झारखण्ड के लातेहार गाँव में जानवरों के व्यापारी मजलूम अंसारी और इम्तियाज़ खान कोमार दिया गया था. मारने के बाद उन्हें पेड़ पर लटका दिया गया था. जिससे ऐसा लगे किदोनों ने खुदकुशी की है. घटना के मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. तीनऔर लोगों ने कुछ दिनों बाद सरेंडर कर दिया. झारखण्ड पुलिस इन कत्लों के पीछे कामकसद ढूंढ रही थी. जबकि ये साफ़ था कि सभी पकड़े गए आरोपी गौ-रक्षा एक्टिविस्ट थे. औरये सभी लोग पहले भी जानवरों के व्यापारियों से लड़-भिड़ चुके हैं. लोकल लोगों का कहनाहै कि अरुण साऊ बजरंग दल का मेम्बर है. पांच अरेस्ट होने आरोपी हैं - मनोज कुमारसाहू, मिथिलेश प्रसाद साऊ उर्फ़ बंटी, प्रमोद कुमार साऊ, मनोज साऊ और अवधेश साऊ. बादमें तीन सरेंडर करने वाले लोग थे - अरुण साऊ, सहदेव सोनी और विशाल तिवारी. अरेस्टहोने वाले पांचों ने अपने अपने अपराध कुबूल लिए हैं. उनके कुबूलनामे से मालूम चलताहै कि मास्टरमाइंड अरुण साऊ था. अरुण बजरंग दल का मेम्बर है. इन आठ लोगों में मर्डरके मौके पर सिर्फ़ चार ही लोग शामिल थे. हुआ ये था कि जानवरों के बेचे जाने की खबरमिलने पर ये आठ इम्तियाज़ और मजलूम के पास पहुंचे. वहां से अरुण, मनोज, प्रमोद औरसहदेव इम्तियाज़ और मजलूम को लेकर मर्डर किये जाने वाली जगह पर ले गए. बाकी के चार'छुड़ाए गए' जानवरों को लेकर जंगल चले गए. कैच न्यूज़ के हवाले से मिले इन लोगों केकन्फेशन से पूरे मामले की कहानी मालूम चलती है. मालूम पड़ता है कि कुछ 6 महीने पहलेबालूमठ के कुछ कुरैशी समुदाय के लोगों ने मिलकर अरुण साऊ को किसी घर में बंद करकेपीटा था. अरुण उसका बदला लेने के मौके तलाश रहा था. इसी लिए अरुण ने जानवरों कोबेचने वालो के खिलाफ़ एक टीम बनाई.-------------------------------------------------------------------------------- कन्फेशन के बाद साफ़ हुई कहानी -18 मार्च 2016 को अवधेश साऊ ने मनोज साऊ को देर रात 3.30 बजे अपने मोबाइल से फ़ोनकिया. उसने बताया कि कुछ लोग जानवरों को बेचने के लिए झाबर गांव से बालूमठ ले जारहे हैं. मनोज ने उसे उनपर नज़र बनाये रखने को कहा. अवधेश ने तुरंत अरुण को फ़ोन कियाऔर मामला बताया. फिर अवधेश ने बाकी सभी को फ़ोन मिलाया. मनोज साऊ, अरुण के साथ मिलकर10-15 मिनट में मेन रोड पहुंच गया. वहां सहदेव सोनी, विशाल तिवारी, मिथिलेश साऊ,प्रमोद साऊ, मनोज कुमार साहू और अवधेश मिले. अवधेस ने सभी को बताया कि जानवर ले जारहे लोग आगे कुछ दूरी पर हैं. उसके बाद उन्होंने उन लोगों का पीछा किया और झाबर मेंदेवी मंडप पर रोक लिया. वहां उन्हें मालूम चला कि वो 8 बैल लेकर जा रहे थे. उन्हेंपकड़ने के बाद मिथिलेश अवधेश, विशाल और मनोज कुमार साहू उन बैलों को लेकर जंगल चलेगए. जंगल में उन्होंने उस बैलों को पेड़ों से बांध दिया. इधर अरुण ने 12 साल केइम्तियाज़ को उसके हाथ बांध के एक मोटरसाइकिल पर बिठा दिया. प्रमोद उस लड़के के पीछेबैठ गया. मनोज ने मजलूम अंसारी को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा किया. मजलूम के भी हाथबंधे हुए थे. ये सभी खपरैल बार पर जाके रुके. वहां उन्होंने दोनों पकड़े हुए लोगोंको डंडों से जमकर पीटा. फिर अरुण ने उन सभी को उसका इंतज़ार करने को कहा और वहां सेचला गया. 10-15 मिनट बाद एक रस्सी लेकर लौटा. उसने कहा उसे इन लोगों से एक पुरानीरंजिश का बदला लेना है. उसने ये भी कहा कि ये ही लोग कुरैशियों को जानवर बेचते हैं.इतना कह के अरुण ने 30-32 साल के मजलूम का उसी रस्सी से गला घोंट दिया. फिर उसकेगले में रस्सी बांधकर पेड़ से लटका दिया. उसने बाकी सभी को मोटरसाइकिल पर चढ़कर लाशको ऊपर धकेलने को कहा. उसने पूरी कहानी को आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश की. इसकेबाद अरुण ने 12 साल के इम्तियाज़ को भी रासी से गाल घोंट कर मार डाला. पेड़ पर चढ़करउसने उसकी लाश को भी ऊपर खींच लिया. इन दोंनो को लटकाने के बाद प्रमोद, अरुण, सहदेवऔर मनोज साऊ झाबर रोड आये जहाँ उन्हें जानवरों को जंगल ले गए बचे हुए चारों लोगमिले.-------------------------------------------------------------------------------- मिथिलेश, अवधेश और मनोज साहू जो कि मर्डर के वक़्त मौके पर नहीं मौजूद थे, केकन्फेशन भी इससे बिलकुल मिलते-जुलते हैं. मिथिलेश प्रसाद ने बताय कि करीब पांचमहीने पहले अक्टूबर 2015 में झाबर गांव में एक मीटिंग हुई थी. उसमें पूरे एरिया केगौ रक्षा समिति की ज़िम्मेदारी मिथिलेश प्रसाद साहू को दी गयी थी. इस पूरे मामले कोगौ-रक्षा के नज़रिए से देखा जा रहा है. इस काण्ड के मास्टरमाइंड अरुण साऊ जिसने असलमें दोनों का मर्डर किया, बालूमठ ब्लाक का बजरंग दल का इंचार्ज है. मजलूम अंसारी कीफैमिली ने ये भी आरोप लगाया है कि अरुण ने फरवरी में उन्हें धमकाया था. पिछले सालसितम्बर में अरुण ने एक मौलवी गुलज़ार कुरैशी पर हमला किया था और जबरिया उसकी दाढ़ीकाट दी थी.