार्ति चिदंबरम ने चुनाव लड़ा लेकिन बुरी तरह हार गए. एक बार फिर कांग्रेस ने कार्ति चिदंबर पर दांव लगाया है वो भी ऐसे समय में जब वह भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं और सीबीआई और ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं. जमानत के लिए उन्हें बार-बार कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
वीडियो देखें: फिल्म PM नरेंद्र मोदी के क्रेडिट्स में एक झूठा नाम दिया गया है?
तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से कार्ति के चुनाव लड़ने का एलान उनकी जमानत की अवधि खत्म होने से एक दिन पहले हुआ है. एयरसेल मैक्सिस केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और बेटे कार्ति चिदंबरम को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने गिरफ्तारी से 25 मार्च तक राहत दी है. यानी कार्ति की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है. अगर कार्ति को जमानत नहीं मिली तो उनकी परेशानी बढ़ सकती है. किस मामले में फंसे हैं कार्ति कार्ति आईएनएक्स मीडिया और एयरसेल-मैक्सिस मामले में आरोपी हैं. 2006 में मलेशियाई कंपनी मैक्सिस ने एयरसेल में 100 फीसदी की हिस्सेदारी हासिल की. उस वक्त वित्त मंत्री थे पी चिदंबरम. आरोप लगा कि एयरसेल मैक्सिस मामले में अप्रूवल वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने दिया था. मामले की जांच ईडी और सीबीआई को सौंपी गई. ईडी ने दावा किया कि पी चिदंबर के बेटे कार्ति चिदंबरम और उनकी भतीजी को मैक्सिस ग्रुप से दो लाख डॉलर मिले थे. इस केस में तत्कालीन टेलिकॉम मिनिस्टर दयानिधि मारन पर भी आरोप लगे कि उन्होंने एयरसेल के मालिक सी शिवकृष्णन पर मलयेशियाई कंपनी मैक्सिस को कंपनी की हिस्सेदारी बेचने का दबाव बनाया.The Congress Central Election Committee announces the ninth list of candidates for the ensuing elections to the Lok Sabha pic.twitter.com/6ZM8XBrJJs
— Congress (@INCIndia) March 24, 2019
45 करोड़ की धांधली का भी आरोप
एयरसेल-मैक्सिस केस में ईडी ने चेस ग्लोबल अडवाइजरी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की तलाशी ली थी. पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति इस कंपनी के डायरेक्टर थे. उस दौरान ईडी के अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान मिले डॉक्युमेंट्स के आधार पर पता चला है कि कार्ति ने पिता के पद का दुरुपयोग किया है. मामले की जांच सीबीआई कर रही है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कार्ति के विदेशों में कई बैंक अकाउंट हैं, जिन्हें वो बंद करवा चुके हैं. इसके अलावा ये भी आरोप हैं कि चिदंबरम जिस वक्त यूपीए सरकार में मंत्री थे उस वक्त कार्ति ने आईएनएक्स मीडिया को कई रियायतें दिलवाईं और बदले में दलाली ली. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्ति पर विदेशी मुद्रा अधिनियम के खिलाफ 45 करोड़ रुपए की धांधली का एक और आरोप है.
शिवगंगा सीट पर एक नजर
तमिलनाडु की शिवगंगा सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी. कांग्रेस को इस सीट पर पहली बार 1980 में जीत मिली थी. 1999 को छोड़ दिया जाए तो 1984 से 2009 तक यह सीट पी चिदंबरम के पास रही. पिता की पारंपरिक सीट पर 2014 में कार्ति चिदंबरम ने चुनाव लड़ा लेकिन बुरी तरह हार गए. एक बार फिर कांग्रेस ने कार्ति चिदंबर पर दांव लगाया है वो भी ऐसे समय में जब वह भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं और सीबीआई और ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं. जमानत के लिए उन्हें बार-बार कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
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