'फोन छीना, अंधेरे कमरे में बैठाया', रिजाइन करवाने के लिए कंपनी ने इंप्लाय को खूब परेशान किया, पूरा मामला जान लें
कोर्ट ने कंपनी से लियू को उनके काम के लिए मुआवजा देने को कहा. कहा गया कि अंधेरे कमरे में कर्मचारी को रखना श्रम कॉन्ट्रैक्ट लॉ के तहत अवैध है. हालांकि कंपनी ने इस फैसले का विरोध किया.

कर्मचारी खुद नौकरी छोड़ दे ताकि मुआवजा ना देना पड़ा, इसके लिए चीन की कंपनी ने ऐसी-ऐसी तरकीबें अपनाई कि मामला कोर्ट तक पहुंच गया (Chinese Company Employee Abuse). पीड़ित इंप्लॉय को चार दिनों तक एक छोटे बंद कमरे में बैठने का काम दिया गया. उस कमरे में बिजली की सप्लाय तक नहीं थी. वहां भेजने से पहले कर्मचारी से मोबाइल फोन भी छीन लिया गया. कमरे में केवल एक टेबल और कुर्सी थी.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला गुआंगजौ डुओई नेटवर्क कंपनी लिमिटेड से जुड़ा है. पीड़ित इंप्लॉय का नाम लियू लिंझू है. वो कंपनी में गेम आर्ट एडिटर के तौर पर काम करते थे. दिसंबर 2022 में एक दिन अचानक लियू को पता चला कि वो कंपनी के कंप्यूटर पर लॉगिन नहीं पा रहे हैं और ना ही उनका एंट्री कार्ड काम कर रहा है. जब सवाल किया तो कंपनी ने बताया कि उन्हें एक ट्रेनिंग में हिस्सा लेना है. ट्रेनिंग के नाम पर लियू को किसी और फ्लोर के एक बंद कमरे में भेज दिया गया. चार दिनों तक ऑफिस आने पर लियू को वहीं भेज दिया जाता था और कोई काम नहीं दिया जाता था. पांचवें दिन लियू की पत्नी ने इस दुर्व्यवहार की शिकायत पुलिस से की. इसके बाद कंपनी ने लियू को बर्खास्त करने का ऑफिशियल नोटिस जारी किया.
मामला कोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने कंपनी से लियू को उनके काम के लिए 380,000 युआन (लगभग 43 लाख रुपये) का मुआवजा देने को कहा. कहा गया कि अंधेरे कमरे में कर्मचारी को रखना श्रम कॉन्ट्रैक्ट लॉ के तहत अवैध है.
हालांकि कंपनी ने इस फैसले का विरोध किया. कंपनी ने अपने ऑफिशियल वीबो अकाउंट पर अदालत के डॉक्यूमेंट शेयर किए और असहमति जताई. तर्क दिया कि लियू को कंपनी पॉलिसी का उल्लंघन करने को लेकर बर्खास्त किया गया है. आरोप लगाए कि लियू ड्यूटी के वक्त अश्लील फोटो-वीडियो देखता था. साथ ही कहा कि लेबर कानूनों में कई समस्याएं हैं जिसे न्यायाधीश मनमाने ढंग से लागू करते हैं.
कंपनी के आरोपों पर लियू ने कहा कि उन्होंने काम के सिलसिले में तस्वीरें देखी थीं.
कंपनी ने मामले पर कोई और टिप्पणी नहीं की है. मामले को लेकर ऑनलाइन यूजर्स ने बड़े पैमाने पर अदालत के फैसले का समर्थन किया है. कंपनी को खूब ट्रोल किया जा रहा है.
ये सेम कंपनी साल 2020 में भी विवादों में आई थी. तब कंपनी के CEO जू बो ने एक बयान में कहा था कि उनके कर्मचारी अपनी सैलरी में 10 फीसदी कटौती के लिए खुद की इच्छा से अप्लाय कर सकते हैं. तब कुछ कर्मचारियों ने दावा किया कि कंपनी अपने कर्मचारियों की वफादारी को टेस्ट करना चाहती थी.
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