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एक बेरोजगार इंजीनियर से खतरनाक दुनिया में कुछ नहीं होता

उस बंदे को अपनी पुरानी कंपनी इतनी पसंद थी कि हाथ पर कंपनी के नाम का टैटू बनवा डाला था.

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31 मई 2016 (अपडेटेड: 31 मई 2016, 12:35 PM IST)
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शायद यही पढ़ कर इंस्पायर हो गया था अश्विनी
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रामपाल, ओसामा, यादव सिंह, ISIS में गए महाराष्ट्र वाला लड़के. इन सबमें क्या कॉमन है? यही कि ये इंजीनियर हैं, एक बेरोजगार इंजीनियर से खतरनाक दुनिया में कुछ नहीं होता. इस चीज को कागज में लिखिए. आग से जलाइए और राख को ताबीज में डालकर पहन लीजिए. ये शाश्वत सत्य है. एक इंजीनियर ने छुट्टी के नाम पर 60 लोगों की जेब कतर दी. पोर्ट ब्लेयर घुमाने का सपना दिखा के. उसने एक फर्जी ट्रैवल कंपनी बना रखी थी और तो और कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री की वेबसाइट पर अपनी कंपनी भी लिस्टेड करा रखी थी. जिनको चूना लगाया वो ऐसे-वैसे नहीं ज्यादातर एम्स में काम करने वाले हैं. पुलिस वाले भी उनसे नहीं बचे. उनकी भी जेब कतरी. अब पुलिस को उससे 18 लाख से ज्यादा रुपये जब्त करने हैं. तीन लड़के थे. अश्विनी, भावेश और ओमप्रकाश. ये एयर टिकट और होटल का किराया ले लेते थे. घुमाने का प्रॉमिस करते थे फिर ऐसे गायब हो जाते थे जैसे इंजीनियरिंग ड्राइंग के पर्चे में सवालों के जवाब दिमाग से छू हो जाते हैं. फोन तक ट्विच्चाफ कर देते थे. आपकी छुट्टी के नाम पर कट्टी हो गई है तब पता चलता जब मोबाइल वाली आंटी 'जिस नंबर से आप संपर्क करना चाहते हैं, वो ट्विच्चाफ है' टाइप्स बात कहने लगती. पुलिस बताइस अश्विनी दरअसल, बी. टेक. है. हंसिए मत एक गलती तो सबसे हो जाती है. उसने कंप्यूटर साइंस में आईपी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रखा था. उसमें 'प्रतिभा' शुरू से ही कुलबुलाती थी 2014 में ही चीटिंग के केस में अरेस्ट हो चुका था. पहले वो कनॉट प्लेस में एक कंपनी में काम करता था. उस कंपनी से इतना मोह था कि उसके नाम का टैटू अपने हाथ पर बनवा लिया. 'तेरा नाम सीने पे लिखा हर कोई आके पढ़ सके' टाइप्स. भगवान ऐसा कर्मचारी हर कंपनी को दे. लेकिन थोडे दिन बाद उसने ये कंपनी छोड दी. बेरोजगार हुआ तो खतरनाक भी ज्यादा हो गया, जैसे वीटी ग्राफ पर टाइम के साथ वेलोसिटी भी बढ़ रही हो. फिर इसने खुद की कंपनी बनाई. और अपना काम शुरू किया, बहुत स्टार्ट अप इंडिया टाइप्स फील मत कीजिए. लोगों को ठगने का काम शुरू किया था. कंपनी का नाम रखा. बीबी हॉलिडेज प्राइवेट लिमिटेड. फ्लाइट टिकट, होटल वगैरह बुक कराने की जुल्ल देकर पैसे हेंचते और गुल्ल हो जाते. क्लाइंट को कभी अपना ऑफिस नहीं दिखाते थे. होता क्या है कि सरकारी कर्मचारियों को मिलता है लीव ट्रैवल कंसेशन. उसी के आड़े अश्विनी ने एम्स के 24 से ज्यादा कर्मचारियों से लाखों रुपये ठग लिए हैं. ठगी के ज्यादातर केस हौजखास थाने में दर्ज हैं. इन तीनों को नॉर्थ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ ने धरा है. अब देखिए आगे क्या होता है.

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