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IPL मैच के दौरान लगे 'चौकीदार चोर है' के नारे और ये बहुत बुरा है

राजनीति पर्सनल लाइफ में कुछ ज्यादा ही जगह घेरने लगी है.

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26 मार्च 2019 (अपडेटेड: 26 मार्च 2019, 03:24 PM IST)
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प्रतीकात्मक फोटो
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छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर आईपीएल के एक मैच का वीडियो ट्वीट किया है. 24 सेकेंड के इस वीडियो में लोग चौकीदार चोर है के नारे लगा रहे हैं. इस वीडियो को पोस्ट करते हुए कांग्रेस ने लिखा है. देखें... जब IPL मैच के दौरान "चौकीदार चोर है" के नारों से गूंजने लगा स्टेडियम. मोदी जी! आप जनता को कितना भी भ्रमित कर लें लेकिन "चौकीदार चोर है" अब जन-नारा बन चुका है. आजकल हर जगह राजनीति हो रही है. चुनाव का मौसम है. राजनीति की चर्चा होनी भी चाहिए. इसमें कोई बुराई नहीं है. लेकिन क्रिकेट स्टेडियम में चौकीदार चोर है के नारे लगाना कितना सही है? आप मैच देखने गए हैं. हो सकता है कि आपकी दिलचस्पी बीजेपी, कांग्रेस या किसी और पार्टी में हो. ये भी हो सकता है कि आपकी दिलचस्पी किसी पार्टी में न हो. राजनीति में ही ना हो. आप सिर्फ रिलैक्स होने के लिए मैच देखने गए हैं और मैच के दौरान इस तरह के नारे लगने शुरू हो जाएं. जाहिर सी बात है आपको बुरा लगेगा. इस तरह की सार्वजनिक जगहों पर लोगों का जोश हाई रहता है. अगर दोनों तरफ से नारेबाजी होने लगे तो बवाल होने का भी खतरा है. इससे खिलाड़ियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी. क्रिकेट स्टेडियम में लोग मनोरंजन के लिए जाते हैं. मान लीजिए कल को आप मूवी देखने सिनेमा हॉल में गए हैं और लोग वहां भी चौकीदार चोर है और मैं भी चौकीदार के नारे लगाने लगे. आपको बुरा लगेगा और आप नहीं चाहेंगे कि ऐसा हो. मनोरंजन को मनोरंजन तक सी सीमित रहने दीजिए उसे राजनीति का अखाड़ा मत बनाइए. कावेरी जल विवाद को लेकर हुआ था स्टेडियम में बवाल 10 अप्रैल 2018 को चेन्नई के एम.ए.चिदंबरम स्टेडियम में मैच के बीच कावेरी विवाद को लेकर नारेबाजी हुई थी. मैच के दौरान फाफ डु प्लेसिस पर जूता फेंका गया था. हालांकि वह जूता उन्हें लगा नहीं था. कावेरी जल विवाद को लेकर प्रदर्शनकारियों ने धमकी दी थी कि अगर मैच हुआ तो स्टेडियम में सांप छोड़ देंगे. प्रदर्शनकारियों की वजह से अधिकारियों को स्टेडियम में घुसने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी. इस मैच में टॉस में भी 13 मिनट की देरी हुई थी. विरोध के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने आईपीएल टीमों की जर्सी भी जलाई थी. ये विरोध प्रदर्शन भी राजनीति से प्रभावित था. जब मैच के दौरान लहराए गए खालिस्तान समर्थक झंडे 4 मार्च 1992 को सिडनी में वर्ल्डकप का मैच चल रहा था. भारत-पाकिस्तान की टीम आमने-सामने थी. दोनों देशों के झंडे लहराए जा रहे थे. देशभक्ति उफान पर थी, हर्षा भोगले ऑस्ट्रेलिया के पीटर रोबक के साथ कमेंट्री कर रहे थे. रोबक को दर्शकों के हाथ में भारत-पाक के अलावा एक तीसरा झंडा दिखा. उन्होंने हर्षा भोगले से जानना चाहा ये झंडा किसका है? हर्षा भोगले कुछ न बोले. उनका सवाल सुनकर भी अनसुना कर गए. बाद में हर्षा भोगले ने बताया कि झंडा खालिस्तान का था. उन्होंने जान-बूझकर पीटर को नहीं बताया वरना वो खालिस्तान के बारे में और पूछ बैठते. उस समय भारत में खालिस्तान का मुद्दा गरम था. अगर ये बात वो पीटर रोबक से कह देते तो ये बात रेडियो पर चल जाती. कमेंट्री का प्रसारण आकाशवाणी पर भी हो रहा था तो संभव था कि इस पर विवाद भी हो जाते.
रनआउट पर विवाद के बाद हर्षा भोगले ने ऐसे अश्विन का सपोर्ट किया

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