फ़ेज़-1 से लेकर फ़ेज़-3 तक कैसे बदले कोरोना वैक्सीन के दाम?
क्या है पूरा गणित? केंद्र-राज्य क्यों हैं आमने-सामने?
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कोरोना होने पर वैक्सीन लेनी है या नहीं, डॉक्टर ने बता दिया है. (फाइल फोटो- PTI)
कोरोना वायरस की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) के दामों को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच लगातार टसल मचा हुआ है. ख़ासकर फ़ेज़-3 के वैक्सीनेशन को लेकर ये चीजें बढ़ गई हैं. समझते हैं कि पहले से तीसरे फ़ेज़ तक कैसे-कैसे चीजें बदलीं.
वैक्सीनेशन फ़ेज़-1
9 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि 16 जनवरी से देश में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ वैक्सीनेशन की शुरुआत होगी. शुरुआत में 2 वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल दिया गया.
पहली - ऑक्सफर्ड और Astrazeneca द्वारा विकसित और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्मित कोविशील्ड. दूसरी - भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोवैक्सीन.16 जनवरी से वैक्सीनेशन का फ़ेज़-1 शुरू हुआ. कहा गया कि सबसे पहले 3 करोड़ हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाई जाएगी. इसके बाद बाकी देशवासियों को. साथ ही केंद्र सरकार ने साफ़ कह दिया था कि वो पहले फ़ेज़ के टीकाकरण का ही मूल्य चुकाएगी. दूसरी डोज़ का ख़र्च राज्यों को वहन करना था. यहां तक वैक्सीन लाभार्थियों के लिए तो मुफ्त ही थी. सरकार को फ़ेज़-1 में कोविशील्ड की एक डोज़ 210 रुपये की और कोवैक्सीन की एक डोज़ 100 से 150 रुपये की मिल रही थी. यहां तक केंद्र और राज्य के लिए रेट बराबर थे. वैक्सीनेशन फ़ेज़-2 24 फरवरी को वैक्सीन के फ़ेज़-2 का ऐलान किया गया. कहा गया कि 1 मार्च से उन सभी लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी, जो 60 साल से ऊपर हैं. इसके अलावा 45 साल से ऊपर के उन लोगों को भी वैक्सीन दी जाएगी, जिन्हें कोई गंभीर बीमारी है. माने Comorbidity वाले. दूसरे फ़ेज़ के लिए दामों का स्ट्रक्चर भी अलग था. 10 हज़ार सरकारी वैक्सीनेशन सेंटर तैयार किए गए, जहां जाकर वैक्सीन लगवाने पर ये डोज मुफ्त थी. इसके अलावा जो लोग प्राइवेट सेंटर्स पर जाकर वैक्सीन लगवाएंगे, उन्हें 250 रुपये प्रति डोज़ देने थे. दूसरे चरण में केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट से बात करके कोविशील्ड के दाम और कम करा लिए. अब एक डोज़ 160 रुपये के करीब पड़ने लगी. कोवैक्सीन का दाम वही रहा. यहां तक भी केंद्र और राज्य के बीच कोई विवाद नहीं था. केंद्र सरकार वैक्सीन ख़रीदकर राज्यों को दे रही थी. वैक्सीनेशन फ़ेज़-3 1 अप्रैल से वैक्सीनेशन का दायरा थोड़ा और बढ़ाया गया. अब 45 साल से ऊपर के हर व्यक्ति को वैक्सीन लगवाने दायरे में ले आया गया. गंभीर बीमारी वाली शर्त हटा ली गई. इनके लिए भी वही बात थी. सरकारी सेंट्रर्स पर फ्री, प्राइवेट सेंटर्स पर 250 रुपये प्रति डोज़. 24 अप्रैल को ये ऐलान किया गया कि अब वैक्सीनेशन का फ़ेज़-3 शुरू होगा. कहा गया कि 1 मई से शुरू होने वाले इस चरण में 18 साल से ऊपर के सभी लोग वैक्सीन लगवा सकेंगे. यहां से केंद्र और राज्य के बीच टसल शुरू हुआ. 21 अप्रैल को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने केंद्र, राज्यों और निजी अस्पतालों के लिए कोविशील्ड के दाम तय किए. राज्य सरकारों को 400 रुपये प्रति डोज़, प्राइवेट अस्पताल को 600 रुपये प्रति डोज़. लेकिन इस रेट लिस्ट में केंद्र सरकार के लिए प्रति डोज़ का दाम नहीं बताया गया. स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐलान किया कि उन्हें कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों ही 150 रुपये प्रति डोज़ के दाम पर मिल रही हैं. यहीं से विवाद शुरू हुआ कि एक ही देश में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और प्राइवेट अस्पतालों के लिए वैक्सीन के दाम अलग-अलग कैसे हो सकते हैं? राज्यों का क्या कहना है? छत्तीसगढ़ सरकार: “हम 18 साल से ऊपर के लोगों को फिलहाल 1 मई से वैक्सीन नहीं लगा सकते क्योंकि वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं हैं.” पंजाब सरकार: “हमारे पास 4 लाख वैक्सीन ही बची हैं. अब जब तक केंद्र की तरफ से हमें और वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक 1 मई से सबको टीका कैसे लगा सकते हैं?” झारखंड सरकार: “दो वैक्सीन मैन्युफैक्चरर हैं. लेकिन दोनों की प्रोडक्शन कैपेसिटी को सरकार ने हाईजैक करके रखा है. हमें उनसे पर्याप्त वैक्सीन मिल ही नहीं रही है. जबकि हम तो पैसा देकर वैक्सीन लेने को भी तैयार हैं. केंद्र को वैक्सीन आवंटित करनी चाहिए.” राजस्थान सरकार: “1 मई से 18 साल से ऊपर वालों को वैक्सीन लगाने की बात कह दी गई है. लेकिन हमने सीरम इंस्टीट्यूट से बात की थी तो उनका कहना था कि सरकार जितनी वैक्सीन चाहती है, उतनी तैयार करने में कम से कम 15 मई तक का समय तो लगेगा. उनका साफ कहना था कि इससे पहले वो राजस्थान को इतनी वैक्सीन नहीं दे सकते.” दिल्ली सरकार: “ये मुनाफा कमाने का वक्त नहीं था. वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से अपील है कि कीमत को 150 रुपए प्रति डोज़ तक लाएं.” भारत में ही सबसे महंगी वैक्सीन? इस बीच इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर में दावा किया गया कि कोविशील्ड दुनिया के तमाम देशों की तुलना में भारत में ही सबसे महंगी है. इसमें कहा गया कि यूरोपीय यूनियन के देश कोरोना की वैक्सीन के लिए 160 रुपये से 260 रुपये तक प्रति डोज़ के हिसाब से पेमेंट कर रहे हैं. ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के मुताबिक़ ब्रिटेन प्रति डोज़ के लिए करीब 225 रुपये और अमेरिका करीब 300 रुपये प्रति डोज की पेमेंट कर रहा है. BBC की रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश इसके लिए 375 रुपये दे रहा है. यूनिसेफ के कोविड वैक्सीन मार्केट डैशबोर्ड के मुताबिक़, दक्षिण अफ्रीका और सऊदी अरब ने सीरम इंस्टीट्यूट को प्रति डोज़ करीब 395 रुपये के हिसाब से पेमेंट किया है. सीरम इंस्टीट्यूट का क्या कहना है? सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा – इस बीच वैक्सीन के दाम और अनुपलब्धता को लेकर राज्य सरकारों ने हाथ खड़े कर दिए. कुछ राज्यों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त वैक्सीन नहीं हैं. राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड ने तो साफ कह दिया कि वे 1 मई से सभी को वैक्सीन नहीं लगा पाएंगे. केंद्र का क्या कहना है? 25 अप्रैल को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने 4 पन्नों का एक बयान ट्वीट किया. जिसमें लिखा था,
इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी वैक्सीन के दाम को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया, जिससे भी तस्वीर कुछ ज्यादा साफ होती नहीं दिखी. इसमें लिखा है कि वैक्सीन मैन्युफैक्चरर महीने में जितनी वैक्सीन बनाएंगे, उसका 50 फीसदी केंद्र सरकार को देंगे. बाकी 50 फीसदी वैक्सीन वो राज्य सरकारों को या अन्य प्राइवेट संस्थानों को देने के लिए स्वतंत्र हैं. मान लीजिए महीने में 100 वैक्सीन तैयार हुईं. 50 केंद्र को दी गईं, 50 राज्य को. केंद्र को ये वैक्सीन 150 रुपये प्रति डोज़ में मिलेगी, राज्य को 400 रुपये में. अब केंद्र अपनी 50 में से 25 वैक्सीन राज्यों को मुफ्त में बांटेगा और बाकी 25 वैक्सीन प्राइवेट संस्थानों को देगा ताकि टीकाकरण तेज हो. लेकिन राज्यों की आपत्ति उन 50 वैक्सीन के दाम पर है, जो उन्हें मैन्युफैक्चरर से 400 रुपये में खरीदना पड़ेगी. और सवाल भी यही है कि एक ओर देश में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ की पैरवी की जाती है, तो दूसरी तरफ एक महामारी के टीके का दाम अलग-अलग कैसे रखा जा सकता है.Shared idealism is the need of the hour !
Politics around the world’s #LargestVaccineDrive needs to end, for the sake of our citizens. Here’s clarifying all aspects of upcoming phase 3 of our #Covid19Vaccination drive, putting all speculations to rest.https://t.co/RsdBUrkmMe pic.twitter.com/Mjoku3Bt4Y — Dr Harsh Vardhan (@drharshvardhan) April 25, 2021

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