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अमेरिकी सेना का वो कारनामा, जब दूसरे प्लेनेट को दुश्मन का गुब्बारा समझ गोले दागे

अमेरिकी मीडिया में इन दिनों कथित चीनी जासूसी गुब्बारे की बड़ी चर्चा है.

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when US army attacked venus thinking its a japanese balloon
(सांकेतिक तस्वीरें- रॉयटर्स और Pixabay.com)
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ज्योति जोशी
6 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 6 मार्च 2023, 07:58 AM IST)
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अमेरिका ने कथित चीनी जासूसी गुब्बारे को मिसाइल दागकर गिरा दिया है. इस गुब्बारे ने पिछले 3-4 दिनों से अमेरिकी मीडिया में हलचल मचाई हुई थी. पेंटागन के हवाले मीडिया रिपोर्टें आई थीं कि इस गुब्बारे को चीन ने अमेरिकी परमाणु केंद्रों की जासूसी करने के लिए मोंटाना राज्य के हवाई क्षेत्र तक पहुंचाया था. पहले आम लोगों की सुरक्षा की दलील देकर अमेरिकी सेना ने इसे नहीं गिराने का फैसला किया था. लेकिन रविवार को गुब्बारे पर मिसाइल मारी गई. इस बार एक शॉट में ही गुब्बारा नीचे आ गया. 

इसके बाद से 1945 का एक वाकया सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है. वो दूसरे विश्व युद्ध का समय था. तब भी अमेरिका ने इसी तरह का एक गुब्बारा गिराने की कोशिश की थी. उसे शक था गुब्बारा जापान ने भेजा है. अमेरिकियों पर बम गिराने के मकसद से.  ना जाने कितने राउंड फायरिंग हुई लेकिन एक निशाना भी सही नहीं लगा (1945 Japanese Balloon Bomb in US). निशाना लगना भी नहीं था. गलती तोपों की नहीं थी. उनमें दम था, और नाल में गोला भी था. गोले में बारूद भी था. लेकिन लक्ष्य पहुंच से दूर, बहुत दूर… मतलब बहुत दूर था. अंतरिक्ष में.

वीनस को गुब्बारा समझकर निशाना बनाया

फ्रांस की क्रांति से लेकर अलग-अलग युद्धकालों में देशों की सेनाओं ने हमलों या जासूसी के लिए बड़े-बड़े हवाई गुब्बारों का इस्तेमाल किया है. द्वितीय विश्व युद्ध में इन गुब्बारों का काफी इस्तेमाल हुआ था. वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जापान ने 3 नवंबर, 1944 से अप्रैल 1945 तक लगभग 10,000 बम वाले गुब्बारे लॉन्च किए थे. उन्हें ‘बलून बम’ भी कहा जाता था. उनमें से लगभग 300 अमेरिका में उतरे थे. ये बम जापान में स्कूली बच्चे बनाते थे. वो शहतूत के पेड़ के रेशों से टिशू पेपर की परत चढ़ाकर बनाए जाते थे. गैस डिस्चार्ज वाल्व और सैंडबैग की मदद से ये गुब्बारे करीब 30,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकते थे.

गुब्बारे में छिपे वो बम अमेरिका पहुंचने में तो सफल हो जाते थे, लेकिन फिर उनको कंट्रोल नहीं किया जा सकता था. वे कब किस जगह पर गिरकर फूटेंगे ये तय करना जापान के लिए मुश्किल था. उनका पता सरकार और सेना का तब चला आम लोगों ने जब जमीन पर छोटे-छोटे छेद और पास पड़े आधे फूले हुए गु्ब्बारे देखे.

5 मई, 1945 को दक्षिणी ओरेगन के गियरहार्ट माउंटेन क्षेत्र में चर्च के बाहर जंगल में एक परिवार को वो बलून बम दिखा था. जब तक वो कुछ समझ पाते बम फट गया. उस हादसे में 5 बच्चों समेत 6 लोगों की मौत हुई थी. अमेरिका ने पत्रकारों बलून बम की इन घटनाओं को छापने से मना कर दिया ताकि जापानियों को ना पता चले कि वो गुब्बारे US पहुंचने में सफल रहे. देश के लोगों को इसके बारे में चेतावनी दी गई. हालांकि तब तक जापान ने गुब्बारे लॉन्च करना बंद कर दिया था. उसके बाद कुछ समय तक बलून बम मिलते रहे.

1944 और 1945 में लगभग 500 अमेरिकी विमानों ने उन बलून बमों की खोज शुरू की. उत्तरी अमेरिका में दो को गिराया भी गया. ऐसे ही एक बलून बम को गिराने का किस्सा US नेवल इंस्टीट्यूट ने ट्विटर पर शेयर किया है. 

उसने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए ट्वीट में लिखा,

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यानी जिसे वो गु्ब्बारा समझ कर इतनी देर तक जद्दोजहद करते रहे वो अंतरिक्ष में एक दूसरा ग्रह निकला.

वीडियो: दुनियादारी: आसमान में दिखा जासूसी गुब्बारा, अमेरिका ने फाइटर जेट्स क्यों तैनात किए?

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