'मैं भी दलित हूं', कॉकरोच पार्टी के अभिजीत दिपके के ये बताते ही लोग क्या बोलने लगे?
पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके को सोशल मीडिया पर जातिसूचक कॉमेंट्स का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले, गुरुवार 21 मई को एक ट्वीट में उन्होंने बताया था कि वो दलित हैं.

कॉकरोच जनता पार्टी का ऐलान हुआ. पहले एक सटायर के तौर पर. फिर धीरे-धीरे पार्टी असली राजनीति के रास्ते पर चल पड़ी. पार्टी का थीम सॉन्ग बना. मेनिफेस्टो बनाया गया. सिंबल चुना गया (अभी आधिकारिक नहीं है). पंजाब में सीएम फेस का नाम जारी किया. X अकाउंट बंद हुआ. कुछ नेताओं का सपोर्ट मिला. कुछ की ओर से इल्जाम भी लगे. विदेशी फंडिंग जैसे कीवर्ड की भी एंट्री हो चुकी थी.
इस डिश में काफी कुछ जुड़ चुका था, बस एक Ingredient की कमी थी- जाति/धर्म. अब उसकी भी कमी पूरी हो गई है. पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके को सोशल मीडिया पर जातिसूचक कॉमेंट्स का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले, 21 मई को एक ट्वीट में उन्होंने बताया था कि वो दलित हैं.
सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी को जमकर पॉपुलैरिटी मिल रही है. तेजी से नए फॉलोअर्स जुड़ रहे हैं. इस बीच कई लोगों ने पार्टी के अस्तित्व पर सवाल खड़ा किया. पूछा कि क्या ये सिर्फ सटायर है या पार्टी असलियत में जमीन पर भी उतरेगी. इन्हीं सबके बीच एक यूजर ने आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी के स्टैंड को लेकर सवाल किया. Shut Up Counsel नाम के यूजर ने लिखा,
"इंस्टाग्राम पर BJP को पछाड़ने के लिए कॉकरोच पार्टी को बधाई. लेकिन एक ज़रूरी बात है, जिस पर आपने अब तक कुछ नहीं कहा है. आपने न तो आरक्षण के मुद्दे पर अपनी राय रखी है और न ही दलितों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के समर्थन में आवाज़ उठाई है.”
इसके जवाब में अभिजीत ने बताया कि वो भी दलित हैं. उन्होंने लिखा,
"मैं खुद भी एक दलित हूं. उम्मीद है कि इससे आपके सभी सवालों के जवाब मिल गए होंगे."
अभिजीत के इस जवाब के बाद उनके पोस्ट पर कई यूजर्स भड़क गए. कुछ लोग इसे ‘दलित कार्ड’ खेलना कह रहे हैं. कुछ ने आपत्तिजनक बातें लिखीं. तो कुछ ने ये भी कहा कि ये वक्त जाति आधारित राजनीति का नहीं, बल्कि विकास पर बात करने का है.
एक यूजर ने लिखा,
"हां, इतना नल्ला इंसान कि भारत में आरक्षण का फायदा मिलने के बाद भी उसे देश छोड़कर भागना पड़ा. यहां उसके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज है, लेकिन विदेश में बैठकर अब भी दलित कार्ड खेलने की कोशिश कर रहा है."

एक ने लिखा,
"वाह! तुम अपना नाम बदलकर “मुहम्मद अभिजीत दिपके” भी रख लो, फिर पैकेज पूरा हो जाएगा. जय भीम, जय नीम”

केविन नाम के एक यूजर ने लिखा,
“नई दौर की पार्टी, लेकिन अब भी वही पुरानी जाति की राजनीति कर रही है…”

सौरव यूजर ने लिखा,
"सांप्रदायिक राजनीति गलत है, लेकिन जाति की राजनीति ठीक है? आज की GenZ भी जाति आधारित आरक्षण की पुरानी व्यवस्था का असर झेल रही है. टैलेंटेड और काबिल लोगों को पीछे कर दिया जाता है, जबकि कम या बेहद खराब नंबर लाने वालों को भी फायदे मिल जाते हैं. नहीं चाहिए ऐसा सिस्टम. आप भी दूसरों से बेहतर नहीं हैं."

एक अन्य यूजर ने लिखा,
“अभी तो दो दिन ही हुए थे भाई, अभी से जाति और धर्म बताने की नौबत आ गई तो आप चुनाव कैसे जीतोगे?”

संजू नाम के यूजर ने दिपके के समर्थन में लिखा,
"आप बार-बार ये बताने की कोशिश क्यों कर रहे हैं कि आप क्या हो? आप भारतीय हैं, बस वही काफी है."

सुप्रीम कोर्ट में एक केस की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” और “पैरासाइट” कहा था. बाद में उन्होंने सफाई दी कि मीडिया ने उनकी बात गलत तरीके से पेश की. लेकिन तब तक इस बयान पर ठीक-ठाक बवाल मच गया था. सोशल मीडिया पर बहस जारी थी.
इसी बीच अभिजीत दिपके ने एक पैरोडी पार्टी शुरू की. दिपके ने X पर लोगों से खुद को “कॉकरोच” बताने की अपील की. देखते ही देखते ये पैरोडी पार्टी एक ऑनलाइन मूवमेंट बन गई. लाखों लोगों ने वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन किया. इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए.
वीडियो: पाकिस्तान में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की नकल पर पार्टी बनी

